पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों के नाम से तर्पण करने से पितरों की शांति प्राप्त होती है। इस समय पितरों के नाम से रोजाना तर्पण किया जाता है। स्कंद पुराण में वर्णित है कि पितृपक्ष में पितरों के नाम से तर्पण करने के लिए एक जल में पानी भरकर उसमें काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके जल दिया जाता है।

स्कंद पुराण के अनुसार, स्वर्ग में पितरों के लिए हर चीज उपलब्ध होती है लेकिन, वह हर किसी चीज को आसानी से नहीं पा सकते हैं। इसलिए पितरों के नाम से जल और तिल से तर्पण करने से उन्हें संतुष्टि प्राप्त होती है। ऐसे में अगर आप बारबार तर्पण नहीं कर पा रहे हैं, तो आप जल से संबंधित कुछ उपाय आजमा सकते हैं, इससे आपके पितरों को शांति प्राप्त हो सकती है।
पितर पक्ष में करें पानी से जुड़े ये 5 उपाय
पितृ पक्ष के समय सूर्योदय के समय रोजाना जल अर्पित करें। प्रात: स्नान करने के बाद सबसे पहले एक तांबे के लोटे में जल लें और फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके अपने पितरों को याद करते हुए उनका तर्पण करें। इसके साथ ही अपने मन में अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता और शांति की प्रार्थना जरुर करें।
प्रतिदिन जल में काले तिल मिलाकर ही पितरों के नाम से तर्पण करें। अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। शास्त्रों में भी पितृ कर्म में तिल का विशेष महत्व माना जाता है।
पितृ पक्ष के दौरान रोजाना पीपल के वृक्ष में जल अर्पित जरुर करें। माना जाता है कि पीपल के पेड़ में देवता और पितरों का वास होता है। पीपल के पेड़ में जल अर्पित करते हुए मन ही मन पितरों को स्मरण करते हैं।
पितृ पक्ष में जरुरतमंदों और श्रामिकों के लिए पानी पीने की व्यवस्था करें। यह काफी पुण्यकारी सेवा मानी जाती है। किसी भी सार्वजनिक स्थान या प्याऊ या जल सेवा में सहयोग करें। भावना यह हो कि इससे किसी जीव की प्यास बुझे और सेवा का पुण्य पितरों को अर्पित करें।
पितृ पक्ष के समय अपने घर के बाहर या छत पर पक्षियों के लिए पानी रखें और इसे नियमित रुप से बदलते रहें। गाय, कुत्ते आदि जीवों के लिए अपने जरुरत के हिसाब से जल की व्यवस्था कराएं।