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‘गरीबों का सोना’ बनेगा भारत की अगली सक्सेस स्टोरी! क्या रफ्तार पकड़ेगा चांदी का घोड़ा​

भले ही सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिल रही हो, लेकिन बीते दो सालों में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. जहां सोने के दाम 1.50 लाख रुपए के लेवल को पार कर गए. वहीं दूसरी ओर चांदी की कीमतें 2.30 […]

भले ही सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिल रही हो, लेकिन बीते दो सालों में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. जहां सोने के दाम 1.50 लाख रुपए के लेवल को पार कर गए. वहीं दूसरी ओर चांदी की कीमतें 2.30 लाख रुपए के लेवल को पार कर गई थी. जो मौजूदा समय में 2.25 लाख रुपए के लेवल पर दिखाई दे रही हैं.

उसके बाद भी बीते दो बरस में चांदी की कीमतों में 150 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिन चुका है. यही वो वजह है कि आम लोग अब सोने की बजाय चांदी की ओर आकर्षित हो रहे हैं. जिसे गरीबों का सोना या फिर सफेद सोना के नामों से भी पुकारा जाता है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में इस सफेद की डिमांड और ज्यादा बढ़ने वाली है. इसका मतलब है कि डिमांड बढ़ेगी तो दाम भी बढ़ेंगे. जो गोल्ड को कमाई कराने के मामले में और ज्यादा पीछे छोड़ देंगे.

मौजूदा समय में सोने के दाम 1.50 लाख रुपए प्रति दस ग्राम है. जिसकी वजह से सोना आम लोगों की पहुंच से काफी दूर हो गया है. यही कारण है कि लोगों की नजर अब चांदी पर आकर अटक गई है. यही चांदी अब आने वाले ​दिनों में आम लोगों को अमीर बनाने जा रही है. या यूं कहें ककि भारत की अगली सक्सेस स्टोरी चांदी के नाम पर आकर रुक गई है. आइए विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर चांदी को लेकर इतना विश्वास क्यों जताया जा रहा है? क्या चांदी एक बार फिर से 4 लाख रुपए के लेवल को पार कर पाएगी? क्या चांदी की कीमतें सोने के तिलिस्म को तोड़ पाएगी.

दिवाली पर बढ़ेगी चांदी की डिमांड

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि भारत में लगातार चांदी की ओर झुकाव बढ़ रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण सोने का आम लोगों की पहुंच से दूर होना है. ऐसे में आने वाले दिनों में चांदी की खरीद गोल्ड ज्वेलरी खरीदने वालों की आदतों में बदलाव कर सकती है. वो कहते हैं कि जब जब सोना आम लोगों की पहुंच से दूर होता है तो तब तब चांदी आम लोगों को फायदा उठाने का मौका देती है.

IBJA का अनुमान है कि इस दिवाली सीजन में चांदी की खरीद पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 1718 फीसदी बढ़ेगी. भारत में चांदी की मांग ज्वेलरी, सिक्कों, बार और सोलर पैनल व इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे औद्योगिक कामों से आती है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल निवेश के लिए चांदी की मांग पारंपरिक खपत से ज्यादा रही है, जिसकी वजह चांदी के ETFs में बढ़ती दिलचस्पी है.

अब चांदी भी बना रही है अपनी जगह

  1. भले ही भारत के लोगों में गोल्ड को लेकर एक अलग तरह का लगाव है, लेकिन रिकॉर्ड कीमतों के कारण आम लोगों को इस खरीद को लेकर एक बार फिर से सोचने पर मजबूर ​कर दिया है.
  2. सेन्को गोल्ड एंड डायमंड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुवंकर सेन ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि सोने ने अपनी जगह तो बना ली है, लेकिन ऐसे समय में जब कीमतें ज्यादा हैं, सरकार इस मेटल के ज्यादा से ज्यादा दोबारा इस्तेमाल और रीसाइक्लिंग पर जोर दे रही है.
  3. सेन ने कहा कि लोग सोना खरीदते रहेंगे, लेकिन जाहिर है कि कुछ पाबंदियां और बजट की सीमाएं भी होंगी. उन्होंने कहा कि चांदी ज्वेलरी सेक्टर के लिए “बचाव का जरिया” बन सकती है, जिससे ग्राहकों को डिजाइन के साथ प्रयोग करने की ज़्यादा गुंजाइश मिलेगी.
  4. लेकिन उन्होंने कहा कि चांदी को ज्वेलरी की कहानी का एक बड़ा हिस्सा बनाने के लिए ग्राहकों को इसे अलग नजरिए से देखना होगा. पारंपरिक रूप से चांदी को बर्तनों और दूसरी चीजों से जोड़ा जाता रहा है. मुझे लगता है कि हमें डिजाइन में भी कुछ नया करने और चांदी को वह सम्मान देने की जरूरत है. यह निश्चित रूप से अगली बड़ी कहानी बन सकती है.
  5. सेन्को में, चांदी की मांग में औसतन 2530 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सेन ने कहा कि इस धातु में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है, हालांकि पिछले साल के त्योहारों के मौसम में यह रफ्तार अभी की तुलना में ज्यादा तेज थी.
  6. इसकी वजह यह है कि पिछले साल चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था — कीमतें लगभग 7080 रुपए प्रति ग्राम से बढ़कर 100 रुपए, फिर 120, 150, 180, 220 और 250 रुपए हो गईं और आखिरकार लगभग 400 रुपए तक पहुंच गईं. 400 रुपए प्रति ग्राम तक पहुंचने के बाद, फरवरीमार्च में कीमतें गिरकर लगभग 200 रुपए पर आ गईं.
  7. अब ये लगभग 220230 रुपए के आसपास हैं. इसलिए, उन्होंने कहा कि जब तक कीमतें कोई साफ दिशा नहीं दिखातीं, लोग बस इंतजार कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.
  8. जब उन्हें एहसास होगा कि यह खरीदने के लिए अच्छी कीमत है, कि कीमतों के गिरने की संभावना कम है और वे फिर से बढ़ सकती हैं, तो वे ज्यादा खरीदारी शुरू कर देंगे. इस बीच, कल्याण ज्वैलर्स में ग्राहकों ने चांदी के गहनों में “ज्यादा” दिलचस्पी दिखाई है, जैसा कि कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रमेश कल्याणरमन ने बताया. लेकिन इस दिलचस्पी से असल में कितनी बिक्री हो रही है, यह अभी साफ नहीं है.

अब चांदी सिर्फ सस्ती मेटल नहीं रही

हो सकता है कि सोने की वजह से चांदी चर्चा में आई हो, लेकिन यह बदलाव सिर्फ कीमत तक सीमित नहीं है. खासकर युवा भारतीय चांदी को एक अलग नजरिए से देख रहे हैं. वे ऐसी ज्वेलरी चाहते हैं जिसके साथ वे नए प्रयोग कर सकें और जिसे अक्सर पहन सकें—सोने के मामले में मौजूदा कीमतों पर ऐसा करना मुश्किल है.

जॉयलुक्कास ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, जॉय अलुक्कास ने कहा कि चांदी अब सिर्फ सस्ती धातु नहीं रही. युवा ग्राहक ऐसी ज्वेलरी की तलाश में हैं जिसे वे रोज पहन सकें, और चांदी इस जरूरत को स्वाभाविक रूप से पूरा करती है.

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के लिए बड़ा मौका यह है कि चांदी को सोने के विकल्प के तौर पर पेश करने के बजाय, इसे डिजाइन और क्वालिटी के आधार पर एक अलग कैटेगरी के तौर पर विकसित किया जाए. इसी तरह आप एक ट्रेंड को कैटेगरी में बदलते हैं.

उन्होंने कहा कि चांदी में भारतीय ज्वेलरी सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ की कहानी बनने की पूरी क्षमता है, लेकिन सोने के कॉम्पिटिटर के तौर पर नहीं, बल्कि उसके पूरक के तौर पर.

अगर ऑर्गनाइज्ड सेक्टर इस क्षेत्र में डिजाइन और प्रेजेंटेशन को लेकर गंभीर हो जाए, तो हमारे पास आज की दिलचस्पी को कल की आदत में बदलने का असली मौका है. मेरे हिसाब से, यही भारत की ज्वेलरी की कहानी में चांदी के अपने अध्याय की शुरुआत होगी.

कीमतों के प्रति संवेदनशील बाजार

अब सवाल यह है कि क्या ऊंची कीमतों पर भी यह तेजी बनी रह सकती है. लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप के लीड मेटल्स एनालिस्ट देबाजीत साहा ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि चांदी के गहनों की मांग कीमतों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कुछ सुधार होगा क्योंकि त्योहारों के मौसम में ग्राहकों की खरीदारी बढ़ती है. हालांकि, मौसमी सुधार के बावजूद, उन्हें उम्मीद है कि 2026 में चांदी के गहनों की मांग पिछले साल के स्तर से नीचे रहेगी, जबकि निवेश की मांग “मजबूत” बनी रहनी चाहिए.

बाज़ार की कीमतों के प्रति संवेदनशीलता इंडस्ट्री के डेटा में भी दिखती है. 2024 में चांदी के गहनों के बाज़ार का प्रदर्शन अच्छा रहा, जिसमें ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग 3 फीसदी बढ़कर 208.7 मिलियन औंस हो गई, जिसमें भारत की मुख्य भूमिका रही. चांदी के लिए अमेरिका स्थित गैरलाभकारी अंतरराष्ट्रीय इंडस्ट्री एसोसिएशन, ‘सिल्वर इंस्टीट्यूट’ के अनुसार, कम इंपोर्ट ड्यूटी, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ज्यादा प्योरिटी वाले गहनों की ओर झुकाव ने इस बढ़ोतरी में मदद की. लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक नहीं रही, क्योंकि चांदी की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी ने लोगों की खरीदने की क्षमता पर असर डालना शुरू कर दिया.

गोल्ड सिल्वर रेश्यो था बड़ा कारण

इस साल की शुरुआत में कीमतों में भारी उछाल और उसके बाद आई गिरावट के बाद, चांदी की कीमतें अभी स्थिर हो रही हैं. साहा ने कहा कि 121 डॉलर प्रति ओंस की ओर यह उछाल मुख्य रूप से सट्टेबाज़ी की गतिविधियों के कारण था, न कि बुनियादी वजहों से. जैसेजैसे गोल्डसिल्वर रेश्यो 100 के करीब पहुंचा, निवेशकों ने सोने की तुलना में चांदी को काफी कम कीमत वाला माना, जिससे तेजी से खरीदारी को बढ़ावा मिला.

चांदी के बुनियादी आधार उन ऊंचे स्तरों पर कीमतों को सही नहीं ठहराते थे. उन्होंने कहा कि जैसे ही बाजार का मूड बदला, सट्टेबाज़ी से जुड़ा प्रीमियम तेज़ी से खत्म हो गया, जिसके परिणामस्वरूप सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में कहीं ज़्यादा तेज़ी से गिरावट आई.

गोल्डसिल्वर रेश्यो यह बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की ज़रूरत होती है. ऐतिहासिक रूप से, ट्रेडर अक्सर इस रेश्यो को रिलेटिववैल्यू इंडिकेटर के तौर पर देखते हैं. जब यह असामान्य रूप से ऊंचा हो जाता है, तो कुछ निवेशक इसे सोने की तुलना में चांदी के सस्ते होने के संकेत के तौर पर देख सकते हैं और चांदी खरीद सकते हैं.

चांदी का रिकॉर्ड आयात

इस सफेद धातु की कीमतों के प्रति संवेदनशीलता मैन्युफैक्चरिंग डेटा में भी दिखती है. सिल्वर इंस्टीट्यूट ने कहा कि 2025 में भारत में चांदी के गहनों की मैन्युफैक्चरिंग में लगभग 20% की गिरावट आई, क्योंकि रुपये में चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं. दुनिया भर में, 2024 में चांदी की औद्योगिक मांग रिकॉर्ड 680.5 Moz तक पहुंच गई, जबकि अमेरिका स्थित एक संस्था का अनुमान है कि 2026 में भी वैश्विक चांदी बाजार लगातार छठे साल घाटे में रहेगा.

ग्लोबल लेवल पर सप्लाई में कमी और औद्योगिक मांग बढ़ने के बीच 2025 में भारत के चांदी बाजार में भारी उछाल देखा गया. कोटक म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत रिफाइंड चांदी का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक बन गया है. साल के दौरान इसका आयात लगभग 9.2 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो ऊंची कीमतों के बावजूद 2024 की तुलना में लगभग 44 फीसदी अधिक है. वहीं भगत आगाह करते हैं कि यह मान लेना सही नहीं होगा कि सोने से चांदी की ओर जाने वाला हर रुपया ग्राहकों की मांग में स्थायी बदलाव को दर्शाता है.

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संपादकीय टीम

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