दिव्या मित्तल ने IAS पद से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में आने का ऐलान किया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए उन्होंने इस्तीफा देने की पुष्टि करते हुए कहा, मुझे वंचितों की आवाज बनना है. राजनीति को बदलना होगा. राजनीति किसी दल के साथ नहीं. इरादे की राजनीति करनी होगी. किसी भी IAS के इस्तीफे के लिए पहला नियम है कि वो बिना शर्त के होना चाहिए. इस्तीफे में साफ बताया जाना चाहिए इसकी वजह क्या है.

इस्तीफे की प्रक्रिया उसी राज्य से शुरू होती है जहां IAS की तैनाती होती है. यानी एक IAS अधिकारी जिस राज्य में तैनात वो वहां के चीफ सेक्रेटरी को इस्तीफा भेजता है.
इस्तीफे की प्रक्रिया?
IAS राज्य के चीफ सेक्रेटरी को इस्तीफा देता है, लेकिन इससे यह तय नहीं हो जाता है कि यह 100 फीसदी मंजूर हो जाएगा. दोनों अधिकारी अपनी मर्जी से यह तय नहीं कर सकते. इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी होती है.
राज्य सरकार का काम उस IAS अधिकारी का इस्तीफा, विजिलेंस स्टेटस और उसकी ड्यू रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजना है. जिस तरह एक आईपीएस के इस्तीफे को गृह मंत्रालय और एक आईएफएस के इस्तीफे को पर्यावरण मंत्रालय मंजूरी देता है, उसी तरह आईएएस के अधिकारी के इस्तीफे पर मुहर लगाने का काम DOPT यानी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग करता है.
कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए। pic.twitter.com/mtS6gzBzRw
— Divya Mittal September 29, 2026
इस्तीफा वापसी का नियम
ऐसा बिल्कुल नहीं है कि एक बार इस्तीफा देने के बाद आईएएस या आईपीएस इसे वापस नहीं ले सकते. इसके लिए भी नियम है. अगर वापसी करना चाहते हैं तो 90 दिनों के अंदर इस्तीफा वापस लेना होगा. वापसी के लिए लिखित में आवेदन करना होगा.
हालांकि, कुछ मामलों में इस्तीफे की वापसी संभव नहीं होती. ऑल इंडिया सर्विस रूल्स कहता है कि इस्तीफे की मंशा भी चीजें प्रभावित करती है. अगर किसी अधिकारी ने इस सोच के साथ इस्तीफा दिया है कि वो चुनाव लड़ेगा या किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बनेगा तो उन्हें इस्तीफा वापस लेने का अधिकार नहीं दिया जाएगा.
क्या इस्तीफा मंजूरी के बाद वापसी होगी?
नहीं, नियम कहता है कि अगर इस्तीफा मंजूर हो गया है कि उसके लिए प्रॉसेस पूरी हो गई है तो उसके बाद इस्तीफे की वापसी नहीं होती. वापसी की संभावना तब तक ही होती है जब वो मंजूर न हुआ है.
दिव्या मित्तल के मामले में वापसी जैसा कोई सवाल नहीं उठता, क्योंकि उन्होंने साफ कर दिया है कि वो राजनीति में आना चाहती हैं और फिलहाल इसकी वापसी जैसी कोई स्थिति भी नहीं नजर आ रही है. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश मेरी कर्मभूमि है और शुरुआत यहीं से रूकंगी. उनका कहना है कि मुझे बताया गया कि इस देश में कुछ नहीं बदलता है और खासतौर पर उत्तर प्रदेश में बिल्कुल भी नहीं. मैं उस देश को जानती हूं जिसको लेकर कहा गया था कि आजादी के बाद यह टुकड़ों में बंट जाएगा, लेकिन मेरा देश आज भी खड़ा है.