राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में मशहूर कलाकारों से अपील की कि वे नशे की चीजों और ऐसी हानिकारक वस्तुओं का प्रचार न करें. उन्होंने कहा कि स्टार वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं. उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों युवाबच्चे आपको आदर्श के रूप में देखते हैं. आपकी जीवन शैली की नकल करते हैं. इसे रोकना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि देश में करोड़ों युवा नशे की गिरफ्त में है. नशे का वैधअवैध कारोबार अरबों का है.

आइए, राष्ट्रपति की इस अपील के बहाने जानते हैं कि पानमसाला और शराब जैसी कितनी चीजों की आड़ में सेलेब्रिट इलायची, मिनिरल वॉटर समेत क्याक्या बेचते हैं? विवाद होने के बाद भी इन्हें क्यों नहीं रोका जाता? पान मसाला और शराब का कारोबार देश में कितना बड़ा?
क्या है सरोगेट विज्ञापन?
किसी विज्ञापन में सामने इलायची, सोडा या मिनरल वॉटर दिखता है. लेकिन दर्शक को याद आता है पानमसाला या शराब का ब्रांड. यही सरोगेट विज्ञापन की बुनियादी चाल है. प्रतिबंधित या सीमित उत्पाद का नाम सीधे लेने के बजाय, उसी ब्रांड से जुड़े दूसरे उत्पाद को प्रचार का चेहरा बनाया जाता है. यहां जरूरी फर्क समझना चाहिए. हर इलायची या पानी का विज्ञापन सरोगेट विज्ञापन नहीं होता. सवाल तब उठता है, जब दूसरे उत्पाद का नाम, रंग, लोगो, पैकेजिंग, जिंगल या विज्ञापन की शैली किसी पानमसाला या शराब ब्रांड की याद दिलाए. तब यह जांच का विषय बनता है कि विज्ञापन सचमुच उस दूसरे सामान को बेच रहा है, या मुख्य रूप से प्रतिबंधित उत्पाद का नाम लोगों तक पहुंचा रहा है.
सरोगेट विज्ञापनों के जरिए पानमसाला और शराब का प्रचार हो रहा है.
ऐसे विज्ञापन में क्याक्या दिखाया जाता है?
पानमसाला और तंबाकू से जुड़े ब्रांडों के साथ इलायची, माउथ फ्रेशनर और दूसरे सुगंधित उत्पादों के विज्ञापन दिखाए जाते हैं. शराब के ब्रांड पानी, सोडा, म्यूजिक या मनोरंजन से जुड़े नामों के जरिए सामने आते हैं. कई बार विज्ञापन में उत्पाद से ज्यादा ब्रांड का नाम, रंग और पहचान याद रह जाती है. इस रणनीति का मकसद सिर्फ एक छोटा उत्पाद बेचना नहीं होता. बारबार दिखने वाला नाम ब्रांड को लोगों के दिमाग में बनाए रखता है. यही वजह है कि किसी विज्ञापन में इलायची लिखा होने भर से विवाद खत्म नहीं होता. उसकी पूरी प्रस्तुति और बाजार में ब्रांड की पहचान ठीक से देखी जाती है. यहीं पेंच है. कानून की कमजोरी भी कंपनियों और प्रचार में जुड़े मशहूर लोगों को मौके देती है.
सेलेब्रिटी क्यों जुड़ते हैं?
फिल्मी सितारों और लोकप्रिय खिलाड़ियों की पहचान बड़ी होती है. उनके चेहरे से विज्ञापन जल्दी लोगों का ध्यान खींचता है. कंपनी को उम्मीद होती है कि उनकी लोकप्रियता से ब्रांड का नाम भी घरघर पहुंचेगा. इसके बदले उन्हें अच्छीखासी फीस मिलती है. लेकिन विवाद होने पर जिम्मेदारी का सवाल बरबस उठता है. क्या कलाकार को पता था कि विज्ञापन किस उत्पाद और किस ब्रांड पहचान को बढ़ावा दे रहा है? क्या उसने अनुबंध और उत्पाद की जानकारी ठीक से जांची? कंपनी का दावा क्या है?
इन सवालों के जवाब हर मामले में अलगअलग होते हैं. इसलिए कई बार आरोप या नोटिस की चर्चा तो बहुत होती है लेकिन वह कानून से बच निकलते हैं. यूं, पानमसाला विज्ञापनों को लेकर पहले भी बड़े सितारों की सार्वजनिक आलोचना हुई है. आयरिशअमेरिकी अभिनेता पियर्स ब्रॉसनन ने 2016 में एक पानमसाला विज्ञापन पर विवाद के बाद माफी मांगी थी. उन्होंने कहा था कि उन्हें लगा था कि उत्पाद माउथ फ्रेशनर या दांत चमकाने वाला सामान है.
आयरिशअमेरिकी अभिनेता पियर्स ब्रॉसनन ने 2016 में एक पानमसाला विज्ञापन पर विवाद के बाद माफी मांगी थी.
विवाद के बाद भी रोक क्यों नहीं लगती?
कानून कुछ उत्पादों के विज्ञापन पर रोक लगाते हैं, लेकिन कंपनियां कह सकती हैं कि वे किसी दूसरे, वैध उत्पाद का प्रचार कर रही हैं. फिर यह तय करना पड़ता है कि वह सचमुच अलग उत्पाद का विज्ञापन है या प्रतिबंधित उत्पाद की छिपी हुई ब्रांडिंग. नियामक संस्था को सबूत और नियमों के आधार पर कार्रवाई करनी होती है. वह नोटिस जारी कर सकती है, जवाब मांग सकती है या विज्ञापन की जांच कर सकती है. लेकिन किसी विज्ञापन को रोकने या दंड लगाने की प्रक्रिया में यह देखना पड़ता है कि कौनसा कानून लागू होता है?
विज्ञापन किस माध्यम पर चला और संबंधित पक्षों की भूमिका क्या थी? कई बार कार्रवाई और अंतिम फैसले के बीच समय लगता है. अलगअलग राज्यों के नियम और उत्पादों पर लगी पाबंदियां भी एक जैसी नहीं होतीं. दूसरी ओर, कंपनियां अपने विज्ञापन को ब्रांड एक्सटेंशन या अलग उत्पाद का प्रचार बताती हैं. इसीलिए हर विवाद में फैसला सिर्फ विज्ञापन देखकर नहीं होता. उत्पाद की उपलब्धता, पैकेजिंग, बाजार की स्थिति और विज्ञापन की भाषा जैसे पहलुओं की जांच जरूरी होती है. हाल में नामी कंपनी के इलायची के प्रचार को लेकर महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस दिए जाने की खबरें आम हुईं. यह नोटिस आरोप और जवाब मांगने की प्रक्रिया है, अपने आप में अंतिम दोषनिर्णय नहीं.
अजय देवगन, शाहरुख और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस दिया गया था.
पानमसाला कारोबार कितना बड़ा है?
भारत में पानमसाला बाजार के आकार के अलगअलग आंकड़े मिलते हैं. अंतर इस बात से पड़ता है कि अनुमान में किन उत्पादों को शामिल किया गया है और गणना किस वर्ष की है. एक अनुमान के मुताबिक साल 2025 में इसका मूल्य करीब पांच अरब डॉलर, यानी लगभग 48 हजार करोड़ रुपये बताया गया. यह भी याद रखना जरूरी है कि पानमसाला और तंबाकू वाले गुटखे को एक ही चीज नहीं मानना चाहिए. सामग्री और कानूनी स्थिति अलग हो सकती है. कुछ राज्यों में खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत तंबाकू या निकोटिन वाले गुटखे और पानमसाले पर पाबंदी लगाई जाती है. इसलिए पूरे देश में एक जैसा प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था नहीं है. राज्य सरकारों के कानून इस मामले में ज्यादातर लागू होते हैं.
शराब का सालाना कारोबार कितना है?
शराब के बाजार का आकार भी गणना के तरीके पर निर्भर करता है. इसमें बीयर, स्पिरिट, देसी शराब, वाइन और दूसरे उत्पाद शामिल किए जाएं या नहीं, इससे कुल राशि बदलती है. बाजार शोध के एक अनुमान में भारतीय शराब उद्योग का 2024 का राजस्व करीब 52.7 अरब डॉलर बताया गया है. यह बाजारराजस्व का अनुमान है, सरकारी करआय नहीं. शराब से राज्यों को आबकारी कर के रूप में बड़ी आय मिलती है. शराब की बिक्री पर नियम, लाइसेंस और कर राज्य के अनुसार बदलते हैं.
राष्ट्रपति की अपील
मैं यह अनुरोध करना चाहूंगी कि लोकप्रिय कलाकार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का endorsement न करें। Star वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं। pic.twitter.com/5VPwBxK4Y2
— President of India September 22, 2026
असली सवाल यह कि ग्राहक क्या देख रहा है?
सरोगेट विज्ञापन की बहस केवल कानूनी तकनीक तक सीमित नहीं है. इसका संबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता की समझ से भी है. अगर विज्ञापन किसी दूसरे उत्पाद के नाम पर चलता है, लेकिन दर्शक को बारबार वही तंबाकू या शराब वाला ब्रांड याद आता है, तो यह पूछा जाना स्वाभाविक है कि प्रचार का असली लक्ष्य क्या है. इसलिए जरूरत साफ नियमों और समान रूप से लागू कार्रवाई की है. विज्ञापन में दिख रहे उत्पाद की वास्तविक मौजूदगी, बिक्री और प्रस्तुति की जांच होनी चाहिए. सेलिब्रिटी को भी अपने नाम और चेहरे के इस्तेमाल से पहले उत्पाद तथा ब्रांड की पूरी जानकारी लेनी चाहिए. दर्शकों को भी यह समझना चाहिए कि आकर्षक विज्ञापन किसी उत्पाद को सुरक्षित या स्वस्थ साबित नहीं करता.
क्या प्रचार करने वाली किसी हस्ती को सजा मिली?
अनेक नियमकानून, एजेंसियों के होने के बावजूद आजतक देश में किसी भी मशहूर हस्ती को सजा नहीं मिली है. फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन ने खुद से पान मसाला का विज्ञापन छोड़ दिया था. उन्हें किसी ने कहा नहीं था. इलायची के विज्ञापन के मामले में फिल्म अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्राफ को नोटिस देने की जानकारी सुर्खियां बनीं लेकिन उसके आगे क्या हुआ? यह जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है. यह विज्ञापन अभी भी अनेक माध्यमों से प्रसारित हो रहा है.
सरोगेट विज्ञापन के कुछ उदाहरण देखें
- इलायची: फेमस ब्रांड के इलायची के विज्ञापन में वही ब्रांड नाम और पहचान दिखती है जो पानमसाला से भी जुड़ी है. पानमसाला बनाने वाली कंपनी नामी कंपनियां माउथ फ्रेशनर या इलायची के नाम से इन्हें प्रचारित करती है. आलोचकों का कहना है कि ऐसे विज्ञापनों से पानमसाला ब्रांड की पहचान बनी रहती है. और कंपनी को व्यापार में भरी मुनाफा होता है.
- सोडा: सोडा के विज्ञापन में एक नामी ब्रांड और उससे जुड़ी पहचान का इस्तेमाल होता है. इस वजह से इसे शराब ब्रांड के अप्रत्यक्ष प्रचार का उदाहरण बताया जाता है.
- पैकेज्ड वॉटर: पानी के विज्ञापनों में किंगफिशर नाम दिखाई देता है. यह नाम बीयर ब्रांड से भी जुड़ा है, इसलिए ऐसे विज्ञापनों पर सरोगेट प्रचार की बहस होती रही है.
- म्यूजिक: संगीत और मनोरंजन से जुड़े प्रचार में एक नामी शराब कंपनी के नाम का इस्तेमाल हुआ है. आलोचकों के अनुसार, इससे व्हिस्की ब्रांड की याद बनी रह सकती है.
- सोडा: सोडा के विज्ञापनों में ब्रांड नाम और पहचान दिखाई जाती है. इस वजह से इसे शराब ब्रांड के अप्रत्यक्ष प्रचार के उदाहरण के रूप में चर्चा में रखा जाता है.