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भारत की रफ्तार के सामने चीन और यूरोप हुए चिंत! ग्लोबल इकोनॉमी में बजा इंडिया का डंका​

एक आकलन के अनुसार, भारत ग्लोबल ग्रोथ के मामले में सबसे आगे उभरकर आया है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के सर्वे में शामिल मुख्य अर्थशास्त्री भारत की संभावनाओं को लेकर ज़्यादा पॉज़िटिव हो रहे हैं, जबकि चीन के लिए आउटलुक कमज़ोर हो रहा है और यूरोप सबसे कमज़ोर क्षेत्र बना हुआ है.सितंबर के WEF ‘चीफ इकोनॉमिस्ट्स […]

एक आकलन के अनुसार, भारत ग्लोबल ग्रोथ के मामले में सबसे आगे उभरकर आया है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के सर्वे में शामिल मुख्य अर्थशास्त्री भारत की संभावनाओं को लेकर ज़्यादा पॉज़िटिव हो रहे हैं, जबकि चीन के लिए आउटलुक कमज़ोर हो रहा है और यूरोप सबसे कमज़ोर क्षेत्र बना हुआ है.सितंबर के WEF ‘चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक’ में पाया गया कि सर्वे में शामिल 98 फीसदी अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में भारत में औसत या उससे बेहतर ग्रोथ होगी, जबकि 74 फीसदी को मजबूत या बहुत मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है. मई के सर्वे में यह आंकड़ा 52 फीसदी था, जो अब तेजी से बढ़ा है.

WEF ने कहा कि जिन क्षेत्रों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें भारत का ग्रोथ आउटलुक सबसे मजबूत बना हुआ है और मजबूत घरेलू मांग से इसे सपोर्ट मिल रहा है. अगस्त में इसने वित्त वर्ष 202627 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया, साथ ही यह भी चेताया कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें आउटलुक पर असर डाल रही हैं.

भारत को लेकर सोच में आया यह बदलाव चीन के बिल्कुल उलट है, जहां अब लगभग हर तीन में से एक अर्थशास्त्री को कमजेार ग्रोथ की उम्मीद है. वहीं यूरोप सर्वे में सबसे कमजेार क्षेत्र बना हुआ है, जहां 61 फीसदी अर्थशास्त्रियों को कमजेार या बहुत कमजेार ग्रोथ की आशंका है.

अमेरिका, दक्षिणपूर्व एशिया और मध्य एशिया के लिए भी मज़बूत ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है, जिससे भारत दुनिया के सबसे पॉजिटव नजरिए वाले ग्रोथ इंजन के ग्रुप में शामिल हो गया है. लेकिन भारत एकमात्र ऐसा क्षेत्र था जिसे WEF ने खास तौर पर सबसे मजबूत ओवरऑल ग्रोथ आउटलुक वाला क्षेत्र बताया.

भारत निकला चीन से आगे

  1. यह अंतर पिछले सर्वे के मुकाबले साफ तौर पर देखा जा सकता है. मई में, 52 फीसदी अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि अगले 12 महीनों में भारत में मजबूत या बहुत मजबूत ग्रोथ होगी.
  2. अब यह आंकड़ा बढ़कर 74% हो गया है, जबकि जियोपॉलिटिकल और एनर्जी से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं. वहीं, चीन की स्थिति इसके उलट है. WEF ने कहा कि उसकी ग्रोथ की उम्मीदें कमजोर हुई हैं और लगभग एकतिहाई अर्थशास्त्रियों को कमजोर ग्रोथ की आशंका है.
  3. पिछले आकलन के मुकाबले यूरोप की स्थिति में थोड़ी सुधार हुआ है, लेकिन क्षेत्रीय उम्मीदों के मामले में वह अभी भी सबसे नीचे है. 61 फीसदी लोगों को कमजोर या बहुत कमजोर ग्रोथ की उम्मीद है.
  4. व्यापक वैश्विक तस्वीर में सुधार हुआ है. अब 56 फीसदी मुख्य अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि ग्लोबल इकोनॉमिक स्थिति स्थिर रहेगी या उसमें सुधार होगा, जबकि मई में यह आंकड़ा सिर्फ़ 11% था और 89% लोगों को हालात बिगड़ने की आशंका थी.
  5. लेकिन माहौल में सुधार अभी भी कमजोर है. 97 फीसदी लोगों ने जियोपॉलिटिकल टकरावों को अगले साल अनिश्चितता का संभावित कारण बताया, जबकि 58% लोगों को एसेट की कीमतों में सुधार की उम्मीद है.
  6. भारत के लिए, यह ताज़ा आकलन एनर्जी और जियोपॉलिटिकल जोखिमों के बने रहने के बीच आया है. WEF ने कहा कि एनर्जी की ज़्यादा कीमतें देश की आर्थिक उम्मीदों पर असर डाल रही हैं. यह उस इकोनॉमी के लिए एक बड़ी चिंता की बात है जो आयातित कच्चे तेल पर बहुत ज़्यादा निर्भर है.

घरेलू मांग से बची है इकोनॉमी

फिर भी, घरेलू मांग ने भारत की विकास की उम्मीदों को सहारा दिया है. WEF के आकलन से पता चलता है कि अर्थशास्त्री भारत की आंतरिक मांग को इतना मजबूत मानते हैं कि बाहरी जोखिमों के बावजूद विकास जारी रह सकता है. यह सर्वे भारत के हालिया आधिकारिक GDP डेटा के आने से पहले किया गया था, जिसमें अप्रैलजून तिमाही में अर्थव्यवस्था के 7.8 फीसदी बढ़ने की बात सामने आई थी. उम्मीद से बेहतर विकास के कारण कई अनुमान लगाने वालों ने इस साल के लिए अपने विकास के अनुमान बढ़ा दिए हैं.

भारत की विकास क्षमता और मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए एक डेस्टिनेशन के तौर पर इसके आकर्षण के बीच भी एक उल्लेखनीय अंतर है. जहां अर्थशास्त्रियों ने भारत को विकास के मामले में सबसे मजबूत आउटलुक दिया, वहीं मई में अनुकूल कारोबारी माहौल के मामले में इसकी रैंकिंग दूसरे से गिरकर चौथे स्थान पर आ गई. केवल 40 फीसदी लोगों ने भारत को अपनी शीर्ष तीन जगहों में शामिल किया, जबकि पहले यह आंकड़ा 56 फीसदी था.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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