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यूपी में राज्यसभा की 10वीं सीट किसकी, सारी लड़ाई इसी की… फिर होगा खेला या निर्विरोध जीत​

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यसभा का चुनावी रण सज गया है. राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा और उसी दिन नतीजे भी आएंगे. चुनाव आयोग ने 29 सितंबर से चुनावी प्रक्रिया शुरू करने का कार्यक्रम घोषित किया है. 6 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख होगी, 7 […]

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यसभा का चुनावी रण सज गया है. राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा और उसी दिन नतीजे भी आएंगे. चुनाव आयोग ने 29 सितंबर से चुनावी प्रक्रिया शुरू करने का कार्यक्रम घोषित किया है. 6 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख होगी, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर को नाम वापसी होगी. अब सवाल ये है कि उत्तर प्रदेश की 10 सीटों में कितनी सीट किसके खाते में जाएगी?

मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से तस्वीर काफी हद तक साफ है. सात सीटें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खाते में जाती दिख रही हैं, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटें निकाल सकती है, लेकिन इसके बाद बचती है एक सीट. यही दसवीं सीट इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा सियासी सवाल बन गई है,क्योंकि एक राज्यसभा सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट चाहिए.

कौनकौन सी सीटें खाली हो रही हैं?

मौजूदा समय में 10 सीटों में से आठ सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के पास है. भाजपा के मौजूदा सदस्य हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, नीरज शेखर, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बीएल वर्मा और दिनेश शर्मा. सपा राम गोपाल यादव और बसपा रामजी गौतम. दिनेश शर्मा राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं. उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है.

अब समझिए असली गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल क्षमता 403 है, लेकिन इस समय छह सीटें खाली हैं. इसलिए प्रभावी विधानसभा संख्या 397 है और इसी संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए 37 वोट का कोटा बनता है. भाजपा के पास 256 विधायक हैं. अनुप्रिया की पार्टी अपना दल के 13, जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल के 9, ओपी राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं. इन चार सहयोगी दलों को जोड़ने पर संख्या 289 होती है. राजा भैया की जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायक हैं, जो NDA के पाले में जा सकते हैं. साथ ही तीन निर्दलीय विधायक हैं, जो अभी बीजेपी के साथ हैं. यानी आंकड़ा 294 पहुंचता है.

सात सीटें क्यों मजबूत?

एक सीट के लिए 37 वोट चाहिए. तो सात सीटों के लिए 259 वोट यानी 289 विधायकों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास सात उम्मीदवारों को जिताने के बाद करीब 30 वोट बचते हैं. अगर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दोनों विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 294 हो जाती है. तब सात सीटें निकालने के बाद करीब 35 वोट बचेंगे… लेकिन आठवीं सीट के लिए चाहिए 37 वोट. यानी समर्थन के हिसाब से भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को आखिरी सीट के लिए 23 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे.

सपा के पास कितना दम?

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं. कांग्रेस के पास दो विधायक हैं. अगर कांग्रेस का समर्थन समाजवादी पार्टी को मिलता है तो विपक्षी खेमे के पास 103 विधायक हो जाते हैं. दो राज्यसभा सीटों के लिए 74 वोट चाहिए. यानी दो सीटें निकालने के बाद भी समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी खेमे के पास अतिरिक्त वोट बचते हैं. मौजूदा संख्या के आधार पर इसलिए दो सीटों पर समाजवादी पार्टी की स्थिति मजबूत दिखाई देती है, लेकिन तीसरी सीट के लिए समीकरण बदल जाएगा. सपा के पास 29 अतिरिक्त वोट बचेंगे.

बसपा के लिए क्यों बड़ा झटका?

इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी राज्यसभा सीट बचाने की है. रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन मौजूदा विधानसभा में बसपा का कोई विधायक नहीं है. ऐसे में 37 प्रथम वरीयता वोट का कोटा अपने दम पर हासिल करना उसके लिए संभव नहीं है. यानी मौजूदा संख्या बल के आधार पर बसपा की राज्यसभा सीट बचती हुई दिखाई नहीं देती.

असली कहानी 10वीं सीट की है

क्योंकि पहले सात सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का संख्या बल मजबूत है और समाजवादी पार्टी दो सीटों के लिए जरूरी आंकड़ा जुटा सकती है, इसलिए असली टकराव आखिरी सीट पर है. दरअसल, राज्यसभा चुनाव में विधायकों को अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वरीयता देनी होती है. इसलिए किसी दल के पास संख्या होने के बावजूद उम्मीदवारों की संख्या और वोटों का बंटवारा चुनाव के अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकता है.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्रॉस वोटिंग कोई नई बात नहीं है. 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश में सपा के विधायकों के पाला बदलकर मतदान करने की घटनाएं सामने आई थीं. हालांकि, विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों में बीजेपी के पास 35 अतिरिक्त वोट हैं और सपा के पास 29 अतिरिक्त वोट हैं. ऐसे में बीजेपी को 10वीं सीट जीतने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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