दिल्ली में रहने वाली तन्वी के ऑफिस वाला लैपटॉप शाम के 6 बजे बंद होता है. लेकिन काम खत्म 6 बजे के बाद शुरू होती है उसकी दूसरी शिफ्ट वो भी दूसरे ऑफिस में. दिन में एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी की नौकरी और रात में यूएस के एक क्लाइंट के लिए फ्रीलांस वीडियो एडिटिंग. रात करीब 11 बजे तक वो लैपटॉप पर लगी रहती है. उससे पूछो इतनी मेहनत किसलिए तो हमेशा हंसकर कहती है “दिन की नौकरी से घर का किराया और दालरोटी चलती है, और रात के हसल से मेरे सपने और वेकेशन ट्रिप्स पूरे होते हैं.” तन्वी वाला वर्क स्टाइल किसी एक सिटी या एक प्रोफेशन की कहानी नहीं रही.एक नौकरी के साथ फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन सेलिंग, कंटेंट क्रिएशन या कोई दूसरा प्रोजेक्ट अब वर्क कल्चर का हिस्सा बनता जा रहा है. इसे कोई साइड हसल कहता है, कोई मूनलाइटिंग. इसके पीछे महज ज्यादा पैसे कमाने की इच्छा नहीं है. करियर में नई स्किल सीखना, इनकम बढ़ाना, फ्यूचर के लिए सोचना पहचान और पैशन के लिए काम करना जैसी तमाम वजहें भी हैं.

डेटा क्या कहता है?
वर्कप्लेस के ये आंकड़े बताते हैं कि नौकरी का तरीका कैसे बदल गया है
- दुनिया भर के 50% से अधिक Gen Z और मिलेंनियल्स अपने मेन जॉब के अलावा कोई न कोई साइड बिजनेस, फ्रीलांसिंग या कंटेंट क्रिएशन कर रहे हैं.
- भारत के टेक और क्रिएटिव सेक्टर्स में लगभग 40% प्रोफेशनल्स चुपके से या खुलकर मूनलाइटिंग का हिस्सा बन चुके हैं.
- 70% कंपनियां मूनलाइटिंग को ‘धोखा’ मानती हैं और इम्पलाई को जॉब से निकाल देती हैं, जबकि 30% मॉडर्न कंपनीज़ इसे स्वीकार कर रही हैं, बस उनकी कंपनी का डेटा लीक न हो.
- एक एवरेज साइड हसलर अपनी मेन सैलरी के अलावा 20% से 50% तक एक्सट्रा कमाई कर लेता है.
युवा सिर्फ एक नौकरी पर क्यों नहीं रुक रहे?
- दुनिया की सबसे बड़ी प्रोफेशनल सर्विसेज नेटवर्क्स में एक डेलॉयट के 2025 ग्लोबल जेन जेड एंड मिलेनियल सर्वे में 44 देशों के 23,482 जेन ज़ेड और मिलेनियल्स को शामिल किया गया. भारत से 809 लोगों ने इस सर्वे में हिस्सा लिया.
- भारत के डेटा में 85% जेन ज़ेड और मिलेनियल्स ने बताया कि वे अपने काम में जेनरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं.
- 85% इंडियन यंगस्टर्स हर हफ्ते किसी न किसी तरह सीखने या अपनी स्किल बढ़ाने की एक्टिविटी करते हैं
- यानी ऑफिस खत्म होने के बाद का टाइम रेस्ट नहीं स्किल डेवलपमेंट या अगली कमाई की तैयारी के लिए जा रहा है .
साइड हसल का मतलब सिर्फ पैसा नहीं
डेलॉयट के सर्वे में 67% जेन जी ने बताया कि अब ऑफिस टाइम के बाद खुद को अपस्किल करने का ट्रेंड काफी बढ़ा है. इसके पीछे पैसे की चिंता भी वजह है. भारत के इसी सर्वे में लगभग आधे जेन ज़ी और मिलेनियल्स ने कहा कि वे खुद को फाइनेंशियली सिक्योर महसूस नहीं करते. इसीलिए साइड हसल बस एक्स्ट्रा काम नहीं एक्स्ट्रा इनकम, न्यू स्किल, और बैकअप प्लान है
भारत में मूनलाइटिंग का डेटा
2022 में इंडीड के एक सर्वे में भारत के 19% एम्पलॉयीज़ ने माना वो अपनी मौजूदा जॉब के साथ दूसरी नौकरी करना चाहते हैं. हालांकि 81% ने ऐसा नहीं करने की इच्छा जताई. आईटी सेक्टर में 43% एम्पलॉयीज ने मूनलाइटिंग का फेवर किया. एआई बेस्ड रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म कटशॉर्ट के 3,085 टेक प्रोफेशनल्स के सर्वे में लगभग 23 फीसदी लोगों ने बताया वो कभी न कभी मूनलाइटिंग कर चुके हैं. 7.36% लोगों ने माना वो एक्टिवली मूनलाइटिंग कर रहे है.
कंपनियों की टेंशन
कर्मचारी के लिए साइड हसल एक्स्ट्रा कमाई या एक्सपीरियंस हो सकता है. लेकिन कंपनियों के लिए उनका हित अलग है. अगर कर्मचारी का दूसरा काम ऑफिस के टाइम से क्लैश करता है. कंपनी के डेटा या क्लाइंट से जुड़ा है, कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन करता है, तो मामला सिर्फ एक्स्ट्रा काम का नहीं रह जाता.
इसीलिए मूनलाइटिंग और साइड हसल को एक ही चीज मानना भी सही नहीं है. मूनलाइटिंग आम तौर पर दूसरी नौकरी या पेड वर्क को कहा जाता है, जबकि साइड हसल में फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन, ऑनलाइन बिजनेस या अपनी स्किल से कमाई जैसे कई मॉडल आ सकते हैं.
आपकी जॉब आपकी रेग्युलर इनकम सिक्योर करती है एक्सट्रा काम एक्स्ट्रा पैसा और अलग तरह का एक्सपीरियंस देता है.लेकिन बात ये है कि ऑफिस के बाद भी दूसरा ऑफिस शुरू हो जाए, तो जिंदगी में बचता क्या है?
आज की युवा पीढ़ी Gen Z और मिलेनियल्स दोनों एक सैलरी स्लिप के भरोसे बैठने को तैयार नहीं है. महंगाई का बढ़ना और जॉब इन्सिक्योरिटी ने लोगों को ‘मल्टीटास्कर’ बना दिया है. लोग एक साथ पैसा, स्किल, फ्लेक्सिबिलिटी और अपनी पहचान तलाश रहे हैं.