NSE IPO: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आईपीओ में पैसा लगाने का आज आखिरी मौका है. 22,569 करोड़ रुपये के इस मेगा इश्यू को लेकर बाजार में अच्छी हलचल है. बिडिंग के तीसरे दिन तक निवेशकों ने इसमें ठीकठाक दिलचस्पी दिखाई है. हालांकि, रिटेल निवेशकों की तरफ से अभी भी वो रफ्तार नहीं दिखी है जिसकी उम्मीद की जा रही थी. ये आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है. इसका मतलब है कि इससे मिलने वाला सारा पैसा कंपनी के पास न जाकर उसके शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स के पास जाएगा.

सब्सक्रिप्शन का ताजा हाल
तीसरे दिन की सुबह 10:30 बजे तक इस इश्यू को कुल 1.46 गुना सब्सक्राइब किया जा चुका है. कंपनी ने कुल 8.86 करोड़ शेयर ऑफर किए हैं. रिटेल निवेशकों के लिए 4.41 करोड़ शेयर रिजर्व रखे गए हैं, लेकिन अब तक उनका कोटा सिर्फ 87 फीसदी ही भर पाया है. दूसरी तरफ, नॉनइंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने अपने हिस्से का 2.31 गुना निवेश किया है. क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स का कोटा भी 1.83 गुना भर चुका है. कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये तय किया है. एक लॉट में 8 शेयर हैं, जिसके लिए कम से कम 14,280 रुपये लगाने होंगे.
ग्रे मार्केट में कैसा है रिस्पॉन्स
शेयर बाजार में लिस्टिंग से पहले इस आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 3 फीसदी पर चल रहा है. ये अपर प्राइस बैंड 1,785 रुपये के मुकाबले 48 रुपये ऊपर ट्रेड कर रहा है. इसके हिसाब से देखें तो शेयरों की लिस्टिंग 1,833 रुपये के करीब हो सकती है. इसका सीधा मतलब है कि निवेशकों को लिस्टिंग के दिन एक सामान्य मुनाफा हो सकता है. ये शेयर 24 सितंबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे. शेयरों का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की पूरी उम्मीद है.
निवेशकों के लिए ब्रोकरेज की सलाह
ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म इस आईपीओ को लेकर काफी पॉजिटिव नजर आ रहे हैं. एंजेल वन, एलकेपी सिक्योरिटीज जैसी दिग्गज फर्मों ने इसे ‘सब्सक्राइब’ करने की सलाह दी है. जानकारों का मानना है कि वैल्यूएशन के मामले में ये अपने प्रतिद्वंद्वी BSE से काफी सस्ता मिल रहा है. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये देश के सबसे बड़े मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का एक बेहतरीन मौका है. देश के कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 93 फीसदी है. मजबूत मार्जिन के साथसाथ कंपनी पूरी तरह कर्ज मुक्त है.
कारोबार के साथ जुड़े है ये जोखिम
निवेश से पहले कंपनी के रिस्क फैक्टर को समझना भी बहुत जरूरी है. कंपनी के वित्तीय नतीजों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2026 में रेवेन्यू 3.1 फीसदी गिरकर 16,601 करोड़ रुपये रहा है. वहीं मुनाफा भी 12,188 करोड़ रुपये से घटकर 10,302 करोड़ रुपये पर आ गया है. मुनाफा कम होने के बावजूद कंपनी का मार्जिन काफी मजबूत है. कंपनी की कमाई का 78.7 फीसदी हिस्सा सिर्फ ट्रांजैक्शन चार्ज से आता है. इसमें भी सबसे बड़ा योगदान ऑप्शंस ट्रेडिंग का है. शेयर बाजार के नियमों में होने वाले किसी भी बदलाव का असर कंपनी की कमाई पर पड़ सकता है. ऑप्शंस मार्केट में भी कंपनी की हिस्सेदारी में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है.