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Parenting Tips: आपकी पेरेंटिंग भी कमजोर तो नहीं, इन संकेतों से करें पता​

मातापिता हमेशा अपने बच्चे को बेस्ट देना चाहते हैं और हर पेरेंट की कोशिश होती है कि उनका बच्चे अच्छा इंसान बने. उसका फ्यूचर ब्राइट हो. हालांकि कई बार देखने में आता है कि बच्चा बहुत ज्यादा जिद्दी हो गया है. वो अपने मातापिता या घर में किसी की बात नहीं मानता है. ऐसे में […]

मातापिता हमेशा अपने बच्चे को बेस्ट देना चाहते हैं और हर पेरेंट की कोशिश होती है कि उनका बच्चे अच्छा इंसान बने. उसका फ्यूचर ब्राइट हो. हालांकि कई बार देखने में आता है कि बच्चा बहुत ज्यादा जिद्दी हो गया है. वो अपने मातापिता या घर में किसी की बात नहीं मानता है. ऐसे में हो सकता है कि आपकी कुछ ऐसी आदतें हैं जो शायद आपने भी नोटिस नहीं की होंगी, लेकिन इससे आपके बच्चों पर गहरा असर होता है. इस आर्टिकल में जानेंगे कमजोर पेरेंटिंग के 5 संकेत क्या हैं.

बच्चे की परवरिश करना दुनिया की सबसे बड़ी खुशी होने के साथ ही बेहद जिम्मेदारी वाला काम होता है. अगर छोटीछोटी गलतियां भी हम इग्नोर कर दें तो इसका असर हमारे बड़े होते बच्चे के स्वभाव पर पड़ सकता है.

पेरेंट्स के ओपिनियन अलग रहना

अक्सर भारतीय घरों में देखा जाता है कि अगर मां ने बच्चे को डांटा तो पिता ने पक्ष ले लिया और इसी तरह से पिता ने कुछ कहा तो मां ने बीच में टोक दिया. खासकर संयुक्त परिवारों में ऐसा ज्यादा होता है, क्योंकि दादादादी, ताईताउ, सभी साथ में रहते हैं. इस वजह से बच्चा बड़ा होते होते बड़ों की बात को मानना बंद कर देता है.

बच्चों के लिए ओवर प्रोटेक्टिव होना

अपने बच्चों के लिए सभी पेरेंट्स को चिंता होती है, लेकिन ओवर प्रोटेक्टिव होना उनके विकास पर असर डाल सकता है. दरअसल कई बार पेरेंट्स बच्चे को हर चीज के लिए रोकतेटोकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कहीं उसे किसी तरह से नुकसान न पहुंच जाए या चोट न लग जाए. इस तरह से आगे चलकर बच्चा खुद कोई काम करते वक्त डरता है और उसे हमेशा सहारे की जरूरत महसूस होती है.

काम के बदले गिफ्ट का लालच देना

कई बार पेरेंट्स ये गलती करते हैं कि वो बच्चे को गिफ्ट या पैसों का लालच देते हैं, जैसे अगर तुम अच्छे से पढ़ाई करोगे तो पैसे मिलेंगे या तुम्हारी पसंद का गिफ्ट मिलेगा. ऐसे में बच्चे को आदत हो जाती है कि कोई भी काम करने के लिए उसे हमेशा रिटर्न गिफ्ट मिलना ही चाहिए.

बच्चे के साथ कम्यूनिकेशन कम होना

भारतीय घरों में देखा जाता है कि बच्चे के साथ पेरेंट्स की कम्यूनिकेशन अक्सर थोड़ी कम रहती है. खासकर आज के टाइम में भी कई घरों में पिता को एक सख्त मिजाज इंसान की तरह ही रिप्रेजेंट किया जाता है. बच्चा जब भी बात करे तो शांति के साथ उसे पूरा सुनें. इसके बाद आराम से जवाब दें. अगर आप बच्चे की बात पूरी होने से पहले ही उसे टोक देते हैं या डांट लगा देते हैं तो उसको कॉन्फिडेंस कम होता है. इसके अलावा वो बातें भी छुपाने लगता है.

डर या गिल्ट दिखाकर काम करवाना

कुछ पेरेंट्स अपने बच्चे के बिहेवियर को कंट्रोल करने के लिए या तो उसे गिल्ट महसूस कराते हैं या फिर डांट और पिटाई का डर दिखाते है. ये तरीके कुछ देर के लिए असर दिखा सकते हैं, लेकिन आपके बच्चे के मन पर लॉन्ग टर्म असर डालते हैं. गिल्ट यानी अपराधबोध और डर के माहौल में पले बच्चे में आत्मविश्वास कम होता जाता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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