राज्य कर्मचारियों के साथ लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करते हुए भगवंत मान सरकार ने करीब आठ लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत की घोषणा की और महंगाई भत्ता 8 फीसदी बढ़ा दिया. यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी एवं पेंशनभोगी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच यहां हुई बैठक के बाद लिया गया. मंत्री अमन अरोड़ा और बलजीत कौर, मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, सचिव सामान्य प्रशासन केके यादव और अन्य भी उपस्थित थे.

बैठक के बाद पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह विर्क ने कहा कि बढ़ा हुआ डीए 1 अक्टूबर से दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि कई अन्य मुद्दों के संबंध में भी सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इन पर जल्द ही चर्चा की जाएगी. गतिरोध 27 अगस्त को शुरू हुआ जब तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर राज्यव्यापी हड़ताल पर चले गए, और राज्य सरकार पर उनकी लंबित 18 फीसदी महंगाई भत्ता जारी करने सहित उनकी विभिन्न मांगों को स्वीकार करने का दबाव डाला.
सरकार ने किए बड़े ऐलान
भगवंत मान के हवाले से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कदम कर्मचारियों के कल्याण और सम्मान के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिन्हें उन्होंने राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की रीढ़ बताया. मुख्यमंत्री ने वास्तविक मुद्दों को संबोधित करने के लिए कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ अनिवार्य मासिक बैठकें करने, महिला कर्मचारियों को उनके घरों के 40 किलोमीटर के भीतर पोस्टिंग देने और इस बात पर प्रकाश डालने की भी घोषणा की कि लगभग 70,000 सरकारी नौकरियां पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रक्रिया के माध्यम से प्रदान की गई हैं. महिला कर्मचारियों को अपने करियर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच चयन नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सिस्टम उनकी वास्तविक जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहे. इसमें कहा गया है कि मान ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, उनकी चिंताओं को सुना.
अक्टूबर में फिर से होगी मीटिंग
बैठक के बाद, मान ने एक्स पर कहा कि कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों के साथ आज बहुत सकारात्मक बैठक हुई. कर्मचारी हमारे परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और उनके कल्याण को ध्यान में रखते हुए, हमने तुरंत महंगाई भत्ता 8 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है. यह वृद्धि अक्टूबर के वेतन के साथ दिखाई देनी शुरू हो जाएगी. उन्होंने कहा कि हमने पिछली सरकारों से विरासत में मिले लंबे समय से लंबित मुद्दों पर भी चर्चा की, जिसमें पुरानी पेंशन योजना , प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन और आशा और मिडडे मील कार्यकर्ताओं से संबंधित मुद्दे शामिल हैं. हम इन लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों के स्थायी समाधान की दिशा में काम करने के लिए अक्टूबर के पहले सप्ताह में फिर से मिलेंगे. हमारी सरकार और कर्मचारियों के बीच कोई दूरी नहीं है. हम हर मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझा लेंगे. हम पंजाब की प्रगति के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे.
दो किश्तों में मिलेगा पैसा
इस बात पर जोर देते हुए कि सरकारी कर्मचारियों का कल्याण, सम्मान और वैध चिंताएं उनकी सरकार के लिए प्राथमिकता बनी हुई हैं, मान ने कहा कि निर्णय के अनुसार, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 4 प्रतिशत की दो किश्तें जारी की जाएंगी, जिसका लाभ 1 अक्टूबर से उनके वेतन में दिखाई देगा. त्योहारी सीजन से पहले, यह निर्णय हजारों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करेगा. मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार अपने कर्मचारियों द्वारा निभायी जाने वाली जिम्मेदारियों और उनके व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में आने वाले दबावों को समझती है. एक खुश कर्मचारी एक उत्पादक कर्मचारी होता है और मेरा मानना है कि जब कोई कर्मचारी संतुष्टि, गरिमा और मन की शांति के साथ काम करता है, तो पूरी प्रणाली बेहतर प्रदर्शन करती है और लोगों को बेहतर सेवाएं मिलती हैं.
इन मांगों पर भी होगा विचार
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की वास्तविक मांगों के प्रति खुली सोच रखती है और इन मुद्दों की सहानुभूतिपूर्वक और लागू नियमों, वित्तीय निहितार्थ और कानूनी स्थिति के अनुसार जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न लंबे समय से लंबित मांगों की जांच करेगी, जिसमें 2.59 पेंशन फिटमेंट फैक्टर की मांग, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, विभिन्न भत्तों की बहाली, सुनिश्चित कैरियर प्रगति का कार्यान्वयन, परिवीक्षा अवधि से संबंधित 2015 और 2020 के पत्रों से संबंधित मुद्दे, अदालत के फैसलों का सामान्यीकरण और अन्य शामिल हैं.
कर्मचारियों से संबंधित किसी भी वास्तविक मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और सरकार खुले और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण के साथ प्रत्येक मामले की जांच करेगी. कर्मचारी कल्याण को एक बार की कवायद के रूप में नहीं माना जा सकता है और इसके लिए सरकार और उसके कार्यबल के बीच निरंतर बातचीत की आवश्यकता होती है.
गौरतलब है कि इससे पहले कर्मचारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशानुसार डीए बकाया के भुगतान की मांग पर अड़े हुए थे. पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को एक पखवाड़े के भीतर सभी लंबित डीए और महंगाई राहत बकाया जारी करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें तर्क दिया गया था कि इतनी कम अवधि में लगभग 14,191 करोड़ रुपए के बकाया का भुगतान करने का निर्देश असंभव था.