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हूती हमलों का बड़ा असर: सऊदी अरामको ने रोकी भारत के लिए तेल की सप्लाई, कच्चे तेल के दाम में उछाल!​

सऊदी अरब से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण सऊदी अरामको ने भारत के लिए तेल की सप्लाई बंद कर दी है। दुनिया के शीर्ष क्रूड सप्लायर्स में शुमार सऊदी अरब की अहम ईस्टवेस्ट पाइपलाइन को हाल ही […]

सऊदी अरब से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण सऊदी अरामको ने भारत के लिए तेल की सप्लाई बंद कर दी है। दुनिया के शीर्ष क्रूड सप्लायर्स में शुमार सऊदी अरब की अहम ईस्टवेस्ट पाइपलाइन को हाल ही में ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया गया था। इसके बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर के समुद्री रास्तों पर सप्लाई में गंभीर रुकावटें आई हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रिफाइनरियों के लिए तय अनुबंध के तहत तेल की आपूर्ति फिलहाल प्रभावित हुई है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सऊदी अरामको ने लाल सागर और होर्मुज दोनों ही मार्गों से होने वाली नियमित सप्लाई को रोक दिया है। हालांकि, सऊदी अरब ने कुछ ‘स्पॉट कार्गो’ उन व्यापारियों को बेचे हैं जो होर्मुज के रास्ते जोखिम उठाने को तैयार हैं। इन तेल कार्गो के भारी छूट के साथ ओमान की खाड़ी तक लाए जाने और वहां से भारतीय व अन्य ग्राहकों को डिलीवर किए जाने की उम्मीद है। आम तौर पर अरामको स्पॉट मार्केट में सीधे तौर पर तेल नहीं बेचती है, बल्कि वह आधिकारिक बिक्री कीमतों पर सालाना टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत ही आपूर्ति करती है।

इस आपूर्ति संकट के कारण भारतीय रिफाइनरियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। हालांकि रिफाइनरियों को पूरा भरोसा है कि वे अन्य विकल्पों के जरिए तेल की जरूरत पूरी कर लेंगी, लेकिन इसके लिए उन्हें अधिक कीमत चुकानी होगी। वैश्विक स्तर पर भी इसका असर दिख रहा है, जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेजी आई है और यह 108 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। साथ ही, भारत को मिलने वाले रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट भी अब खत्म हो चुकी है।

रिफाइंड इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच चल रहा यह टकराव एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। वैश्विक उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले सऊदी अरब का इस तरह प्रभावित होना और टैंकर किराए का रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंचना वैश्विक बाजार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

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संपादकीय टीम

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