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अयोध्या राम मंदिर: ट्रस्ट ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की VIP ID की बंद, आउटसोर्सिंग पर भी लगी रोक!​

Ayodhya Ram Mandir VIP ID Blocked: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इस्तीफे के साथसाथ उन दोनों से वीआईपी आईडी देने का अधिकार खत्म कर लिया गया। राम मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की वीआईपी दर्शन पास […]

अयोध्या राम मंदिर: ट्रस्ट ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की VIP ID की बंद, आउटसोर्सिंग पर भी लगी रोक!​

Ayodhya Ram Mandir VIP ID Blocked: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इस्तीफे के साथसाथ उन दोनों से वीआईपी आईडी देने का अधिकार खत्म कर लिया गया। राम मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की वीआईपी दर्शन पास बनाने वाली आईडी बंद कर दी। इसके साथ ही अब तीनों के पास आईडी से कोई वीआईपी पास जारी करने का अधिकार खत्म कर दिया गया।

अयोध्या राम मंदिर: ट्रस्ट ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की VIP ID की बंद, आउटसोर्सिंग पर भी लगी रोक!​
अयोध्या राम मंदिर: ट्रस्ट ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की VIP ID की बंद, आउटसोर्सिंग पर भी लगी रोक!​

दरअसल, पहले रिकमेंडेशन के जरिए श्रद्धालुओं को वीआईपी आईडी से सुगम दर्शन और विशिष्ट दर्शन पास जारी किए जाते थे। रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस पास के जरिए सैंकड़ों पास जारी करवाता था। चंपत राय और अनिल मिश्रा के करीबी पास के जरिए भी भक्तों को ऐंठने का गोरखधंधा चला रहे थे और लाखों की कमाई कर रहे थे। यह मामला सामने आते ही तीनों का वीआईपी आईडी बंद कर दी गई।

राम मंदिर चढ़ावा मामले के बाद कर्मचारी आउटसोर्स नहीं किए

राम मंदिर दान प्रकरण में 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के विवाद के बाद मंदिर ट्रस्ट ने कोई नया आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त नहीं किया है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सूत्रों के अनुसार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पिछले वर्ष महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बाद एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की थी।

इन कर्मचारियों को मुख्य रूप से हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में नियुक्त किया गया था। का प्राथमिक बैंक खाता एसबीआई शाखा में है, जहां जांचकर्ता मामले में बैंक अधिकारियों की संभावित भूमिका की जांच कर रहे हैं। पुलिस द्वारा शाखा प्रबंधक से पूछताछ करने और जांच के तहत उनका बयान दर्ज करने की संभावना है।

मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भर्ती के लिए किसी विशेष योग्यता वाले कर्मियों की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि आउटसोर्स कर्मचारियों को नकदी गिनने का काम नहीं सौंपा गया था। बैंक सूत्रों ने यह भी बताया कि आउटसोर्स किए गए कर्मचारी कथित तौर पर केवल मुड़े हुए नोटों को सीधा करने और उन्हें उचित बंडलों में व्यवस्थित करने के लिए ही जिम्मेदार थे।

एसबीआई बैंक के कर्मचारियों ने की गिनती

नकदी की वास्तविक गिनती के कर्मचारियों द्वारा की गई थी। उनकी भूमिका केवल दान पेटियों में डालने से पहले भक्तों द्वारा मोड़े गए नोटों को सीधा करने और व्यवस्थित करने तक सीमित थी। नकदी की गिनती एसबीआई कर्मियों द्वारा अत्याधुनिक मुद्रा गिनती मशीनों का उपयोग करके की गई थी। ये मशीनें 500 रुपए, 200 रुपए और 100 रुपए जैसे मिश्रित मूल्यवर्ग के नोटों को स्वचालित रूप से अलग कर सकती थीं, साथ ही नकली नोटों का पता भी लगा सकती थीं।

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सूत्रों ने बताया कि गिनती प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव दान पेटी गिनती प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड रखते थे और पूर्व न्यासी अनिल मिश्रा के साथ निगरानी में हुई चूक के लिए जिम्मेदार ठहराए गए थे। वे भी एसबीआई कर्मचारी नहीं थे। इसके अलावा, सूत्रों ने बताया कि एसबीआई के एक पूर्व प्रबंधक अयोध्या पुलिस की निगरानी में हैं। मंदिर के दान की गिनती में शामिल बैंक कर्मचारियों के साथ उनसे भी जल्द ही पूछताछ की जा सकती है।

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संपादकीय टीम

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