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1952 से 9 बार बदल चुकी है EPF की वेज सीलिंग लिमिट, 300 से 25,000 तक का ऐसा रहा सफर​

कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF में सरकार ने वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. यह बदलाव इसी महीने से लागू हुआ है. इसके साथ EPF की वेज सीलिंग पहली बार 25,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है. EPF की यह लिमिट आज से करीब 74 साल पहले सिर्फ […]

कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF में सरकार ने वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. यह बदलाव इसी महीने से लागू हुआ है. इसके साथ EPF की वेज सीलिंग पहली बार 25,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है. EPF की यह लिमिट आज से करीब 74 साल पहले सिर्फ 300 रुपये थी. नवंबर 1952 में जब EPF स्कीम शुरू हुई, तब 300 रुपये महीने तक की वेज पाने वाले कर्मचारियों को इसके दायरे में रखा गया था. इसके बाद अलगअलग समय पर सरकार ने इस लिमिट में बदलाव किया. 1952 से 2026 तक वेज सीलिंग में 9 बार बदलाव हो चुका है.

नवंबर 1952 में EPF स्कीम लागू हुई तो वेज सीलिंग 300 रुपये महीने थी. करीब साढ़े चार साल बाद जून 1957 में इसे बढ़ाकर 500 रुपये किया गया. इसके बाद दिसंबर 1962 में एक और बड़ा बदलाव हुआ और वेज सीलिंग 1,000 रुपये महीने कर दी गई. इसके बाद इस लिमिट में अगला बदलाव करीब 14 साल बाद हुआ.

शुरुआती दौर में EPF वेज सीलिंग

  • नवंबर 1952: 300 रुपये
  • जून 1957: 500 रुपये
  • दिसंबर 1962: 1,000 रुपये

यानी EPF लागू होने के पहले 10 साल में ही वेज सीलिंग 300 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये हो गई थी.

1976 में 1,600 रुपये हुई लिमिट

दिसंबर 1976 में सरकार ने EPF की वेज सीलिंग को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,600 रुपये कर दिया. इसके करीब 9 साल बाद सितंबर 1985 में यह लिमिट 2,500 रुपये हो गई. इसके बाद नवंबर 1990 में वेज सीलिंग बढ़ाकर 3,500 रुपये और अक्टूबर 1994 में 5,000 रुपये कर दी गई. जून 2001 में एक बार फिर बदलाव हुआ और EPF की वेज सीलिंग 6,500 रुपये पहुंच गई.

1976 से 2001 तक का सफर

  • दिसंबर 1976: 1,600 रुपये
  • सितंबर 1985: 2,500 रुपये
  • नवंबर 1990: 3,500 रुपये
  • अक्टूबर 1994: 5,000 रुपये
  • जून 2001: 6,500 रुपये

6,500 रुपये की लिमिट 13 साल से ज्यादा चली

जून 2001 में 6,500 रुपये की गई वेज सीलिंग अगस्त 2014 तक लागू रही. यानी 13 साल से ज्यादा समय तक EPF की वेज सीलिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ. सितंबर 2014 में सरकार ने इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया. यह एक बड़ा बदलाव था, क्योंकि एक झटके में वेज सीलिंग 8,500 रुपये बढ़ गई. इसके बाद 15,000 रुपये की लिमिट करीब 12 साल तक बनी रही.

2026 में 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये

अब सितंबर 2026 में सरकार ने EPF की वेज सीलिंग को फिर बढ़ाया है. 17 सितंबर 2026 से नई लिमिट 25,000 रुपये हो गई है. यानी 2014 में 15,000 रुपये हुई लिमिट अब 25,000 रुपये तक पहुंच गई है. इस बदलाव के साथ 15,000 रुपये से ज्यादा और 25,000 रुपये तक की पात्र वेज पाने वाले नए कर्मचारी भी EPF कवरेज के दायरे में आ सकते हैं.

2014 से 2026 तक

  • सितंबर 2014: 15,000 रुपये
  • 16 सितंबर 2026 तक: 15,000 रुपये
  • 17 सितंबर 2026 से: 25,000 रुपये

25,000 रुपये की लिमिट से कर्मचारी पर क्या असर होगा?

नई वेज सीलिंग का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी बेसिक वेज 15,000 रुपये से ज्यादा लेकिन 25,000 रुपये तक है और जो नए सिरे से अनिवार्य EPF कवरेज में आते हैं.

मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक वेज 25,000 रुपये है और योगदान पूरी 25,000 रुपये की सीमा पर किया जाता है. कर्मचारी का 12 फीसदी योगदान 3,000 रुपये होगा. पहले 15,000 रुपये की वेज सीलिंग पर कर्मचारी का 12 फीसदी योगदान 1,800 रुपये था.

यानी अधिकतम वेज सीलिंग पर कर्मचारी का मासिक योगदान

  • पहले: 1,800 रुपये
  • अब: 3,000 रुपये
  • अंतर: 1,200 रुपये महीने

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी के लिए योगदान अपने आप 3,000 रुपये हो जाएगा. वास्तविक योगदान कर्मचारी की पात्रता, बेसिक वेज और लागू EPF नियमों पर निर्भर करेगा.

कंपनी का योगदान भी बढ़ सकता है

EPF में कर्मचारी के साथ नियोक्ता भी योगदान करता है. 25,000 रुपये की सीमा पर 12 फीसदी योगदान 3,000 रुपये बैठता है. कंपनी के कुल योगदान में EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना का हिस्सा भी शामिल होता है. 25,000 रुपये की सीमा पर 8.33 फीसदी के हिसाब से अधिकतम EPS योगदान करीब 2,083 रुपये महीने हो सकता है.

वहीं, 15,000 रुपये की पुरानी सीमा पर EPS का अधिकतम योगदान 1,250 रुपये था. यानी वेज सीलिंग बढ़ने से पात्र कर्मचारियों के मामले में EPF और EPS से जुड़ी कुल बचत और पेंशन योगदान की रकम भी बढ़ सकती है.

ज्यादा PF कटेगा तो हाथ में सैलरी कम हो सकती है

नई सीमा का एक दूसरा असर कर्मचारी की टेकहोम सैलरी पर पड़ सकता है. अगर किसी कर्मचारी का EPF योगदान बढ़ता है तो उसकी सैलरी से कटने वाली रकम भी बढ़ सकती है. इससे महीने में हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ EPF में जमा होने वाली रकम बढ़ेगी. यानी कर्मचारी के लिए इसका असर दो तरफ होगा. अभी की टेकहोम सैलरी पर कुछ दबाव और भविष्य की रिटायरमेंट सेविंग में ज्यादा योगदान.

1952 से 2026 तक EPF वेज सीलिंग की पूरी टाइमलाइन

  • नवंबर 1952 मई 1957: 300 रुपये
  • जून 1957 दिसंबर 1962: 500 रुपये
  • दिसंबर 1962 दिसंबर 1976: 1,000 रुपये
  • दिसंबर 1976 अगस्त 1985: 1,600 रुपये
  • सितंबर 1985 अक्टूबर 1990: 2,500 रुपये
  • नवंबर 1990 सितंबर 1994: 3,500 रुपये
  • अक्टूबर 1994 मई 2001: 5,000 रुपये
  • जून 2001 अगस्त 2014: 6,500 रुपये
  • सितंबर 2014 16 सितंबर 2026: 15,000 रुपये
  • 17 सितंबर 2026 से: 25,000 रुपये

इस तरह 1952 में 300 रुपये से शुरू हुई EPF की वेज सीलिंग 2026 में 25,000 रुपये तक पहुंच गई है. यानी करीब 74 साल में यह सीमा 83 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है. सबसे लंबा समय 6,500 रुपये की वेज सीलिंग रही, जो 2001 से 2014 तक लागू रही. इसके बाद 15,000 रुपये की सीमा भी करीब 12 साल तक चली. अब 25,000 रुपये की नई लिमिट लागू होने के साथ EPF कवरेज का दायरा और बढ़ गया है.

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संपादकीय टीम

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