गायत्री देवी. जयपुर राजघराने की महारानी. शिक्षा के जरिए पर्दा प्रथा को हटाने वाली. कई बार सांसद रहीं. देश की शायद सबसे ताकतवर महिला, इंदिरा गांधी की कट्टर विरोधी. अपने उसूलों की पक्की. जयपुर, राजस्थान की खूबसूरती में चांद लगाने वाली. उनके बारे में और क्या-क्या ही लिखा जाए. जितना लिखा जाएगा, कम पड़ेगा. वे ऐसी ही थीं. जिद्दी, जुनून की पक्की. आज वे होतीं तो 107 साल की होतीं. महारानी गायत्री देवी की जन्म जयंती (23 मई) पर आइए, जानते हैं कि 12 साल की उम्र में प्यार और 21 की उम्र में पूरे सम्मान से शादी करने वाली गायत्री देवी के प्यार के किस्से.

गायत्री देवी राजस्थान के जयपुर राज परिवार की तीसरी महारानी थीं. उनकी कहानी बचपन से शुरू होती है. वे 12 साल की उम्र में एक शादीशुदा राजा से प्यार कर बैठीं. यह प्यार बहुत गहरा और लंबा चला. आखिरकार 21 साल की उम्र में वे जयपुर की महारानी बनीं. यह कहानी प्यार, हिम्मत और बदलाव की है.
लंदन में जन्मीं थी कूच बिहार की राजकुमारी
गायत्री देवी का जन्म 23 मई 1919 को लंदन में हुआ. वे कूच बिहार के राज परिवार की राजकुमारी थीं. उनके पिता महाराजा जितेंद्र नारायण थे. उनकी मां इंदिरा राजे बड़ौदा की राजकुमारी थीं. गायत्री देवी का बचपन बहुत खुशहाल था. वे लंदन, स्विट्जरलैंड और भारत में पढ़ीं. वे घुड़सवारी, शिकार और खेलों में माहिर थीं. उनकी मां ने उन्हें आधुनिक और स्वतंत्र बनाया. वे बचपन से ही बहादुर और जिद्दी थीं.
गायत्री देवी लंदन, स्विट्जरलैंड और भारत में पढ़ीं.
पहली मुलाकात में राजा मान सिंह को दे बैठीं दिल
साल 1931 या 1932 की बात है. महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय कलकत्ता पोलो खेलने आए. वे गायत्री देवी के परिवार के घर ठहरे. उस समय गायत्री देवी सिर्फ 12 साल की थीं. मान सिंह जी 21 साल के थे. वे पहले से ही दो बार शादी कर चुके थे. दोनों पत्नियां जोधपुर के राज परिवार से थीं. गायत्री देवी पहली बार उन्हें देखकर मोहित हो गईं. वे उन्हें जय कहकर पुकारती थीं. यह प्यार पहली नजर में हुआ.
राजा मान सिंह द्वितीय कौन थे?
राजा मान सिंह जी जयपुर के महाराजा थे. वे बहुत सुंदर और बहादुर थे. पोलो के मशहूर खिलाड़ी थे. वे घुड़सवारी और हवाई जहाज उड़ाने में भी कुशल थे. लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे. वे राजपूत परंपरा के अनुसार दो शादियां पहले ही कर चुके थे. फिर भी गायत्री देवी उनके दिल में बस गईं. उनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षक था.
गायत्री देवी और राजा मान सिंह. फोटो: Getty Images
कुछ यूं हुई प्यार की शुरुआत
12 साल की उम्र में गायत्री देवी ने मान सिंह जी से प्यार कर लिया. वे उन्हें अपना हीरो मानती थीं. मान सिंह भी उनकी तरफ आकर्षित हुए. उनकी उम्र में बड़ा अंतर था. फिर भी प्यार बढ़ता गया. गायत्री देवी की मां को शुरू में यह पसंद नहीं था. वे जानती थीं कि बेटी तीसरी पत्नी बनेगी. फिर भी प्यार रुक नहीं पाया.
एक समय ऐसा आ गया कि मान सिंह एवं गायत्री देवी को अपना प्यार को छुपाकर रखना पड़ा. वे टेनिस खेलने और साइकिल रेस के बहाने मिलते थे. कभी-कभी वे गुप्त रूप से घूमने जाते. यह समय बहुत रोमांचक था. वे एक-दूसरे को बेहतर समझने लगे. लगभग छह से आठ साल तक यह गुप्त प्रेम चला. दोनों ने बहुत सावधानी से मुलाकातें कीं. यह प्यार धीरे-धीरे मजबूत होता गया.
गायत्री देवी 21 साल की थीं जब वो जयपुर की तीसरी महारानी बनीं. फोटो: Getty Images
16 की उम्र में पार्क में आया शादी का प्रस्ताव
जब गायत्री देवी 16 साल की हुईं. मान सिंह ने उन्हें पार्क में घूमते हुए प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा कि वे पहले ही उनकी मां से बात कर चुके हैं. उन्होंने अपनी जिंदगी के खतरे भी बताए. फिर भी गायत्री देवी ने हां कर दी. उनकी मां खुश नहीं थीं. फिर भी दोनों ने फैसला ले लिया. यह प्रस्ताव बहुत ईमानदार था.
इतिहास की महंगी शादियों में से एक
9 मई 1940 को उनकी शादी हुई. यह शादी इतिहास की सबसे महंगी शादियों में से एक थी. गायत्री देवी 21 साल की थीं. वे जयपुर की तीसरी महारानी बनीं. शादी बहुत भव्य थी. लोगों ने इसे याद रखा. गायत्री देवी ने नई जिंदगी शुरू की.
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जयपुर पहुंचकर गायत्री देवी को कई मुश्किलें आईं. वे पर्दा प्रथा से घिरी हुई थीं. राजपूत परिवार की परंपराएं सख्त थीं. वे आधुनिक सोच वाली थीं. शुरू में उन्हें डर लगा. फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. परिवार से तालमेल बैठाकर वे धीरे-धीरे चीजों को अपने हिसाब से ढालने में कामयाब रहीं.
गायत्री देवी नेलड़कियों को पढ़ाया कि पर्दा जरूरी नहीं.
शिक्षा के अस्त्र से किया पर्दा प्रथा का अंत
गायत्री देवी ने राजा मान सिंह की मदद से लड़कियों का स्कूल खोला. महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल चल पड़ा. शिक्षा के सहारे उन्होंने 10 साल में उन्होंने पर्दा प्रथा खत्म कर दी. लड़कियों को पढ़ाया कि पर्दा जरूरी नहीं. यह उनका बड़ा योगदान था. वे राजस्थान की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं.
गायत्री देवी और मान सिंह जी का एक बेटा हुआ. उनका नाम जगत सिंह था. वे 1949 में पैदा हुए.परिवार छोटा लेकिन खुशहाल था. गायत्री देवी ने जयपुर को नया रूप दिया. वे राजनीति में रुचि रखती थीं. साल 1970 में मान सिंह जी की मौत हो गई. वे इंग्लैंड में पोलो खेलते हुए गिर पड़े. यह गायत्री देवी के लिए बड़ा सदमा था. उन्होंने अकेले जिंदगी आगे बढ़ाई. उनका प्यार हमेशा याद रहा.
राजनीति के चक्कर में तिहाड़ जेल जाना पड़ा
गायत्री देवी ने पति के रहते ही राजनीति में कदम रख दिया था. 1962 में वे लोकसभा चुनाव जीतीं. फिर 1967 एवं 1972 का चुनाव भी जीतीं. वे स्वतंत्र पार्टी से जुड़ीं. वे इंदिरा गांधी की कट्टर विरोधी थीं. 1975 में इमरजेंसी के दौरान उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ा. वे बहादुर महिला थीं. इंदिरा गांधी से सीधी टक्कर ली लेकिन समझौता नहीं किया. उन्हें लालच और धमकी, दोनों दी गई, पर वे झुकी नहीं. गायत्री देवी साल 2009 में 90 साल की उम्र में गुजर गईं. वे जयपुर में रहती थीं. उनकी यादें आज भी जिंदा हैं. वे सुंदरता, हिम्मत और आधुनिकता की मिसाल थीं.
गायत्री देवी की प्यार की कहानी अनोखी है. उन्होंने राजस्थान को बदल दिया. उनकी कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है. यह प्यार, संघर्ष और सफलता की कहानी है.





