शेयर बाजार में आज का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं रहा. सुबह बाजार खुलते ही दलाल स्ट्रीट पर जो रौनक नजर आ रही थी, वह दोपहर होते-होते काफी हद तक फीकी पड़ गई. आम निवेशक जो सुबह अपने पोर्टफोलियो को हरे निशान में देखकर राहत की सांस ले रहे थे, उन्हें कुछ ही घंटों में बाजार की इस उठापटक ने हैरान कर दिया. देखते ही देखते सेंसेक्स ने दिन के अपने उच्चतम स्तर से करीब 700 अंकों का गोता लगा दिया. आइए समझते हैं कि आखिर सुबह की शानदार तेजी दोपहर तक क्यों टिक नहीं पाई और इस अचानक आई गिरावट के पीछे की असली कहानी क्या है.

1. सुबह का जोश और फिर अचानक लगा ब्रेक
दिन की शुरुआत बेहद शानदार रही. निवेशकों का उत्साह चरम पर था और इसके दम पर सेंसेक्स एक समय 997.25 अंकों (करीब 1.3 फीसदी) की मजबूत छलांग लगाते हुए 77,910.75 के स्तर तक जा पहुंचा. निफ्टी भी पीछे नहीं था, यह 292.75 अंक (1.2 फीसदी) की शानदार बढ़त के साथ 24,300 के अहम स्तर के बेहद करीब पहुंच गया था. लेकिन बाजार का यह जोश ज्यादा देर कायम नहीं रह सका. दोपहर 1:08 बजे तक पूरी तस्वीर बदल चुकी थी. निफ्टी की बढ़त सिमटकर सिर्फ 107 अंक रह गई और यह 24,104 के स्तर पर आ गया. वहीं, सेंसेक्स भी अपनी ज्यादातर बढ़त गंवाकर महज 354 अंकों की तेजी के साथ 77,276 पर संघर्ष करता दिखा.
2. क्या बंगाल चुनाव का खुमार जल्दी उतर गया?
आज सुबह बाजार में आई अचानक तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के रुझान थे. शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सत्ताधारी टीएमसी के खिलाफ अच्छी बढ़त बना ली थी. यह बिल्कुल वैसा ही था जैसा 29 अप्रैल को आए ज्यादातर एग्जिट पोल में अनुमान जताया गया था. बाजार को राजनीतिक स्थिरता पसंद है, इसलिए उसने इस खबर का बांहें पसारकर स्वागत किया. लेकिन, यह खुशी बहुत ही अल्पकालिक साबित हुई. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, चुनावी नतीजों का असर बाजार पर जरूर दिखा, लेकिन निवेशकों ने जल्द ही यह भांप लिया कि यह उत्साह कुछ ही समय के लिए है. बाजार की नजरें अब घरेलू राजनीति से हटकर फिर से ग्लोबल चिंताओं पर टिक गई हैं.
3. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
दोपहर आते-आते बाजार के फिसलने का एक बहुत बड़ा कारण निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली रहा. सुबह जब प्रमुख सूचकांकों में एक फीसदी से ज्यादा का उछाल आया, तो निवेशकों ने इस ऊंचे भाव का फायदा उठाते हुए जमकर अपना प्रॉफिट बुक किया. इस भारी बिकवाली के दबाव में शेयर अचानक नीचे की तरफ सरकने लगे. इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं. गुरुवार के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो उन्होंने 8047 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की थी. विदेशी निवेशकों के इस रुख से बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर हुआ है, जिसका सीधा असर आज के उतार-चढ़ाव में साफ नजर आया.
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4. कमजोर रुपया और उबलता कच्चा तेल
घरेलू मोर्चे पर भले ही कुछ अच्छी खबरें हों, लेकिन हमारा बाजार ग्लोबल टेंशन से अछूता नहीं रह सकता. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी ने दुनिया भर के निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा और नकारात्मक असर भारतीय मुद्रा पर पड़ रहा है. आज डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 11 पैसे की कमजोरी दर्ज की गई और यह लुढ़ककर 94.95 के स्तर पर आ गया. कमजोर रुपया विदेशी निवेश को हतोत्साहित करता है. इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) भी 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर के आसपास बना हुआ है.





