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सीएम बनने के बाद ‘थलापति’ के सामने पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती, पीएम मोदी को लिखा पत्र; जानिए पूरा मामला

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के नए सीएम सी जोसेफ विजय के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है. माना जा रहा है कि सीएम बनने के बाद यह पहली सबसे बड़ी समस्या विजय के सामने खड़ी हुई है. दरअसल, पूरा मामला मेकेदातु बांध से जुड़ा है, जिसके कारण एक बार फिर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है. यह पूरा विवाद तब खड़ा हुआ, जब कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने दावा किया कि जल्द ही उनकी सरकार केंद्र के सामने मेकेदातु परियोजना की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.

सीएम बनने के बाद ‘थलापति’ के सामने पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती, पीएम मोदी को लिखा पत्र; जानिए पूरा मामला
सीएम बनने के बाद ‘थलापति’ के सामने पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती, पीएम मोदी को लिखा पत्र; जानिए पूरा मामला

इस बीच खबर है कि तमिलनाडु के सीएम आने वाले समय में दिल्ली के दौरे पर जाने वाले हैं, जहां पर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर इस परियोजना को रोकने और कर्नाटक सरकार के डीपीआर को रद्द करने की मांग कर सकते हैं. इससे पहले सीएम विजय ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है और कर्नाटक सरकार के मेकेदातु बांध प्रस्ताव को अस्वीकार करने की अपील की है. सबसे खास बात है कि यह पत्र कर्नाटक के बांध के लिए भूमि पूजन शुरू करने के फैसले के जवाब में लिखा गया है.

क्या है पूरा विवाद
कावेरी नदी के जल को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पिछले कई दशकों से विवाद जारी है. इस बीच कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने रामनगर जिले के कनकपुरा के पास मेकेदातु में एक बांध बनाने की योजना पर काम करने जा रही है. इसके लिए डीपीआर केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है. हालांकि, शुरू से ही तमिलनाडु के लोग इस फैसले का विरोध करते आए हैं और उनका कहना है कि यह कावेरी जल न्यायाधिकरण के उस फैसले के विपरीत होगा, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
गौरतलब है कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े अपने फैसले में कहा था कि कावेरी नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित राज्य निचले हिस्से में स्थित राज्यों की सहमति के बिना कोई भी बांध या जलाशय नहीं बना सकते. यही कारण है कि कर्नाटक को अगर कावेरी नदी पर बांध बनाना है, तो उसे तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी जैसे राज्यों की अनुमति की आवश्यकता होगी.

सीएम विजय ने जताई चिंता
सीएम विजय ने एक्स पर लिखा कि मेकेदातु बांध उन परियोजनाओं की सूची में नहीं है, जिन्हें ट्रिब्यूनल द्वारा अनुमति दी गई है, जिसकी पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने भी की है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि कावेरी बेसिन में पानी की कमी पाई गई है और 50 प्रतिशत निर्भरता के साथ उपलब्ध पानी पहले ही संबंधित राज्यों को आवंटित किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि यह कारण है कि नदी के पानी का विशाल भंडारण जलाशय बनाने की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर कर्नाटक सरकार इसे बनाती है, तो वह कोर्ट के फैसले का उल्लंघन होगा.

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