बुधवार, 26 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
UP के इस शहर में स्वाइन फ्लू का पहला केस, बुखार के बाद डॉक्टर संक्रमित, परिवार आइसोलेट​ | कोटा में फिर एक सुसाइड… NEET की तैयारी कर रही खुशबू पटेल ने लगाया फंदा, छोटी बहन ने खोला ताला तो उड़े होश​ | Sanjay Manjrekar ने ICC और BCCI को घेरा: Jaiswal और Suryavanshi के बर्ताव पर दी कड़ी चेतावनी​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

सिर्फ GIVA ही नहीं, इन विज्ञापनों ने भी मचाई थी खलबली… आखिर विवादों से कंपनियों को क्या मिलता है फायदा?​

ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने भारी विरोध के बाद एक्ट्रेस कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को वापस ले लिया है. इस विज्ञापन में कृति ब्रालेटस्टाइल ब्लाउज, केप पहने हुए एक कुत्ते को राखी बांधती नजर आ रही थीं. लोगों ने इस पहनावे से लेकर थीम तक पर कड़ी आपत्ति जताई. बवाल बढ़ता देख कंपनी ने कहा […]

ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने भारी विरोध के बाद एक्ट्रेस कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को वापस ले लिया है. इस विज्ञापन में कृति ब्रालेटस्टाइल ब्लाउज, केप पहने हुए एक कुत्ते को राखी बांधती नजर आ रही थीं. लोगों ने इस पहनावे से लेकर थीम तक पर कड़ी आपत्ति जताई. बवाल बढ़ता देख कंपनी ने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाएं आहत करना नहीं था. ये फैसला परंपराओं के सम्मान में लिया गया है. ये विज्ञापन जगत का कोई पहला विवाद नहीं है. हर कुछ महीने में कोई न कोई ऐसा कैंपेन सामने आता है, जो सोशल मीडिया पर बहस छेड़ देता है. पहले भी कई विज्ञापनों ने बाजार में भारी विवाद खड़ा किया है.

कई कैंपेन को लेकर हो चुका है विवाद

  1. फेयर एंड लवली : दशकों तक इस ब्रांड ने यह मानसिकता फैलाई कि सफलता और सुंदरता के लिए त्वचा का गोरा होना जरूरी है. समाज में जब रंगभेद के खिलाफ आवाजें उठीं, तो कंपनी को भारी दबाव में आकर 2020 में अपना नाम बदलकर ‘ग्लो एंड लवली’ करना पड़ा, हालांकि उत्पाद वही रहा.
  2. मान्यवर : अभिनेत्री आलिया भट्ट वाले इस विज्ञापन में हिंदू विवाह की ‘कन्यादान’ परंपरा को बदलकर ‘कन्यामान’ करने की बात कही गई. एक बड़े वर्ग ने इसे अपनी धार्मिक परंपराओं का अपमान माना, जिसके बाद सोशल मीडिया पर मान्यवर के पूर्ण बहिष्कार की मांग उठने लगी.
  3. केंट आरओ : कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में केंट ने आटा गूंथने वाली मशीन का विज्ञापन जारी किया. इसमें हेमा मालिनी और ईशा देओल ने घरेलू सहायिकाओं के हाथों से गूंथे आटे को अस्वच्छ बताया. जब लोग अपनी नौकरियां खो रहे थे, तब यह विज्ञापन जनता को बेहद असंवेदनशील लगा और कंपनी को इसे तुरंत हटाना पड़ा.
  4. अमूल माचो : पुरुषों के अंडरवियर के इस विज्ञापन में अभिनेत्री सना खान को नदी किनारे बेहद कामुक अंदाज में कपड़े धोते हुए दिखाया गया. इसका उद्देश्य शायद हास्य पैदा करना था, लेकिन यह भारतीय परिवारों के लिए पूरी तरह से फूहड़ और असहज करने वाला साबित हुआ.
  5. ज़ोमैटो का होर्डिंग : ज़ोमैटो ने अपने एक आउटडोर विज्ञापन में ‘मैक एन चीज’ और ‘बटर चिकन’ के लिए ‘MC’ और ‘BC’ जैसी अपशब्दों से जुड़ी संक्षिप्तियों का इस्तेमाल किया. यह मजाक लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आया और इसे बेहद घटिया माना गया.
  6. ज़ोमैटो : साल 2021 में ज़ोमैटो ने अपनी तेज डिलीवरी को बढ़ावा देने के लिए एक विज्ञापन निकाला. लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई क्योंकि इसमें डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और उनकी कड़ी मेहनत को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया था. जनता ने इसे कामगारों के प्रति अमानवीय रवैया माना.

क्यों लिया जाता है ऐसा रिस्क

जब कंपनियों को पता होता है कि इन विज्ञापनों पर बॉयकॉट ट्रेंड चलेगा, तो फिर इन्हें पास क्यों किया जाता है. मार्केटिंग की दुनिया में इसे ‘अर्न मीडिया’ कहा जाता है. विवाद होने पर विज्ञापन टीवी डिबेट्स से लेकर सोशल मीडिया ट्रेंड्स का मुख्य हिस्सा बन जाते हैं. इससे कंपनी को विज्ञापन पर भारी बजट खर्च किए बिना ही करोड़ों लोगों तक फ्री में पहुंच मिल जाती है. सामान्य विज्ञापनों को लोग आसानी से स्किप कर देते हैं. लेकिन विवादित विज्ञापनों पर लोगों का ध्यान टिक जाता है. नए जमाने के ब्रांड पारंपरिक मूल्यों में बदलाव लाकर युवाओं का ध्यान खींचना चाहते हैं. मार्केटिंग का पुराना नियम है कि चर्चा चाहे अच्छी हो या बुरी, ब्रांड का नाम लोगों को हमेशा याद रहना चाहिए.

एडवरटाइजिंग एजेंसियों की क्या है भूमिका

जानकारों का मानना है कि इन विज्ञापनों के पीछे बड़ी एजेंसियां होती हैं. एजेंसियों पर हमेशा कुछ ऐसा बनाने का दबाव होता है जो यूजर को फोन पर स्क्रॉल करने से रोक दे. कई बार ‘कान्स लॉयन्स’ जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड्स जीतने की होड़ में भी विवादित थीम चुनी जाती है. इन अवॉर्ड्स में उन विज्ञापनों को सराहा जाता है जो रूढ़ियों को तोड़ते हैं. कई बार कंपनियां खुद एजेंसियों से कहती हैं कि उन्हें कोई शांत नहीं बल्कि तहलका मचाने वाला विज्ञापन चाहिए. जब विवाद राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा हो जाता है, तो ब्रांड अपनी तय रणनीति के तहत विज्ञापन को हटा लेता है. माफी मांगकर ब्रांड खुद को संवेदनशील भी साबित कर लेता है. लेकिन तब तक वो लोगों के दिमाग में अपनी मजबूत जगह बना चुका होता है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY