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‘सासू जी तूने मेरी कदर ना जानी’ से रियल लाइफ तक: क्यों बढ़ रहे हैं बहू प्रताड़ना के मामले?

‘सासू जी तूने मेरी कदर ना जानी’, ये पंक्ति पढ़कर लोगों के दिमाग में रेखा की फिल्म ‘बिवी हो तो ऐसी’ याद आ गई होगी। उसमें एक बहू और सास के बीच तकरार के रिश्ते को दिखाया गया था। टीवी सीरियल्स, फिल्मों में अक्सर सास-बहू के बीच मतभेद को मनोरंजन के तौर पर दिखाया जाता है। मगर वास्तव में ये कोई मजाक नहीं है।

‘सासू जी तूने मेरी कदर ना जानी’ से रियल लाइफ तक: क्यों बढ़ रहे हैं बहू प्रताड़ना के मामले?
‘सासू जी तूने मेरी कदर ना जानी’ से रियल लाइफ तक: क्यों बढ़ रहे हैं बहू प्रताड़ना के मामले?

समाज में ऐसे मामले आए दिन सामने आते रहे हैं। इन दिनों त्विषा शर्मा की मौत का केस चर्चा में है। जिसमें त्विषा के परिवार ने ससुराल वालों पर बेटी की हत्या का आरोप लगाया है।

वहीं दूसरी तरफ त्विषा की सास जो रिटायर्ड जज रह चुकी हैं, उन्हें लेकर अजीबो गरीब बयान दे रही हैं। जिसके बाद लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि बहू के मर जाने के बाद भी ये सास दुख व्यक्त करने की बजाय मीडिया में उसकी शिकायत कर रही है और उसकी कमिया गिनवा रही है।

इस वक्त रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू एक्ट्रेस और मॉडल त्विषा शर्मा की मौत का हाई प्रोफाइल केस सास-बहू के रिश्ते पर सवाल खड़े कर रहा है। गिरिबाला सिंह के तमाम इंटरव्यू इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं। वो जो भी कह रही हैं उनकी हर एक बात पर सोशल मीडिया यूजर्स सवाल उठा रहे हैं।

मीडिया में उन्होंने अपनी बहू त्विषा की जो कमियां गिनवाई हैं, वो हैं- ‘त्विशा पौधों में पानी नहीं डालती थी’, ‘वो पूजा-पाठ नहीं करती थी’।वो अपने बर्तन नहीं उठा कर रखती थी’। ‘वो शादी से पहले हमारे घर आई’। ‘वो खुले विचारों की थी’। इस तरह की कई बातें हैं तो गिरिबाला सिंह अपनी बहू के बारे में बता रही हैं।

मगर बहू के जाने के गम उनके चेहरे और बातों में किसी को भी नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में सास समाज को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल ये कि जब एक जज होकर गिरिबाला सिंह अपनी दिवंगत बहू के बारे में ऐसी बातें कर रही हैं तो उन्होंने कोर्ट में बैठकर जानें कितनी निर्दोष लड़कियों की जिंदगी पर गलत फैसले सुनाए होंगे।

वहीं दूसरी तरफ त्विषा के माता-पिता को लेकर भी तमाम लोग कई तरह की बातें कर रहे हैं। त्विषा को लेकर खुलासे हुए कि वो अपने माता-पिता को ससुराल में हो रहे बर्ताव के बारे में बता चुकी थीं, बावजूद इसके क्यों त्विषा को उस नर्क में रहने दिया गया? त्विषा की अपनी करीबी के साथ चैट भी वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने लिखा था कि वो शादी कर के फंस गई हैं।

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त्विषा के अलावा इस वक्त ग्रेटर नोएडा की दीपिका नागर का मामला भी चर्चा में है। दीपिका नागर की संदिग्ध मौत का मामला भी दहेज प्रताड़ना और हत्या का बताया जा रहा है।

ये पहली बार नहीं है जब इस तरह किसी की संदिग्ध मौत हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में हर साल दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़ी घटनाओं में करीब 5,700 से 6,000 महिलाओं की जान चली जाती है। वहीं कई मामलों में लड़कियां तलाक लेकर बच निकलती हैं।

इस बारे में हमने कुछ ऐसी महिलाओं से बात की, जिन्होंने शादी के कुछ ही महीनों में ससुराल में बहुत कुछ सहन किया। कुछ ने तलाक का रास्ता चुना वहीं कुछ मामलों में समाज के डर के कारण लड़कियां प्रताड़ना सहते-सहते बूढ़ी हो गईं।

सास का दबाव झेल चुकी वंदना

वंदना, एक ऐसी लड़की जो कई महिलाओं के लिए बड़ा उदाहरण बनकर उभरीं। उन्होंने हमें अपनी उस शादी के बारे में बताया, जिसके लिए हर लड़की की तरह उन्होंने भी सपने सजाये थे। उनके पिता ने उस शादी में लाखों खर्च किए थे। वो अपने परिवार की इकलौती बेटी हैं, इसके लिए आज से करीब 10 साल पहले उसके घरवालों ने एक अच्छा लड़का (जो वो दिखा रहा था) देखकर उनके हाथ पीले किए। मगर कुछ ही दिन में उनके पति और ससुराल वालों के असली रंग सामने आने लगे।

वंदना ने अपनी शादी के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा, “मेरे मायके वालों ने मुझे पढ़ाया-लिखाया, आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन ससुराल में मुझसे उम्मीद सिर्फ इतनी थी कि मैं तीन वक्त का खाना बनाऊं और दो वक्त झाड़ू-पोछा करूं।”

वंदना नौकरी करती थीं और घर का काम आसान हो जाए इसके लिए उन्होंने मेड रखी, लेकिन ससुराल वालों को ये बात खटकती थी। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने काम आसान करने के लिए मेड रखी थी, लेकिन एक्स सास कहती थीं- ‘मेड क्यों लगाई है, खुद काम करो।” वंदना की मानें तो उनकी सास खाने में कितना तेल-मसाले डाले जाएं, इसे लेकर भी दिन रात टोकती थी।

बहू की कमाई का लालच

वंदना और उनके पति दोनों नौकरी करते थे। पति के एक-एक पैसे का हिसाब सास रखती थी और बहू से भी ये ही उम्मीद करती थी। इतना ही नहीं शादी के दो दिन बाद ही सास ने जॉइंट अकाउंट खुलवाने का दबाव भी बनाया था। वंदना का कहना है उन्हें हर चीज में कंट्रोल महसूस होता था। उन्होंने कहा, मैं सिर्फ 6 महीने ही इस शादी में रही और आज वो स्वतंत्रता के साथ अपनी जिंदगी जी रही हैं। इसका श्रेय वो अपने पिता को देती हैं, जो हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर उनके साथ खड़े रहे।

हालांकि हर किसी को ऐसे पिता नहीं मिलते। यह अनुभव वंदना का था, जो शादी के बाद भी अपनी पहचान को बरकरार रखने के लिए अड़ी रहीं। मगर हजारों लड़कियां शादी के बाद बहू बनते ही अपनी पहचान के साथ-साथ स्वतंत्रता को खो देती हैं।

समस्या की जड़ यही है कि समाज का एक हिस्सा बेटियों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है, लेकिन कई परिवार आज भी बहू को ‘घर संभालने वाली जिम्मेदारी’ से ज्यादा नहीं मानते। नौकरी करने वाली महिला से भी उम्मीद रहती है कि वह ऑफिस के साथ-साथ घर की पूरी जिम्मेदारी अकेले निभाए।

ऐसे मामलों में आर्थिक नियंत्रण भी बड़ा मुद्दा बनकर सामने आता है। शादी के तुरंत बाद जॉइंट अकाउंट, खर्चों पर निगरानी या बहू की कमाई को परिवार का अधिकार समझना रिश्तों में असंतुलन पैदा करता है। इसी वजह से कई लोग मानते हैं कि बेटियों को सिर्फ पढ़ाना ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना भी जरूरी है।

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