आज के युवा निवेशकों की सोच तेजी से बदल रही है। पहले जहां लोग सिर्फ FD, सोना या शेयर बाजार में निवेश को ही सुरक्षित मानते थे, वहीं अब नई पीढ़ी “प्री-IPO” जैसे नए निवेश विकल्पों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रही है। खासकर मिलेनियल्स और Gen Z निवेशक अब ऐसी कंपनियों में पैसा लगाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अभी शेयर बाजार में लिस्ट भी नहीं हुई हैं। उनका मानना है कि सही कंपनी में शुरुआती दौर में निवेश कर बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

क्या होता है प्री-IPO निवेश?
प्री-IPO निवेश का मतलब है किसी कंपनी के शेयर उसके स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने से पहले खरीदना। पहले यह मौका सिर्फ बड़े निवेशकों और अमीर लोगों तक सीमित था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन निवेश सुविधाओं ने आम युवाओं की पहुंच भी इस बाजार तक बना दी है।
युवाओं को क्यों पसंद आ रहा यह तरीका?
स्टॉकिफाइ के फाउंडर और सीईओ पीयूष झुनझुनवाला बताते हैं कि युवा निवेशकों को लगता है कि अगर किसी मजबूत कंपनी में शुरुआती स्टेज पर निवेश किया जाए, तो भविष्य में बड़ा रिटर्न मिल सकता है। कई स्टार्टअप कंपनियों के IPO के बाद शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है, जिससे युवाओं की दिलचस्पी और बढ़ी है। भारत में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप कल्चर ने भी इस ट्रेंड को मजबूत किया है। आज के युवा टेक्नोलॉजी, फिनटेक और नए बिजनेस मॉडल्स को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं। यही वजह है कि वे पारंपरिक निवेश से आगे बढ़कर नए विकल्प तलाश रहे हैं।
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सोशल मीडिया और फाइनेंस कंटेंट का असर
यूट्यूब, इंस्टाग्राम, पॉडकास्ट और फाइनेंस इन्फ्लुएंसर्स भी प्री-IPO निवेश को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार IPO और निवेश से जुड़ी जानकारी मिलने से युवाओं में जागरूकता बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-IPO निवेश में जोखिम भी काफी होता है। इसमें पैसा लंबे समय तक फंस सकता है और हर कंपनी सफल होगी, इसकी गारंटी नहीं होती। इसलिए किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसकी फाइनेंशियल स्थिति, बिजनेस मॉडल और भविष्य की संभावनाओं को अच्छी तरह समझना जरूरी है।
बदल रही है निवेश की दुनिया
प्री-IPO में बढ़ती दिलचस्पी यह दिखाती है कि भारत का युवा अब ज्यादा जागरूक, रिसर्च आधारित और लंबी अवधि की सोच के साथ निवेश कर रहा है। आने वाले समय में यह ट्रेंड और तेजी से बढ़ सकता है।





