Sunday, May 31, 2026
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वॉर जोन में मस्क की ‘मनमानी’? स्टारलिंक के बढ़े रेट्स को लेकर पेंटागन और स्पेसएक्स के बीच तल्खी, कॉरपोरेट जगत में हलचल

वॉर जोन में मस्क की ‘मनमानी’? स्टारलिंक के बढ़े रेट्स को लेकर पेंटागन और स्पेसएक्स के बीच तल्खी, कॉरपोरेट जगत में हलचल

जहां एक ओर अमेरिकी सरकार ईरान के साथ वॉर में उलझी हुई है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क के साथ एक दूसरे मोर्चे पर उलझ गया है. वास्तव में एनल मस्क के स्पेसएक्स ने वॉर जोन में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट के लिए कीमतों में 5 गुना तक की बढ़ोतरी कर दी है. जिसकी वजह से कंपनी और पेंटागन के बीच टेंशन काफी बढ़ गई है.

वॉर जोन में मस्क की ‘मनमानी’? स्टारलिंक के बढ़े रेट्स को लेकर पेंटागन और स्पेसएक्स के बीच तल्खी, कॉरपोरेट जगत में हलचल
वॉर जोन में मस्क की ‘मनमानी’? स्टारलिंक के बढ़े रेट्स को लेकर पेंटागन और स्पेसएक्स के बीच तल्खी, कॉरपोरेट जगत में हलचल

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार जैसे ही एलन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क से गाइड किए गए अमेरिकी कामिकाजे ड्रोन ने ईरान के खिलाफ वॉर में बढ़त बनाना शुरू किया, SpaceX के सीनियर अधिकारियों ने पेंटागन को उनके सैटेलाइट Wi-Fi नेटवर्क के इस्तेमाल के लिए ज्यादा पैसे की डिमांड कर दी.

अमेरिका द्वारा अपना बॉम्बिंग कैंपेन शुरू करने के कुछ ही हफ्तों के भीतर, SpaceX के अधिकारियों ने पेंटागन के अधिकारियों से मुलाक़ात की और यह तर्क दिया कि सेना हर टर्मिनल के कनेक्शन के लिए लगभग 5,000 डॉलर का भुगतान कर रही थी, जबकि असल में वे 25,000 डॉलर के बराबर की सर्विस का इस्तेमाल कर रहे थे.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार LUCAS सुसाइड ड्रोन पर स्टारलिंक के इस्तेमाल को लेकर चल रहा यह विवाद हाल के महीनों में SpaceX और पेंटागन के बीच स्टारलिंक की कीमतों को लेकर बढ़ रहे तनाव का ही एक हिस्सा है. पेंटागन, ईरानी नागरिकों को उनके मोबाइल पर नेटवर्क प्रोवाइड कराना चाहता है. जिसमें स्पेसएक्स मदद कर रहा है. ये सर्विस 5जी की तरह होगी, जो ईरानी लोगों के मोबाइल को नेटवर्क से कनेक्ट करेगी. इसी योजना को लागू करने के लिए स्पेसएक्स और पेंटागन के बीच कीमतों को लेकर विवाद चल रहा है.

क्या है स्पेसएक्स का मिलिट्री वर्जन?

वॉलमार्ट जैसी दुकानों पर आम लोगों के लिए उपलब्ध स्टारलिंक टर्मिनल्स के विपरीत, SpaceX पेंटागन को ‘Starshield’ नाम का एक खास मिलिट्री वर्जन बेचता है. इसकी डील 2023 में हुई थी. Starshield टर्मिनल आम स्टारलिंक सैटेलाइट और एक अलग – दोनों से जुड़ सकते हैं. SpaceX ने यह तर्क दिया कि LUCAS ड्रोन ऐसी परिस्थितियों में काम कर रहे थे जो उनकी ‘एविएशन टियर’ (हवाई सेवा) वाली मेंबरशिप से ज्यादा मेल खाती थीं, न कि कम कीमत वाली जमीनी या मोबाइल सर्विस से. सूत्रों में से एक के अनुसार, पेंटागन के अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि 25,000 डॉलर की कीमत – जो कि एक मासिक शुल्क है – हवाई जहाजों के लिए तय की गई थी, न कि उन कामिकाजे ड्रोनों के लिए जो स्टारलिंक कनेक्शन का इस्तेमाल सिर्फ कुछ मिनटों या घंटों के लिए ही करते हैं. पेंटागन, जो ईरान पर हमले बढ़ा रहा था, आखिरकार SpaceX द्वारा बढ़ाई गई कीमत देने पर सहमत हो गया. इससे हर LUCAS ड्रोन की कीमत लगभग दोगुनी हो गई. पेंटागन पहले हर यूनिट के लिए लगभग 30,000 डॉलर दे रहा था.

दूसरी कंपनी तलाश रहा पेंटागन

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार SpaceX ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की. पेंटागन ने Reuters की उस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि SpaceX ने अपनी कीमतें बढ़ा दी हैं, या पेंटागन ने बढ़ी हुई कीमत देने का फैसला किया है, या फिर ईरानी नागरिकों को Starlink सेल सर्विस देने की कोई योजना है. एक बयान में, पेंटागन के एक अधिकारी ने कहा कि टर्मिनल्स को खरीदने वाला विभाग, यानी कमर्शियल सैटेलाइट कम्युनिकेशंस ऑफिस, दूसरी कंपनियों की तलाश कर रहा है. लेकिन कोई भी दूसरी कंपनी Starlink जैसा कोई विकल्प नहीं देती है.

Starlink 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद से आधुनिक वॉर में एक बहुत ही जरूरी हथियार बन गया है. यह सैटेलाइट नेटवर्क पूरी दुनिया में कवरेज देता है, जिससे वॉर के मैदान में कंयूनिकेशन और दूरदराज के इलाकों में भी सटीक निशाना लगाना मुमकिन हो जाता है. SpaceX के लगभग 10,000 सैटेलाइट आकाश में है. जिनकी कुल हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा है. जबकि OneWeb और Amazon Leo जैसी दूसरी कंपनियों की सैटेलाइट काफी कम है.

Starlink पर निर्भरता के जोखिम सबसे पहले यूक्रेन वॉर के दौरान सामने आए, जब 2022 में मस्क ने देश के कुछ हिस्सों में Starlink सेवा बंद करने का आदेश दे दिया था. उस समय यूक्रेनी सेना रूसी ठिकानों की ओर बढ़ रही थी, और इस वजह से उनका एक अहम जवाबी हमला बाधित हो गया था. पिछली गर्मियों में अमेरिकी नौसेना के परीक्षणों में भी रुकावट आई थी, जब Starlink में आई एक वैश्विक खराबी के कारण बिना चालक वाली सैन्य नावों का संपर्क टूट गया था, और वे समुद्र में ही फंसी रह गई थीं.

SpaceX के प्रेशर में आई अमेरिकी सरकार

नेशनल सिक्योरिटी पर फोकस्ड थिंक टैंक, ‘सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ के सीनियर फेलो क्लेटन स्वोप ने रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा कि SpaceX का पेंटागन पर ज्यादा दबदबा है, क्योंकि रॉकेट लॉन्च और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारोबार के साथ-साथ, Starlink के लिए उसका एक बड़ा कमर्शियल बाजार भी है. SEC में जमा की गई जानकारी के अनुसार, SpaceX अपनी कुल कमाई का लगभग 20 फीसदी हिस्सा अमेरिकी सरकार से कमाता है.

ईरान वॉर की शुरुआत में ही, Starlink अमेरिकी सेना के ऑपरेशन्स का एक अहम हिस्सा बन चुका था. टेस्टिंग और शुरुआती तैनाती के दौरान, इसने कई तरह के सिस्टम्स को सपोर्ट किया-जैसे LUCAS जैसे ड्रोन्स से लेकर समुद्री निगरानी और हमले के मिशन के लिए इस्तेमाल होने वाले बिना पायलट वाले समुद्री जहाज. इस मामले से परिचित एक सूत्र के अनुसार, जब अमेरिका ने अपनी बमबारी शुरू की, तब एक दर्जन से ज्यादा ड्रोन सिस्टम्स में Starshield टर्मिनल्स का इस्तेमाल किया जा रहा था.

लेकिन, 28 फरवरी को अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला शुरू करने के तुरंत बाद ही, पेंटागन और SpaceX के बीच तनाव पैदा हो गया. 1 मार्च को, SpaceX के प्रमुख एलन मस्क ने ‘X’ (पहले Twitter) पर एक यूजर की पोस्ट का जवाब दिया. इस पोस्ट में LUCAS ड्रोन की एक तस्वीर थी, जिसके बारे में कहा गया था कि “ऐसा लगता है कि इसमें Starlink का टर्मिनल लगा हुआ है.

मस्क ने पोस्ट किया, कि हथियारों के सिस्टम में इस टर्मिनल का इस्तेमाल करना Starlink की कमर्शियल ‘सेवा की शर्तों’ (Terms of Service) का उल्लंघन है. यह नियम सभी यूजर्स पर लागू होता है, और जब भी इसका पता चलता है, तो इसे बंद कर दिया जाता है. एक अलग नेटवर्क है, जिसका नाम Starshield है, और उसे अमेरिकी सरकार ऑपरेट करती है.

पेंटागन के एक अधिकारी ने Reuters को दिए गए बयान में, SpaceX के साथ हुए समझौते के किसी भी उल्लंघन से इनकार किया. इस मामले से परिचित दो सूत्रों ने रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा कि इसके बाद के दिनों में, SpaceX के अधिकारियों ने पेंटागन के अधिकारियों से मुलाकात की और यह तर्क दिया कि सेना इस सेवा के लिए उन्हें तय रकम से कम भुगतान कर रही है.

स्पेसएक्स से नई डील पर विचार

सूत्रों में से एक ने बताया कि, हालांकि पेंटागन ने शुरुआत में हमलावर ड्रोन्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सैटेलाइट Wi-Fi कनेक्शन्स के लिए ज्यादा फीस देने पर सहमति जता दी थी, फिर भी रक्षा उप-सचिव स्टीव फेनबर्ग सहित कई सीनियर अधिकारी इस व्यवस्था को लेकर असहज थे. पेंटागन के अधिकारियों ने अप्रैल में सीजफायर के दौरान, टेरेंस ओ’शॉघनेसी से मुलाक़ात की. टेरेंस ओ’शॉघनेसी एयर फोर्स के रिटायर्ड चार-सितारा जनरल हैं और अब SpaceX के डिफेंस बिजनेस को लीड करते हैं. इस मुलाकात का मकसद कीमतों पर फिर से विचार करना था.

फिर भी, रॉयटर्स द्वारा देखे गए पेंटागन के दस्तावेजों के अनुसार, पेंटागन अभी 3,500 से ज्यादा Starshield टर्मिनल सब्सक्रिप्शन की अतिरिक्त खरीद पर विचार कर रहा है. इनमें 100 सब्सक्रिप्शन ज्यादा कीमत वाले एविएशन टियर के भी शामिल हैं. इस डील से SpaceX को सालाना करोड़ों डॉलर का रेवेन्यू मिल सकता है, हालांकि रॉयटर्स यह पता नहीं लगा पाया कि क्या कोई समझौता पक्का हो गया है, या किस कीमत पर बातचीत चल रही है.

SpaceX की कीमतों से पेंटागन परेशान

Starlink दूसरे ऑपरेशन्स के लिए भी बहुत अहम साबित हुआ है. जनवरी में जब ईरान ने विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती बरती और हजारों लोगों को मार डाला, तो ट्रंप प्रशासन ने नागरिकों को इंटरनेट एक्सेस देने के लिए 6,000 से ज्यादा Starlink टर्मिनल गुपचुप तरीके से ईरान में पहुंचाए थे. यह बात पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट की थी.

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हालांकि, जैसे-जैसे युद्ध तेज हुआ, ईरानी अधिकारियों ने उन टर्मिनलों को जब्त कर लिया और बड़े शहरों में कनेक्शन बाधित करने के लिए जैमिंग डिवाइस लगा दिए. इस मामले से परिचित दो लोगों ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के एक हफ्ते के भीतर ही, पेंटागन के अधिकारियों ने SpaceX के साथ ‘डायरेक्ट-टू-सेल’ सेवा शुरू करने पर बातचीत शुरू कर दी थी. इस सेवा से उन बाधाओं को दरकिनार किया जा सकता था. यह क्षमता 5G कनेक्शन जैसी ही है, जिससे यूजर्स जमीन पर मौजूद टर्मिनलों के बिना भी कनेक्ट हो सकेंगे.

SpaceX ने 2025 में Starlink से 11.4 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाया था. इस मामले से परिचित एक व्यक्ति और पेंटागन के दस्तावेजों के अनुसार, SpaceX ने इस क्षमता को शुरू करने के लिए 50 करोड़ डॉलर तक और इसे चलाने के लिए हर महीने 10 करोड़ डॉलर की फीस लेने का प्रस्ताव रखा था. इस कीमत को देखकर डिफेंस अधिकारियों में चिंता पैदा हो गई.

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