आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा अब सीधे तौर पर हेल्थकेयर, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और साइबर सिक्योरिटी जैसे अहम सेक्टर्स की तस्वीर बदल रही है. भारत में भी एआई से जुड़ी सेवाओं की मांग में जबरदस्त तेजी आई है. इस बदलते दौर में देश की दिग्गज आईटी कंपनियों ने खुद को क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई के सांचे में ढालना शुरू कर दिया है. मार्च 2026 की तिमाही के ताजा आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों ने एआई सेक्टर में मजबूत पकड़ रखने वाली तीन प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है.

LTM पर बढ़ा विदेशियों का भरोसा
बाजार के जानकारों की नजर इन दिनों एलटीएम (LTM) पर खास तौर पर टिकी है. आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2025 में इस कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 6.40 फीसदी थी. मार्च 2026 आते-आते यह आंकड़ा बढ़कर 6.63 फीसदी हो गया. एलटीएम इन दिनों एआई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर बेहद आक्रामकता से काम कर रही है. ग्राहकों को सटीक एआई समाधान देने के लिए कंपनी ने हाल ही में ‘ब्लूवर्स’ (BlueVerse) नाम से अपना एक खास एआई प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है. इसका सीधा असर कंपनी की ऑर्डर बुक पर दिख रहा है. मार्च तिमाही में ही कंपनी ने 1.7 अरब डॉलर के नए ऑर्डर हासिल किए हैं. यह लगातार छठी तिमाही है जब कंपनी का नया ऑर्डर इनफ्लो 1.5 अरब डॉलर के पार रहा है.
टेक महिंद्रा में फिर लौटी खरीदारी
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टेक महिंद्रा में भी विदेशी निवेशकों की वापसी साफ देखी जा सकती है. पिछले साल सितंबर 2025 में यहां एफआईआई (FII) की हिस्सेदारी 20.60 प्रतिशत थी, जो दिसंबर 2025 की तिमाही में गिरकर 17.94 प्रतिशत पर आ गई थी. हालांकि, मार्च 2026 की तिमाही में विदेशी निवेशकों ने फिर से अपना रुख बदला और कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 18.59 प्रतिशत कर दी. कंपनी के प्रबंधन का भी मानना है कि बड़े क्लाइंट्स अब डेटा और एआई आधारित प्रोजेक्ट्स की भारी मांग कर रहे हैं. टेक महिंद्रा लगातार क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसी डिजिटल सेवाओं में अपना निवेश बढ़ा रही है. वित्त वर्ष 2026 के शानदार नतीजे बताते हैं कि 50 मिलियन डॉलर से अधिक का कारोबार देने वाले ग्राहकों की संख्या अब बढ़कर 29 हो गई है. इसके साथ ही पूरे साल के दौरान कंपनी का मुनाफा भी 31.4 फीसदी की दर से उछला है, जिससे कमाई के अनुपात में काफी सुधार हुआ है.
टाटा ग्रुप के इस शेयर ने मारी बाजी
विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी पसंद टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एलेक्सी (Tata Elxsi) बनकर उभरी है. इस शेयर में महज एक तिमाही के भीतर विदेशी हिस्सेदारी में 2.51 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई. दिसंबर 2025 में जहां विदेशी निवेशकों की होल्डिंग घटकर 8.57 फीसदी रह गई थी, वहीं मार्च 2026 में यह तेजी से बढ़कर 11.08 फीसदी हो गई. यह कंपनी मुख्य रूप से मीडिया, ऑटोमोबाइल, कम्युनिकेशन और हेल्थकेयर सेक्टर को अपनी बेहतरीन तकनीकी सेवाएं प्रदान करती है. वित्त वर्ष 2026 में टाटा एलेक्सी ने जेनेरेटिव एआई (GenAI) पर अपना पूरा फोकस शिफ्ट कर दिया है. ‘DevStudio.ai’ जैसे प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग, कई बड़ी एआई कंपनियों के साथ साझेदारी और अपने कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर दी जा रही एआई ट्रेनिंग इसी रणनीति का अहम हिस्सा है. कंपनी का स्पष्ट लक्ष्य खुद को एक एआई आधारित इंजीनियरिंग फर्म के रूप में स्थापित करना है.
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क्या आम निवेशक को लगाना चाहिए पैसा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या एक आम निवेशक को सिर्फ विदेशी निवेशकों की चाल या ‘एआई थीम’ देखकर इन शेयरों में अपना पैसा लगा देना चाहिए? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ट्रेंड के आधार पर निवेश का फैसला लेना सही नहीं है. किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसके शेयरों का मौजूदा वैल्यूएशन, मुनाफे की ग्रोथ, ऑर्डर बुक, ग्राहकों का आधार और ग्लोबल आईटी खर्च जैसे अहम पैमानों को बारीकी से परखना बहुत जरूरी है.
अगर आप शेयर बाजार में लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं और आपको एआई के भविष्य पर पूरा भरोसा है, तो इन कंपनियों को अपनी निगरानी सूची (वॉचलिस्ट) में जरूर रखा जा सकता है. लेकिन यह ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है कि एआई से जुड़ी भविष्य की कई उम्मीदें पहले से ही इन शेयरों की मौजूदा कीमतों में शामिल हो चुकी हैं. इसलिए, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लें और जोखिमों का सही आकलन जरूर करें.
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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.





