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वर्दी का रौब, 4 करोड़ की जबरन वसूली, लॉरेंस-जग्गू गैंग से तार… FBI के जाल में ऐसे फंसा इंस्पेक्टर नागरा, काले कारनामों की Inside स्टोरी​

Punjab Crime News: कहानी है अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के वांटेड पूर्व एसएचओ इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा की. नागरा को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया है. नागरा पर पद का दुरुपयोग कर, लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गैंग के साथ मिलकर अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहने वाले एक एनआरआई परिवार से 4 लाख डॉलर […]

Punjab Crime News: कहानी है अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के वांटेड पूर्व एसएचओ इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा की. नागरा को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया है. नागरा पर पद का दुरुपयोग कर, लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गैंग के साथ मिलकर अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहने वाले एक एनआरआई परिवार से 4 लाख डॉलर की जबरन वसूली करने का संगीन आरोप है. अमेरिकी धरती से सक्रिय और भारत में अपराध की स्क्रिप्ट लिख रहे संगठित आपराधिक समूहों पर नकेल कसने के लिए FBI ने कैलिफोर्निया, कनाडा और यूरोप की पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाया, जिसे ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ कोडनेम दिया गया.

तकनीकी निगरानी, कॉल इंटरसेप्ट्स और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से एफबीआई अमेरिका में बैठे अपराधियों और भारत की जेलों में बंद गैंगस्टरों के बीच के संपर्क को खंगाल रही थी. इसी दौरान कैलिफोर्निया में रह रहे एक भारतीय मूल के पीड़ित ने स्थानीय पुलिस और FBI से रंगदारी की शिकायत की.

जब FBI ने इस इंटरनेशनल रंगदारी कॉल को ट्रैक किया, तो इसके तार किसी अपराधी से नहीं, बल्कि सीधे पंजाब के होशियारपुर जिले में तैनात एक सरकारी अफसर यानी टांडा थाने के तत्कालीन SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा से जुड़े मिले.

सिलचर जेल से अमेरिका और पंजाब का त्रिकोण

FBI की चार्जशीट ने इस सिंडिकेट के काम करने के बेहद शातिर तरीके का भंडाफोड़ किया है. असम की सिलचर जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया जेल के अंदर से ही अपना अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चला रहा था. इंस्पेक्टर नागरा का सीधा संबंध कैलिफोर्निया के स्टॉकटन में रहने वाले 22 वर्षीय गुरलाल सिंह से था, जो भगवानपुरिया सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य और एक अवैध अप्रवासी है. गुरलाल अमेरिका में संपन्न पंजाबी मूल के पीड़ितों को चिन्हित करता था और उनके भारत में रहने वाले रिश्तेदारों की पूरी जानकारी इंस्पेक्टर नागरा को WhatsApp और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भेजता था.

मंगेतर और रिश्तेदारों को फंसाने की धमकी

जनवरी 2026 में पंजाब में हुए एक बड़े व्यापारी बलविंदर सिंह की हत्या की तफ्तीश को इंस्पेक्टर नागरा ने अपनी अवैध उगाही का जरिया बना लिया. अप्रैल 2026 में जब गुरलाल सिंह ने अमेरिका में पीड़ित परिवार को धमकी दी, तो ठीक उसके बाद पंजाब में बैठे SHO नागरा ने बलविंदर मर्डर केस में उस NRI, उसके पिता और उसकी बहन को झूठा आरोपी और संदिग्ध बना दिया. नागरा की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उसने बकायदा 24 मई 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उसने सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने बयान दिया कि बलविंदर मर्डर केस में तीन नए नाम सामने आए हैं और उन्हें जल्द ही नामजद कर गिरफ्तार किया जाएगा.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के ठीक अगले ही दिन नागरा ने अमेरिका में पीड़ित परिवार को फोन खड़काया. उसने कहा कि तुमने 4 लाख डॉलर नहीं दिए, इसलिए मैंने तुम्हारा नाम मीडिया में उछाला है. उसने सौदा तय करते हुए कहा कि अगर पूरी रकम मिल जाती है, तो वह केस डायरी से दो नाम तुरंत गायब कर देगा.

पुलिस महकमे में छिपे अन्य लोगों पर भी शक

शुरुआती जांच के अनुसार, FIR में फिलहाल नागरा को ही मुख्य आरोपी बनाया गया है, लेकिन पंजाब पुलिस के उच्च अधिकारियों का मानना है कि इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय खेल एक अकेला इंस्पेक्टर नहीं खेल सकता. मर्डर केस की फाइलों में हेरफेर करने, झूठी गवाहियां तैयार करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने में नागरा को लोकल इनवेस्टिगेशन यूनिट या कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों का सहयोग मिलने का पूरा संदेह है. पंजाब पुलिस की विशेष विंग अब उन सभी पुलिस कर्मचारियों और नागरा के करीबी सहयोगियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है, जो बलविंदर मर्डर केस की तफ्तीश में उसके साथ शामिल थे.

देर से क्यों हुई कार्रवाई? किरकिरी के बाद जागा प्रशासन

7 जुलाई 2026 को जब अमेरिकी न्याय विभाग और FBI ने कैलिफोर्निया की अदालत में नागरा के खिलाफ चार्जशीट सार्वजनिक की, तो वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया. हालांकि, पंजाब पुलिस ने उसे तुरंत सस्पेंड नहीं किया था, बल्कि केवल पुलिस लाइन भेज दिया था, जिसे लेकर राज्य सरकार की काफी किरकिरी हुई. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें अमेरिकी दूतावास या गृह मंत्रालय के जरिए एफबीआई से आधिकारिक न्यायिक दस्तावेज मिलने का इंतजार था. चूंकि आरोप विदेशी धरती से जुड़े थे, इसलिए पंजाब पुलिस को नागरा के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त भारतीय तकनीकी साक्ष्य जुटाने पड़े, ताकि कोर्ट में केस टिक सके.

फैक्टफाइंडिंग टीम की रिपोर्ट

जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला के निर्देश पर एसपी विनीत अहलावत की फैक्टफाइंडिंग टीम ने तकनीकी सबूतों, फोन रिकॉर्ड्स और पीड़ित परिवारों के बयानों की जांच की. इस विभागीय जांच में पुख्ता सबूत मिलने के बाद शुक्रवार 17 जुलाई 2026 देर रात नागरा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और जबरन वसूली की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे दबोच लिया गया.

करोड़ों की बेनामी संपत्तियां और बर्खास्तगी की तैयारी

सबइंस्पेक्टर से प्रमोट होकर इंस्पेक्टर बने नागरा ने पंजाब के मांझा और दोआबा क्षेत्र के कई थानों में अपनी तैनाती का जमकर फायदा उठाया. खुफिया इनपुट के अनुसार, नागरा ने गैंगस्टर नेटवर्क से मिले इनपुट के आधार पर दोआबा क्षेत्र के अमीर परिवारों को डराकर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियां और आलीशान जमीनें खरीदी हैं. विजिलेंस ब्यूरो अब उसकी चलअचल संपत्तियों की अलग से वित्तीय जांच कर रहा है. गिरफ्तारी के तुरंत बाद नागरा को सस्पेंड कर दिया गया है. पंजाब पुलिस रूल्स के तहत देश और विभाग की छवि खराब करने के इस बेहद गंभीर मामले में विभागीय जांच पूरी होते ही उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा.

अमेरिका प्रत्यर्पण की तैयारी: कितनी होगी सजा?

अमेरिकी फर्स्ट असिस्टेंट यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी बिल एस्सेली ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी सरकार इस मामले में इंस्पेक्टर नागरा के प्रत्यर्पण की मांग भारत सरकार से करेगी ताकि उस पर कैलिफोर्निया की कोर्ट में मुकदमा चलाया जा सके. चूंकि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि लागू है, इसलिए भारत का विदेश मंत्रालय इस कानूनी अनुरोध पर विचार करेगा. हालांकि, नागरा को भारत में भी गिरफ्तार किया गया है, इसलिए पहले यहां की विधिक प्रक्रिया और ट्रायल पूरा होगा.

भारतीय कानून के तहत उसे 7 से 10 साल तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है. वहीं, अमेरिकी संघीय कानून के तहत जबरन वसूली के लिए रैकेटियरिंग और विदेशी जबरन वसूली के तहत दोषी पाए जाने पर 20 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.

NRI विंग हुई एक्टिव: ‘डंकी रूट’ वाले परिवारों को बनाया शिकार

दोआबा क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों के सदस्य विदेशों में रहते हैं. गैंगस्टर्स और इस भ्रष्ट पुलिसिया सिंडिकेट ने अक्सर ऐसे परिवारों को निशाना बनाया जिनके बच्चे विदेशों में अवैध तरीके से गए हैं. बदनामी और भारत में रह रहे अपने बूढ़े मातापिता की सुरक्षा के डर से कई NRI परिवारों ने चुपचाप लाखों रुपये की रंगदारी दे दी और कभी शिकायत दर्ज नहीं कराई. पंजाब पुलिस ने अब अपनी NRI विंग को एक्टिव किया है और गुप्त रूप से ऐसे अन्य पीड़ित परिवारों से जानकारियां जुटाना शुरू कर दिया है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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