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वजन घटाने का सबसे सही तरीका कौन सा, फैट बर्नर, सप्लीमेंट या खाली पेट एक्सरसाइज? एक्सपर्ट से जानें

आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वजन घटाने के लिए तरह-तरह के ट्रेंड चल रहे हैं। कोई फैट बर्नर को जादुई उपाय बता रहा है, तो कोई कीटो या लो-कार्ब डाइट को सबसे असरदार तरीका बता रहा है। ऐसे में लोगों के लिए ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस पर भरोसा किया जाए। इसी बीच डॉ. स्पेंसर नाडोल्स्की ने अलग-अलग वजन घटाने के तरीकों को रैंक करके उनकी सच्चाई सामने रख दी है।

वजन घटाने का सबसे सही तरीका कौन सा, फैट बर्नर, सप्लीमेंट या खाली पेट एक्सरसाइज? एक्सपर्ट से जानें
वजन घटाने का सबसे सही तरीका कौन सा, फैट बर्नर, सप्लीमेंट या खाली पेट एक्सरसाइज? एक्सपर्ट से जानें

डॉ. नाडोल्स्की का कहना है कि फैट बर्नर का वजन घटाने में कोई ठोस रोल नहीं होता, इसलिए उन्होंने इसे सीधे जीरो रेटिंग दी। इसके बाद जब लो-कार्ब और कीटो डाइट की बात आई तो उन्होंने दोनों को सिर्फ 2 में से 10 नंबर दिए। इसका मतलब यह है कि ये डाइट कुछ लोगों को थोड़े समय के लिए फायदा दे सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक इन्हें अपनाना आसान नहीं होता। अक्सर लोग कुछ समय बाद थक जाते हैं और फिर से पुराने खाने के पैटर्न पर लौट आते हैं।

सप्लीमेंट और फास्टेड कार्डियो कितना कारगर?

डॉ. नाडोल्स्की के अनुसार, वजन घटाने में सप्लीमेंट्स की भूमिका सीमित होती है। उन्होंने प्रोटीन पाउडर को 10 में से 4 नंबर दिए, यानी यह पूरी तरह बेकार नहीं है, लेकिन कोई चमत्कार भी नहीं करता। वहीं फास्टेड कार्डियो यानी खाली पेट एक्सरसाइज को उन्होंने सिर्फ 2 नंबर दिए। इसका मतलब है कि खाली पेट वर्कआउट करना जरूरी नहीं कि ज्यादा फायदा दे, बल्कि सही तरीके से नियमित एक्सरसाइज ज्यादा असरदार होती है।

चलना और वेट ट्रेनिंग क्यों हैं बेहतर विकल्प?

डॉ. नाडोल्स्की ने रोज चलने को 10 में से 7 और वेट ट्रेनिंग को भी 10 में से 7 नंबर दिए। उनका मानना है कि ये दोनों आदतें लगभग हर कोई अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकता है। चलना न सिर्फ कैलोरी बर्न करता है बल्कि दिल की सेहत के लिए भी अच्छा होता है, जबकि वेट ट्रेनिंग मांसपेशियों को मजबूत बनाकर मेटाबॉलिज्म को बेहतर करती है।

मेडिकल वेट लॉस ट्रीटमेंट पर सबसे ज्यादा भरोसा

डॉ. नाडोल्स्की ने इसे पूरे 10 में से 10 नंबर दिए। इससे साफ होता है कि मेडिकल सुपरविजन में ली जाने वाली नई दवाएं वजन घटाने में काफी असरदार हो सकती हैं। हालांकि, यह हर किसी के लिए नहीं होती और इसे डॉक्टर की सलाह के बिना लेना जोखिम भरा हो सकता है।

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इस पर पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. जगदीश हिरेमठ का कहना है कि वजन घटाने में सबसे अहम चीज है लंबे समय तक किसी आदत को निभा पाना। उनके मुताबिक, चलना और वेट ट्रेनिंग जैसी आदतें आसान होती हैं और उम्र या फिटनेस लेवल की परवाह किए बिना ज्यादातर लोग इन्हें अपना सकते हैं। ये आदतें मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती हैं, मांसपेशियों को सुरक्षित रखती हैं और दिनभर शरीर की ऊर्जा खपत को बढ़ाती हैं।

सख्त डाइट क्यों नहीं टिक पाती?

डॉ. हिरेमठ बताते हैं कि लो-कार्ब और कीटो जैसी डाइट्स शुरुआत में तेजी से वजन कम कर सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक इन्हें फॉलो करना मुश्किल होता है। ऐसी डाइट्स से मानसिक थकान बढ़ती है, शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और कई बार लोग ज्यादा खाने लगते हैं। नतीजा यह होता है कि वजन दोबारा बढ़ने लगता है।

वजन घटाने में सप्लीमेंट की भूमिका

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सप्लीमेंट्स को वजन घटाने का मुख्य हथियार नहीं बनाना चाहिए। ज्यादातर फैट बर्नर में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होते। हालांकि, प्रोटीन पाउडर उन लोगों के लिए मददगार हो सकता है, जिन्हें खाने से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल पाता। इसके अलावा, विटामिन D, आयरन या B12 जैसी कमी हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना फायदेमंद हो सकता है। डॉ. हिरेमठ के अनुसार, मेडिकल वेट लॉस ट्रीटमेंट अपनाने से पहले व्यक्ति की पूरी जांच जरूरी है। BMI, मेटाबॉलिक हेल्थ और डायबिटीज या बीपी जैसी बीमारियों को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए। ये इलाज तभी बेहतर काम करते हैं, जब साथ में सही खानपान, नियमित एक्सरसाइज और जीवनशैली में बदलाव भी किया जाए।

निष्कर्ष

आखिरकार वजन घटाने का सबसे भरोसेमंद रास्ता कोई शॉर्टकट नहीं, बल्कि रोजमर्रा की अच्छी आदतें हैं। चलना, वेट ट्रेनिंग, संतुलित आहार और धैर्य, यही वे चीजें हैं जो वजन को कुछ हफ्तों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक कंट्रोल में रखती हैं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्यएक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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