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लोन चाहिए… बैंक से कर्ज लें या NBFC से, कहां मिलता है सबसे सस्ता और जल्दी पैसा?

Bank Loan vs NBFC Loan: जिंदगी में कब अचानक पैसों की दरकार हो जाए, कोई नहीं जानता. ऐसे में सबसे पहला खयाल बैंक से कर्ज लेने का आता है. लेकिन आजकल वित्तीय बाजार का मिजाज बदला हुआ है. अब सिर्फ पारंपरिक बैंक ही नहीं, बल्कि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFC) भी तेजी से कर्ज बांट रही हैं. पर्सनल लोन से लेकर कारोबार बढ़ाने तक के लिए ये कंपनियां तुरंत पैसा मुहैया करा रही हैं. एक ग्राहक के तौर पर यह उलझन लाजमी है कि आखिर कर्ज लिया कहां से जाए. बैंक का रुख करना सुरक्षित है या NBFC से पैसे उठाना ज्यादा समझदारी का सौदा होगा? आइए समझते हैं कि इन दोनों में बुनियादी फर्क क्या है ताकि आप बिल्कुल सटीक फैसला ले सकें.

लोन चाहिए… बैंक से कर्ज लें या NBFC से, कहां मिलता है सबसे सस्ता और जल्दी पैसा?
लोन चाहिए… बैंक से कर्ज लें या NBFC से, कहां मिलता है सबसे सस्ता और जल्दी पैसा?

काम करने के तरीके में छिपा है बड़ा राज

वित्तीय संस्थाओं के काम करने के तरीके को समझना सबसे जरूरी है. बैंक पूरी तरह से रेगुलेटेड संस्थाएं हैं. इनका मुख्य काम आम जनता से पैसा जमा करना फिर उसी रकम को कर्ज के रूप में बाजार में उतारना है. आपके सेविंग, करंट या फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट का पैसा ही बैंक की असली ताकत होता है. जमाकर्ताओं के पैसे की सुरक्षा के चलते बैंकों पर रिजर्व बैंक के नियम बेहद सख्त होते हैं. दूसरी तरफ, NBFC भी कर्ज बांटती हैं लेकिन उन्हें आम जनता से डिमांड डिपॉजिट (सेविंग या करंट अकाउंट में पैसा) लेने का कोई अधिकार नहीं है. इसी वजह से इन पर बैंकों के मुकाबले नियमों की बंदिशें थोड़ी कम होती हैं.

कर्ज मिलने की रफ्तार तय करेगी आपका फैसला

जब पैसों की सख्त जरूरत होती है, तो कोई भी महीनों तक लोन पास होने का इंतजार नहीं करना चाहता. अप्रूवल के मामले में दोनों के अपने-अपने तरीके हैं. बैंक से कर्ज लेना कई बार लोहे के चने चबाने जैसा लग सकता है. यहां आपके कागजात, आमदनी, बैंक स्टेटमेंट से लेकर क्रेडिट हिस्ट्री तक की बहुत बारीकी से जांच की जाती है. अगर नौकरी नई है या सिबिल स्कोर थोड़ा भी डगमगाया हुआ है, तो बैंक फाइल खारिज करने में देर नहीं लगाते. इसके उलट, NBFC इस मोर्चे पर काफी लचीला रुख अपनाती हैं. अगर आप खुद का व्यवसाय करते हैं, क्रेडिट स्कोर बहुत शानदार नहीं है या पहली बार कर्ज ले रहे हैं, तब भी यहां से पैसा मिलने की उम्मीद बनी रहती है. डिजिटल तकनीक के भारी इस्तेमाल के चलते इनका लोन बांटने का प्रोसेस काफी तेज होता है.

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ब्याज दर का गणित समझना है बेहद जरूरी

कर्ज लेते वक्त हर ग्राहक की नजर सबसे पहले ब्याज दर पर ही जाती है. अमूमन बैंकों की ब्याज दर सस्ती होती है. इसका सीधा सा गणित है कि बैंकों के पास जनता की जमा पूंजी होती है, जिससे उन्हें बेहद कम लागत में पैसा मिल जाता है. वहीं, NBFC को बाजार से महंगे दामों पर फंड उठाना पड़ता है. जाहिर है, वे इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों की ईएमआई पर ही डालेंगे. इसलिए इनका ब्याज थोड़ा महंगा पड़ता है. लेकिन, किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले केवल ब्याज दर देखना काफी नहीं है. आपको प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट चार्ज, फोरक्लोजर पेनाल्टी जैसी शर्तों का भी बारीकी से आकलन करना चाहिए.

सही विकल्प चुनने का अचूक फॉर्मूला

एक ग्राहक के तौर पर आपको कहां जाना चाहिए. फैसला पूरी तरह से आपकी प्रोफाइल व जरूरत के समय पर निर्भर करता है. NBFC ग्राहकों को ईएमआई चुकाने के लचीले विकल्प देती हैं, जो कई बार बड़ी राहत साबित होते हैं. दूसरी ओर, बैंक एक ही छत के नीचे लोन के अलावा क्रेडिट कार्ड, बीमा, निवेश जैसी ढेरों अन्य सुविधाएं देते हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा उन पर ज्यादा जमता है. अगर आपके सारे कागजात दुरुस्त हैं, क्रेडिट स्कोर बेहतरीन है, पैसों की तुरंत जल्दबाजी नहीं है, तो बैंक आपके लिए सबसे बढ़िया सौदा है. लेकिन अगर आपको इमरजेंसी में फंड चाहिए, बैंक के कड़े नियमों में आप फिट नहीं बैठ रहे हैं, तो NBFC आपके लिए एक बेहतरीन मददगार साबित हो सकती हैं. कर्ज कहीं से भी लें, अपनी चुकाने की क्षमता का हिसाब-किताब सबसे पहले कर लें.

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