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लेबनान-इजराइल के बीच सीजफायर 3 हफ्ते बढ़ा, शांति समझौते की उम्मीद

लेबनान और इजराइल ने आपसी सहमति से सीजफायर को तीन हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया है. यह फैसला व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक के बाद लिया गया, जिसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी. ओवल ऑफिस में हुई इस बैठक में इजराइली राजदूत येचिएल लाइटर और लेबनान की राजदूत नदा मोवावाद शामिल हुए. यह बातचीत ऐसे समय हुई जब एक दिन पहले इजराइली हमलों में कम से कम 5 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल थीं.

लेबनान-इजराइल के बीच सीजफायर 3 हफ्ते बढ़ा, शांति समझौते की उम्मीद
लेबनान-इजराइल के बीच सीजफायर 3 हफ्ते बढ़ा, शांति समझौते की उम्मीद

ट्रंप ने कहा कि बैठक काफी अच्छी रही और अमेरिका लेबनान को हिज्बुल्लाह से खुद को सुरक्षित रखने में मदद करेगा. हालांकि, हिज्बुल्लाह के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल नहीं थे. ट्रंप ने यह भी बताया कि वह जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को अमेरिका बुलाना चाहते हैं. उनका मानना है कि इस तीन हफ्तों के युद्धविराम के दौरान दोनों देशों के बीच शांति समझौता होने की अच्छी संभावना है.

रविवार को खत्म हो रहा था सीजफायर

इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी और लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल ईसा भी मौजूद थे. इजराइल और लेबनान के राजदूतों की बात के बाद 17 अप्रैल को 10 दिन का सीजफायर लागू हुआ था, जो रविवार 27 अप्रैल को खत्म होने वाला था.

सीजफायर के दौरान हिंसा कमी आई है, लेकिन दक्षिण लेबनान में हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए. यहां इजराइली सेना ने एक बफर जोन बना रखा है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हाल के हमलों में 3 लोगों की मौत हुई और 2 लोग घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है. बुधवार को पत्रकार अमल खलील की भी मौत हो गई, जो युद्धविराम के बाद का सबसे खतरनाक दिन रहा.

लेबनान ने क्या डिमांड रखी?

बैठक में लेबनान ने मांग रखी कि इजराइल अपनी सेना वापस बुलाए, बंदियों को छोड़े और सीमा को स्पष्ट किया जाए. वहीं, इजराइल चाहता है कि लेबनान सरकार उसके साथ मिलकर हिज्बुल्लाह को कमजोर करे. लेबनान सरकार पिछले एक साल से इस संगठन को शांतिपूर्ण तरीके से निरस्त्र करने की कोशिश कर रही है.

यह संघर्ष 2 मार्च को फिर शुरू हुआ था, जब हिज्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में हमला किया. तब से अब तक करीब 2,500 लोगों की मौत हो चुकी है. इजराइल ने दक्षिण लेबनान के 5 से 10 किमी तक के इलाके पर कब्जा कर रखा है, ताकि अपने उत्तरी हिस्से को हमलों से बचाया जा सके.

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