भारतीय अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार के मोर्चे पर अगस्त महीने में हल्की राहत देखने को मिली है. सरकारी और श्रम आंकड़ों के अनुसार, देश में बेरोजगारी दर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 5 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है. मानसून के मुख्य चरण के दौरान कृषि गतिविधियों में आई तेजी के साथसाथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर्स में जारी आर्थिक गतिविधियों ने ग्रामीण व शहरी दोनों ही मोर्चों पर श्रम भागीदारी को मजबूत बनाए रखने में योगदान दिया है. हालांकि, बेरोजगारी दर में इस गिरावट के बावजूद रोजगार की गुणवत्ता और युवाओं के लिए नियमित नौकरियों की उपलब्धता पर अर्थशास्त्रियों की पैनी नजर बनी हुई है.

ग्रामीण क्षेत्रों में मानसूनी सीजन के दौरान कृषि श्रम की मांग से अस्थायी सहारा मिला है, वहीं आगामी त्योहारी सीजन की आहट के साथ ईकॉमर्स, रिटेल और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में नई भर्तियों की सुगबुगाहट तेज हो गई है. जानकारों का मानना है कि यदि आर्थिक गतिविधियां इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रहीं, तो आगामी तिमाहियों में जॉब मार्केट की स्थिति में और बेहतर सुधार देखने को मिल सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर मंगलवार को जारी आवधिक यानी नियमित अंतराल पर होने वाले श्रम बल सर्वेक्षण के आंकड़ों के तहत किस तरह की जानकारी दी गई है.
सरकार ने जारी किए कुछ इस तरह के आंकड़े
- देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर अगस्त में मामूली घटकर पांच प्रतिशत रही. जुलाई में यह 5.1 प्रतिशत थी. आधिकारिक बयान के अनुसार, बीते साल अगस्त में भी बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत थी.
- ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मासिक आधार पर अगस्त में घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई. जुलाई में यह 4.5 प्रतिशत थी. वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह आलोच्य महीने में मामूली बढ़कर 6.8 प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह 6.7 प्रतिशत थी.
- अगस्त, 2025 की तुलना में अगस्त, 2026 में कुल और शहरी बेरोजगारी दर लगभग समान रही, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर 0.2 प्रतिशत घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई.
- अगस्त, 2025 में यह 4.3 प्रतिशत थी. जनवरी, 2026 के बाद ग्रामीण बेरोजगारी दर अगस्त में सबसे निचले स्तर पर रही.
- पंद्रह वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में बेरोजगारी दर लगातार तीसरे महीने घटी और अगस्त में 4.9 प्रतिशत रही. मई, 2026 में यह 5.4 प्रतिशत थी.
- ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी दर अगस्त में कम होकर 4.3 प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह 4.6 प्रतिशत थी. वहीं शहरी पुरुषों में यह 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 6.1 प्रतिशत हो गई.
- महिलाओं में कुल बेरोजगारी दर लगातार दूसरे महीने घटकर अगस्त में 5.1 प्रतिशत रह गई. जून, 2026 में यह 5.9 प्रतिशत थी.
- ग्रामीण महिलाओं में बेरोजगारी दर अगस्त में घटकर 3.9 प्रतिशत रही, जो जुलाई में 4.3 प्रतिशत थी. वहीं शहरी महिलाओं में यह पिछले महीने की तुलना में लगभग स्थिर रही.
- सालाना आधार पर अगस्त, 2026 में पुरुषों और महिलाओं दोनों की कुल बेरोजगारी दर में कोई खास बदलाव नहीं हुआ.
- अखिल भारतीय स्तर पर अगस्त के मासिक अनुमान 3,70,160 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं.
- पीएलएफएस सर्वेक्षण के तौरतरीकों में जनवरी, 2025 से बदलाव किया गया है. इसका मकसद देश में श्रम बल से जुड़े संकेतकों के मासिक और तिमाही अनुमान उपलब्ध कराना है. अगस्त, 2026 का मासिक बुलेटिन इस श्रृंखला की 17वीं रिपोर्ट है.
- पंद्रह वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की कुल श्रम बल भागीदारी दर अगस्त में बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 55.4 प्रतिशत थी.
- ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह दर बढ़कर अगस्त में 58.2 प्रतिशत हो गई जो जुलाई में 58 प्रतिशत थी. शहरी क्षेत्रों में यह 50.4 प्रतिशत पर स्थिर रही.
- अगस्त, 2025 की तुलना में कुल श्रम बल भागीदारी दर 0.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई. एक साल पहले यह 55 प्रतिशत थी.
- इसी अवधि में ग्रामीण श्रम बल भागीदारी दर 57 प्रतिशत से बढ़कर 58.2 प्रतिशत हुई, जबकि शहरी दर मामूली 50.9 प्रतिशत से घटकर 50.4 प्रतिशत रह गई.
- महिलाओं में कुल श्रम बल भागीदारी दर अगस्त में बढ़कर 34.8 प्रतिशत हो गई जो जुलाई में 34.4 प्रतिशत थी. इसमें ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी का प्रमुख योगदान रहा, जहां यह जुलाई के 38.8 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 39.4 प्रतिशत हो गई.
- शहरी महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर मामूली बढ़कर अगस्त में 25.4 प्रतिशत रही जो जुलाई में 25.3 प्रतिशत थी.
- सालाना आधार पर महिलाओं की कुल श्रम बल भागीदारी दर अगस्त, 2026 में 1.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 34.8 प्रतिशत हो गई जो बीते साल में 33.7 प्रतिशत थी.
- ग्रामीण महिलाओं में यह 37.4 प्रतिशत से बढ़कर 39.4 प्रतिशत हुई, जबकि शहरी महिलाओं में 26.1 प्रतिशत से घटकर 25.4 प्रतिशत रह गई.
- कुल कामगार आबादी अनुपात अगस्त में बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया जो जुलाई में 52.5 प्रतिशत था. ग्रामीण क्षेत्रों में कामगारों की भागीदारी बढ़ने से कुल कामगार आबादी अनुपात बढ़ा है.
- ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात अगस्त में बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गया जो जुलाई में 55.4 प्रतिशत था. जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 47 प्रतिशत पर स्थिर रहा.
- अगस्त, 2025 की तुलना में कुल कामगार आबादी अनुपात 0.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया. ग्रामीण क्षेत्रों में यह 54.5 प्रतिशत से बढ़कर 55.8 प्रतिशत हुआ, जबकि शहरी क्षेत्रों में 47.5 प्रतिशत से घटकर 47 प्रतिशत रह गया.
- सालाना आधार पर महिलाओं के कामगार आबादी अनुपात में भी वृद्धि हुई. अगस्त, 2026 में यह 33 प्रतिशत रहा, जबकि अगस्त, 2025 में 32 प्रतिशत था.