मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने और रुपये को सहारा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने 22 मई को समाप्त हुए दो हफ्तों के भीतर करीब 12 अरब डॉलर मूल्य यानी लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये का सोना बेच दिया है। रिपोर्ट में यह आकलन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़ों के गहन विश्लेषण के आधार पर किया गया है। हालाँकि, इस मामले पर अभी तक आरबीआई की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी हुई खरीदारी
रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि जिस अवधि में सोना बेचा गया, ठीक उसी दौरान आरबीआई ने 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ भी खरीदी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कवायद विदेशी मुद्रा भंडार के विविधीकरण और प्रबंधन की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना था, जिसका 77 प्रतिशत हिस्सा देश की घरेलू तिजोरियों में सुरक्षित रखा गया है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट बना वजह
माना जा रहा है कि इस रणनीतिक बिक्री के पीछे वैश्विक हालात बड़ी वजह हैं। होर्मुज जलमार्ग में जारी व्यवधान के चलते दुनिया की तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, उसे तेल के लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है। इस अप्रत्याशित खर्च ने रुपये की विनिमय दर और समग्र विदेशी मुद्रा भंडार, दोनों पर ही दबाव बढ़ा दिया था। ऐसे में जानकार सोने की इस बिक्री को भंडार को मज़बूत बनाए रखने और बाज़ार में तरलता बनाए रखने का एक सधा हुआ कदम मान रहे हैं।

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