नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छात्रों से शिक्षा और करियर के साथसाथ समाज तथा देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में धन महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन धन ही सब कुछ नहीं है। व्यक्ति की वास्तविक उपलब्धि इस बात से भी जुड़ी होती है कि वह समाज और राष्ट्र के लिए कितना योगदान देता है।

राष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए सेवा, जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश और समाज के हित में भी करना चाहिए।
शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व और सोच को विकसित करने का माध्यम है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज की समस्याओं को समझने और उनके समाधान में योगदान देने के लिए करना चाहिए।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने भविष्य के लक्ष्य तय करते समय समाज और राष्ट्र के व्यापक हित को भी ध्यान में रखें। उनका संदेश था कि सफलता को केवल आर्थिक उपलब्धियों से नहीं मापा जाना चाहिए।
सेवा भावना को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील
राष्ट्रपति ने छात्रों के बीच सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और नई सोच देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने आसपास के लोगों और समाज की जरूरतों को समझने तथा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
युवाओं से देश निर्माण में योगदान की उम्मीद
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आज के विद्यार्थी ही आने वाले समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे। ऐसे में उनमें ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का होना भी जरूरी है।
उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों के साथसाथ देश और समाज के हित को भी प्राथमिकता दें। राष्ट्रपति का यह संदेश विद्यार्थियों को सफलता के साथ सेवा और जिम्मेदारी के महत्व को समझने की दिशा में प्रेरित करने वाला रहा।
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