अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स ने यूरोप भर में काम करने वाली लिक्विड स्टोरेज और टर्मिनल कंपनी, ‘इवोस टर्मिनल्स’ को 3.3 बिलियन डॉलर यानी 31 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा में खरीदने का प्लान बना रही है. इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि गौतम अडानी की यह प्रमुख कंपनी इस सेक्टर के कंसोलिडेशन में एक अहम भूमिका निभाना चाहती है. ऐसा विशेष रूप से यूरोप में किया जा रहा है, जहां जियो पॉलिटिकल अस्थिरता और एनर्जी सेफ्टी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर समूह के घरेलू पोर्ट वॉल्यूम पर भी पड़ा है.

5 साल पुरानी ‘इवोस’ कंपनी, ग्लोबल एसेट मैनेजर ‘इग्नियो इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स’ के स्वामित्व में है, जो खुद ‘फर्स्ट सेंटियर ग्रुप’ का हिस्सा है. इसके पास 5 यूरोपीय देशों के सात प्रमुख बंदरगाहों पर आठ टैंक टर्मिनल हैं, जिनकी कुल स्टोरेज क्षमता 6.4 मिलियन क्यूबिक मीटर है. यह इसे ग्लोबल पोर्ट ऑपरेटरों और समुद्री इंफ्रा के मालिकों के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बनाता है. 2025 में, इसका EBITDA 200 मिलियन रहने का अनुमान था. साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा रियायती समझौते 1 नवंबर 2028 को अपनी तय समाप्ति तिथि के बाद आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे.
कई कंपनियों ने दिखाई दिलचस्पी
इसके पोर्टफोलियो में गैसोलीन जैसे मोटर फ्यूल के लिए स्टोरेज के साथसाथ पर्यावरण के अनुकूल विकल्प भी शामिल हैं, जैसे कि बायोडीजल, सस्टेनेबल एविएशन टर्बाइन फ्यूल, ग्रीन नेफ्था, बायोइथेनॉल, ईमेथनॉल और बायोमरीन फ्यूल. इस साल की शुरुआत में, इग्नियो ने मॉर्गन स्टेनली को एक औपचारिक सेल प्रोसेस चलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी. इसमें कई ग्लोबल दावेदारों ने काफी दिलचस्पी दिखाई, जिनमें KKR, EQT और अन्य फाइनेंशियल स्पांसर, मैक्वेरी , गोल्डमैन सैक्स अल्टरनेटिव्स और ब्लैकरॉक जैसे स्पेशल PE बायआउट ग्रुप, CPP इन्वेस्टमेंट्स जैसे पेंशन फंड, और LBC टैंक टर्मिनल्स तथा एक्सोलम जैसे ऑपरेटर शामिल थे.
जल्द फाइनल हो सकती है डील
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, APSEZ ने इस हफ्ते की शुरुआत में प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के तहत एक बाइंडिंग ऑफर जमा किया. आने वाले हफ्तों में इस पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है. एम्स्टर्डम में मुख्यालय वाली कंपनी ‘इवोस’ ने जुलाई में अपनी फाइनेंसिंग ब्रांच ‘इवोस फाइनेंस BV’ के जरिए 950 मिलियन यूरो का कर्ज जुटाया, जिससे उसने अपने मौजूदा कर्ज का एक बड़ा हिस्सा रीफाइनेंस किया. लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर ने इस डील को प्राइवेट प्लेसमेंट और बैंक लोन के मिश्रण के रूप में तैयार किया, और इस प्रोसेस में ‘इन्वेस्टमेंटग्रेड’ रेटिंग भी हासिल की. उस समय कंपनी के CEO हैरी डीन्स ने कहा था कि इससे कंपनी को अपनी रणनीति को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी. एनर्जी ट्रांजिशन के दौर में ग्राहकों के साथ कारोबार बढ़ाने के नए अवसर मिल रहे हैं.
हाल में IFM से मिली थी हार
अडानी का यह विदेशी विस्तार प्रयास ऐसे समय में सामने आया है, जब पिछले हफ्ते ही उन्हें UK की ‘एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स’ को खरीदने की 10 बिलियन पाउंड की दौड़ में ‘IFM’ से हार का सामना करना पड़ा था. बुधवार को कंपनी प्रबंधन ने बताया कि वे अपने ग्लोबल विस्तार योजनाओं के तहत बंदरगाहों और टर्मिनलों सहित 20 संपत्तियों का मूल्यांकन कर रहे हैं. APSEZ के CEO अश्वनी गुप्ता ने एक अर्निंग कॉल के दौरान कहा कि हमारी ताकत कंटेनर हैं, इसलिए हम सबसे पहले यह देखते हैं कि कंटेनरों के जरिए कहां अवसर मिल सकते हैं. हम लिक्विड टर्मिनलों पर भी विचार कर रहे हैं. भविष्य में बंदरगाह एनर्जी ट्रांजिशन के लिए एक गेटवे के रूप में काम कर सकते हैं.
APSEZ की ग्लोबल मौजूदगी
APSEZ भारत में 15 बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करती है, इसके अलावा इजराइल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में इसकी चार अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं भी हैं. यह 140 से अधिक प्रकार के लिक्विड कार्गो को संभालती है. कंपनी के नए परिचालन खुलासों के अनुसार, इसकी घरेलू कार्गोहैंडलिंग क्षमता 653 मिलियन मीट्रिक टन है. अडानी ग्रुप के मरीन प्लेटफॉर्म, ‘एस्ट्रो ऑफशोर’ ने यूरोप में अपनी डीपवाटर इंजीनियरिंग और ऑफशोर एग्जीक्यूशन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ‘ओशिनियरिंग इंटरनेशनल’ के साथ एक कांट्रैक्ट किया है. इसके साथ ही, APSEZ ने यूरोप में स्पेशल ‘सबसी’ कार्यों में एंट्री की है.