साल 2006 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार चारों आरोपियों, लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने चार्ज फ्रेमिंग को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, जिसके आधार पर उन्हें निर्दोष माना गया। मालेगांव में हुए इन सीरियल धमाकों में 37 लोगो की जान चली गयी थी।

बता दें कि यह मामला 8 सितंबर 2006 को मालेगांव में हुए सीरियल ब्लास्ट से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस दिन शब-ए-बारात के मौके पर तीन प्रमुख जगहों, बड़ा कब्रिस्तान, हमीदिया मस्जिद और मुशावरत चौक पर धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में करीब 37 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के तुरंत बाद जांच महाराष्ट्र एटीएस को सौंपी गई। ATS ने अपनी शुरुआती जांच में इस हमले के तार प्रतिबंधित संगठन सिमी से जोड़ते हुए 9 मुस्लिम आरोपियों को गिरफ्तार किया। 2006 से 2011 के बीच ATS लगातार इसे इस्लामिक आतंकवाद से जुड़ा मामला बताती रही और 2011 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भी अपनी जांच में ATS की थ्योरी पर मुहर लगा दी।
मामले में बड़ा मोड़ 2010 में तब आया, जब स्वामी असीमानंद के बयान ने नई बहस छेड़ दी। उन्होंने 2006 से 2008 के बीच मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस धमाकों में हिंदू संगठनों की संलिप्तता का दावा किया। हालांकि, ATS पहले ही इस एंगल को खारिज कर चुकी थी। इसके बाद 2011 में NIA ने जांच अपने हाथ में ली और केस की दिशा बदल गई। NIA ने 2013 में 4 नए आरोपियों, लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया को गिरफ्तार किया और ATS व CBI की जांच को खारिज करते हुए कहा कि पहले गिरफ्तार किए गए 9 मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।
NIA के इसी बयान के आधार पर 2021 में उन सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस दौरान यह भी सामने आया कि ATS और NIA की चार्जशीट और जांच में काफी अंतर था, जहां ATS ने इसे इस्लामिक आतंकवाद बताया, वहीं NIA ने हिंदूवादी अतिवादियों की भूमिका बताई। मामले में 2019 में NIA द्वारा गिरफ्तार चारों आरोपियों को जमानत मिल गई थी। अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने चार्ज फ्रेमिंग को ही खारिज कर दिया है, जिसके बाद चारों आरोपी पूरी तरह बरी हो गए हैं। इस फैसले के साथ ही करीब दो दशक पुराने इस मामले में एक अहम कानूनी पड़ाव पूरा हो गया है।
ATS द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नूर-उल-हुदा, शब्बीर अहमद (अब मृत), रईस अहमद, सलमान फारसी, फारोग मगदूमी, शेख मोहम्मद अली, आसिफ खान, मोहम्मद जाहिद और अबरार अहमद शामिल थे, जिनमें से एक की मृत्यु हो चुकी है जबकि बाकी सभी बरी हो चुके हैं। करीब 20 साल तक चले इस मामले में जांच एजेंसियों की अलग-अलग थ्योरी और बार-बार बदलते घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए थे। हाई कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है।





