सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को एक मामले में फैसला सुनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है. मामला यूपी के आगरा जिले से जुड़ा है. यहां एक शख्स को हत्या और सबूत मिटाने के आरोप में 6 साल तक बिना ठोस सबूत के जेल में रखा गया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया. कोर्ट ने इस दौरान कहा कि यूपी पुलिस को जांच करने की ट्रेनिंग देने की जरूरत है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शख्स को यूपी पुलिस 6 लाख रुपए का मुआवजा दे. इस संबंध में कोर्ट ने आदेश की कॉपी यूपी के डीजीपी के पास भेजने का निर्देश दिया.
क्या है पूरा मामला?
एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड कार्तिकेय भार्गव की ओर से पेश याचिका के मुताबिक यह केस अरुण उर्फ दीपक बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का है. अरुण को आगरा जिले के अछनेरा थाने में दर्ज एक केस में 14 नवंबर 2019 से हिरासत में रखा गया था. केस में अपहरण, हत्या और सबूत मिटाने के आरोप लगाए गए थे.
यह मामला शुरू में बेल पिटिशिन से संबंधित था. सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने पाया कि मामले में बिना किसी सबूत के अरुण को 6 साल तक जेल में रखा गया है. कोर्ट ने इसे अन्याय बताया.
अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि युवक का 6 साल बर्बाद हो गया, इसे वापस कैसे किया जा सकता है? इसके बाद कोर्ट ने यूपी पुलिस से पीड़ित युवक को 6 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया.
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
जस्टिस एमबी पारदीवाला और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एक मनगढ़ंत कहानी के आधार पर उस शख्स के जीवन के 6 साल बर्बाद हो गए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यूपी पुलिस ने मामूली जांच भी नहीं की. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को अपने अधिकारियों को जांच प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया.