वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पोस्टल बैलेट यानी डाक से मतदान से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 63 के फैसले में ट्रंप प्रशासन के उस आदेश पर लगी निचली अदालत की रोक हटा दी, जिससे प्रशासन को नवंबर में होने वाले 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले अपने आदेश के कुछ हिस्सों पर आगे बढ़ने का रास्ता मिल गया है। हालांकि, अदालत ने आदेश की अंतिम वैधानिकता पर फैसला नहीं दिया है और एक अलग रोक अब भी लागू है।

क्या है ट्रंप प्रशासन का आदेश?
ट्रंप प्रशासन का आदेश चुनाव के लिए पात्र मतदाताओं से जुड़ी सूचियों और मेलइन बैलेट की प्रक्रिया में सख्त बदलावों का रास्ता खोलता है। इसके तहत संघीय एजेंसियों और अमेरिकी डाक सेवा की भूमिका बढ़ाने की योजना है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसे पूरी तरह संवैधानिक या कानूनी नहीं ठहराया, बल्कि निचली अदालत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाते हुए कहा कि राज्यों की चुनौती समय से पहले की गई थी।
मध्यावधि चुनाव पर कितना असर?
फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज है। रिपब्लिकन इसे चुनावी व्यवस्था को अधिक सख्त बनाने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं, जबकि डेमोक्रेटिक नेताओं और कई राज्यों को आशंका है कि मेलइन वोटिंग में अचानक बदलाव मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।
हालांकि, नवंबर चुनावों से पहले समय बेहद कम है। कई राज्यों को जल्द ही बैलेट भेजने हैं और नई व्यवस्था को लागू करने में कानूनी तथा व्यावहारिक बाधाएं बनी हुई हैं। इसलिए फिलहाल यह साफ नहीं है कि इस फैसले का चुनावी नतीजों पर कितना सीधा असर पड़ेगा। आगे नई कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
बड़ी बात
सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए अहम कानूनी जीत जरूर है, लेकिन पोस्टल बैलेट व्यवस्था में वास्तविक बदलाव और 2026 के मध्यावधि चुनाव पर उसका अंतिम असर अभी तय नहीं है।