पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कोलकाता में जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में प्रचार के आखिरी दिन उन्होंने ममता बनर्जी पर खुलकर निशाना साधा और कहा कि वह कभी भी मुद्दों पर बात नहीं करती हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि जब-जब हम पश्चिम बंगाल के विकास के मुद्दों पर चर्चा लाने का प्रयास करते हैं तो ममता सिर्फ मां- मछली की बात करती हैं, झालमड़ी की बात करती हैं। मुख्य मुद्दों पर कभी वह परिचर्चा या कोई डिबेट नहीं करतीं। एक मुख्यमंत्री जिसका लंबा कार्यकाल रहा हो। निश्चित रूप से उनकी कोई ना कोई तो उपलब्धियां होंगी, लेकिन आपने मुख्यमंत्री को अर्थव्यवस्था पर चर्चा करते शायद नहीं देखा होगा।

स्मृति ने कहा कि समाज किसी भी सरकार से अपेक्षा रखता है कि समाज में जो सबसे ज्यादा कमजोर हैं, गरीब हैं, उनके संरक्षण के लिए सरकार अपने तंत्र का इस्तेमाल करेगी। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति तो आप खुद रिपोर्ट करते हैं। तो यह भी ऐसा मुद्दा नहीं है, जिस पर ममता कहीं भी अपना वक्तव्य रखती हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2014 से लेकर 2026 तक केंद्र की सरकार से टैक्स डेवोल्यूशन, ग्रांट्स इन एड, 50 साल का इंटरेस्ट फ्री लोन के जरिए बंगाल को लगभग 10 लाख करोड़ रुपये मिले हैं। इस पैसे का हिसाब जब-जब मांगा जाता है तो ममता कभी डिबेट नहीं करतीं। उन्होंने आगे कहा, “मालदा में जजेस का होस्टेज होना देश के किसी भी भूभाग में ऐसा चित्र आपने कभी नहीं देखा होगा। उस मुद्दे पर भी तृणमूल कांग्रेस मौन रहती है। तो मुझे ऐसा लगता है कि उनका मौन रहना इन मुख्य मुद्दों पर जिस पे राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। अपनी प्रशंसा करवाते हैं अथवा प्रमाण देते हैं कि उनके पास जब सत्ता है या थी तब उन्होंने उनकी क्या उपलब्धियां रही। ये जो आप गैप देख रहे हैं ना ये बंगाल में चेंज का सबसे बड़ा संकेत है।”
स्मृति ने कहा कि इस बार फाइट सीधा टीएमसी और बीजेपी के बीच है। वामपंथ कहीं फिगर नहीं हो रहा। कांग्रेस कहीं फिगर नहीं हो रही। भारतीय जनता पार्टी का इतना तेजी से उभरना और सीधा-सीधा तृणमूल को टक्कर देना राजनीतिक संकेत है कि यहां के हालात बदल रहे हैं। हमारे पैरामिलिट्री फोर्से, इलेक्शन कमीशन और पुलिस की ने एक ऐसा तंत्र गठित किया है, जिससे पश्चिम बंगाल में लोग निर्भीक होकर अपना वोट दे सकें। हिंसा की वारदातें घटी और बहुत बड़े स्तर पर घटी, जिस प्रकार से आपने वोटर का रिकॉर्ड टर्न आउट देखा है। वह अपने आप में बंगाल के इस चुनाव का सबसे बड़ा हिस्टोरिकल फैक्टर रहा है।





