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भारत में 35 फीसदी बच्चों को फैटी लिवर? ऐसा क्यों हो रहा है? कैसे करें बचाव​

भारत तेजी से बढ़ते लिवर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है. नए महामारीसंबंधी डेटा से पता चलता है कि फैटी लिवर की बीमारी अब देश भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही है और पिछले दशक में इसके मामलों की दर तेजी से बढ़ी है. हाल ही में हुई वैश्विक और राष्ट्रीय हेल्थ […]

भारत तेजी से बढ़ते लिवर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है. नए महामारीसंबंधी डेटा से पता चलता है कि फैटी लिवर की बीमारी अब देश भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रही है और पिछले दशक में इसके मामलों की दर तेजी से बढ़ी है. हाल ही में हुई वैश्विक और राष्ट्रीय हेल्थ रिसर्च से मिले इन रिजल्ट के आधार पर एक्सपर्ट्स जांच और रोकथाम के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.

डॉ. पीयूष विश्वकर्मा बताते हैं कि फैटी लिवर बीमारी को अब ज्यादा सटीक रूप से MASLD कहा जाता है. इससे भारत की 16% से 32% आबादी के प्रभावित होने का अनुमान है. यह आंकड़ा लगभग 12 करोड़ लोगों के बराबर है.

क्या कहते हैं आंकड़े

जब इन आंकड़ों पर और गहराई से अध्ययन किया जाता है तो यह और भी चिंताजनक लगते हैं. 26,000 से ज्यादा लोगों पर की गई 50 स्टडी के विश्लेषण से पता चला है कि भारत में 38.6% वयस्कों को नॉनअल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज है. डायबिटीज या मोटापे से पीड़ित लोगों में यह दर और भी ज्यादा है. बच्चे भी इससे प्रभावित हैं. इसी विश्लेषण में पाया गया कि 35.4% बच्चों को फैटी लिवर की बीमारी है, और मोटापे से ग्रस्त बच्चों में यह आंकड़ा बढ़कर 63.4% हो जाता है.

आईटी सेक्टर में काम करने वालों पर खतरा ज्यादा

फैटी लिवर की बीमारी किसी को भी हो सकती है, चाहे वे कहीं भी रहते हों या कोई भी काम करते हों. स्टडी से पता चलता है कि भारत के IT सेक्टर में काम करने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा होता है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक बैठकर काम करना पड़ता है और उनकी लाइफस्टाइल की आदतें भी अस्वस्थ होती हैं. कर्नाटक और उत्तर भारत में हुई रिसर्च में भी शहरों और गांवों, दोनों जगहों पर इस बीमारी के ज्यादा मामले पाए गए. डायबिटीज, पेट के आसपास ज्यादा चर्बी और इंसुलिन रेजिस्टेंस इसके मुख्य जोखिम फैक्टर हैं.

हालांकि यह समस्या बड़े पैमाने पर फैली हुई है, लेकिन इस साल की शुरुआत में लिवर विशेषज्ञों के एक देशव्यापी सर्वे में बीमारी की पहचान और इलाज के तरीकों में कमियां पाई गईं. इससे पता चलता है कि फैटी लिवर की बीमारी के बढ़ते बोझ के हिसाब से हेल्थ केयर के तौरतरीके अभी भी विकसित नहीं हो पाए हैं.

ये बीमारियां बनती हैं कारण

फैटी लिवर की बीमारी के बढ़ने के मुख्य कारणों में टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधि की कमी शामिल हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह एक मौका भी है, क्योंकि जिन लोगों की इनमें से किसी एक बीमारी के लिए जांच होती है, उनकी दूसरी बीमारियों के लिए भी जांच की जा सकती है.

इन चीजों का रखें ध्यान

हेल्दी लाइफस्टाइल में बदलाव, जैसे कि संतुलित डाइट खाना और नियमित रूप से एक्सरसाइज करना आदि उपाय एक ही समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में फैटी लिवर बीमारी का बोझ लगातार बढ़ता जाएगा.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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