भारत में सिजेरियन डिलीवरी आजकल नॉर्मल हो गई है. जम्मू कश्मीर ऐसा राज्य है जहां 90 फीसदी मामलों में बच्चों की डिलीवरी सिजेरियन से हो रही है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में 87.7 फीसदी और तेलंगाना में 84 फीसदी डिलीवरी सी-सेक्शन के जरिए हुए हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की नई रिपोर्ट में ये आंकड़ा सामने आया है. इसके मुताबिक भारत में सी-सेक्शन डिलीवरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ये आंकड़ा 21.5 से बढ़कर 27.5 पर पहुंच गया है.

माना जा रहा है कि इसके पीछे एक बड़ा कारण नॉर्मल डिलीवरी से डर है. लेकिन और भी कई वजह हैं जिस वजह से गांवों में भी महिलाएं अस्पताल जाकर सिजेरियन से डिलीवरी की मांग रखने लगी हैं.
देश में इस आम भाषा में लोग ऑपरेशन से डिलीवरी कहते हैं. साल 2005-06 में इसका आंकड़ा 8.5 फीसदी था और 2015-16 में ये बढ़कर 17.2 फीसदी हो गया. इसके बाद 2019-21 में 21.5 फीसदी बच्चों का जन्म सिजेरियन डिलीवरी के जरिए हुआ. एक्सपर्ट से जानें इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं और किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए.
Khabar Monkey
क्या हैं इसके पीछे के कारण
नोएडा में मदरहुड हॉस्पिटल की गायनोलॉजिस्ट डॉक्टर स्वाति राय से टीवी9 ने खास बातचीत की. डॉ. स्वाति ने बताया कि क्यों महिलाओं को सी-सेक्शन से ही अपनी डिलीवरी करवानी पड़ती है. एक्सपर्ट कहती हैं कि टाइम के साथ इसका रेट घटना चाहिए क्योंकि हमारे पास कई नई तकनीक आ गई हैं. फिर भी ये लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि शहरों में ये ज्यादा बढ़ गया है. इन्होंने इसका बड़ा कारण हाई रिस्क और लेट प्रेगनेंसी को बताया.
उनके मुताबिक इस कंडीशन में की गई प्रेगनेंसी में महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी ही करवानी पड़ती है. एक्सपर्ट बताती हैं कि करियर, घर और दूसरी कई वजहों के चलते ज्यादातर महिलाएं 35 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी कंसीव करती है. इसमें काफी दिक्कतें आती हैं और जब डिलीवरी का टाइम आता है तो उन्हें सिजेरियन के तरीके को ही चुनना पड़ता है.
नॉर्मल डिलीवरी में होने वाले दर्द का डर
डॉ. स्वाति कहती हैं कि ज्यादातर महिलाएं दर्द से डर के कारण सिजेरियन को चुनना पसंद करती हैं. उन्होंने कहा कि दर्द से नहीं घबराना है. आजकल ऐसी कई तकनीक आ गई हैं जिसमें बिना दर्द के डिलीवरी होती है.
बच्चे के साथ अनहोनी का डर
आज के समय में कपल चीजों को मॉडर्न तरीकों से ज्यादा सोचते हैं. अधिकतर को डर रहता है कि उनके बच्चे के साथ किसी भी तरह की अनहोनी न हो जाए. बच्चे की सेफ्टी को देखते हुए वो सी-सेक्शन के ऑप्शन को ही चुनते हैं. उन्हें डर रहता है कि कहीं नॉर्मल डिलीवरी के वक्त उनके बच्चे को कोई नुकसान न हो जाए.
ध्यान रखें ये बातें
एक्सपर्ट कहती हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान अपना चेकअप टाइम से करवाएं.
खानपान का खास ध्यान रखें क्योंकि इस दौरान शरीर को एक्स्ट्रा न्यूट्रिशन की जरूरत होती है.
इसके अलावा महिलाओं को नॉर्मल डिलीवरी रिलेटेड एक्सरसाइज रोजाना करनी चाहिए. लेकिन इसके लिए पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.












