नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देश बाजार पहुंच, शुल्क और व्यापार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर समाधान तलाश रहे हैं। हालांकि, रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद इस प्रक्रिया में एक अहम और संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।

व्यापार समझौते पर आगे बढ़ रही बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत चल रही है। भारत का जोर ऐसे समझौते पर है जिसमें दोनों देशों के उद्योगों और निर्यातकों के हितों का संतुलन बना रहे। भारत सरकार के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में कई भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है।
रूसी तेल खरीद बनी बड़ी चुनौती
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका का दबाव भारत के लिए चिंता का विषय है। फरवरी 2026 में भारतअमेरिका व्यापार समझौते के ढांचे के तहत रूस से तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क को हटाया गया था, लेकिन इसके साथ भारत के रूसी तेल आयात को लेकर शर्तें भी जुड़ी थीं।
अब अमेरिकी सीनेट ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदमों का प्रावधान करने वाला विधेयक पारित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें राष्ट्रपति को रूस से बड़े पैमाने पर तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। हालांकि, यह विधेयक अभी अपने आप भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं करता।
भारत के सामने संतुलन की चुनौती
भारत के लिए रूस से तेल खरीद ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। वहीं, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकता है। ऐसे में नई दिल्ली को दोनों मोर्चों के बीच संतुलन बनाना होगा।
सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, रूसी तेल से जुड़े अमेरिकी कदमों को लेकर बातचीत जारी है और राजनयिक स्तर पर संवाद को सकारात्मक बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
आगे क्या?
भारतअमेरिका व्यापार समझौते की अंतिम दिशा आने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन रूसी तेल और उससे जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का मुद्दा वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।