नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को नई धार देने के लिए विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। पार्टी ने सामाजिक और युवा वर्गों के बीच संगठन की पकड़ मजबूत करने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। नई सूची में बैजयंत जय पांडा को OBC मोर्चे और सतीश पूनिया को ST मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है।

भाजपा का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पार्टी अपनी नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने में जुटी है। 17 अगस्त को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया गया था। इसके बाद अब अलगअलग मोर्चों के लिए प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
सात प्रमुख मोर्चों की जिम्मेदारी तय
भाजपा ने युवा, महिला, किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक मोर्चों के लिए प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं।
OBC मोर्चा — बैजयंत पांडा:
बैजयंत जय पांडा को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में उन्हें पहले ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल चुकी है। अब OBC मोर्चे के प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक विस्तार के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
ST मोर्चा — सतीश पूनिया:
राजस्थान के वरिष्ठ नेता डॉ. सतीश पूनिया को अनुसूचित जनजाति यानी ST मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। पूनिया को भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी भी दी गई है।
किस नेता को कौनसा मोर्चा?
- युवा मोर्चा: हरीश द्विवेदी
- महिला मोर्चा: डी. पुरंदेश्वरी
- किसान मोर्चा: लाल सिंह आर्य
- SC मोर्चा: संजय भाटिया
- ST मोर्चा: सतीश पूनिया
- OBC मोर्चा: बैजयंत जय पांडा
- अल्पसंख्यक मोर्चा: गजेंद्र पटेल
इन नियुक्तियों की जानकारी सामने आने के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक गतिविधियों को और तेज किए जाने की तैयारी है।
नई राष्ट्रीय टीम के बाद संगठन पर फोकस
भाजपा ने अगस्त में अपनी नई राष्ट्रीय टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं। वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत, राम माधव और बैजयंत पांडा समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। वहीं सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया समेत कई नेताओं को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिली।
अब मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति को संगठन के जमीनी ढांचे को मजबूत करने की अगली कड़ी माना जा रहा है। युवा, महिला, किसान, SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच पार्टी की गतिविधियों को बढ़ाने में इन मोर्चों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
चुनावी तैयारियों के लिहाज से भी अहम
भाजपा के इस संगठनात्मक फेरबदल को आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पार्टी अलगअलग सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है।
खास तौर पर OBC और ST मोर्चों की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को दिए जाने से इन वर्गों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने पर पार्टी के फोकस का संकेत मिलता है। वहीं युवा और महिला मोर्चे के लिए भी अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की कोशिश की गई है।
भाजपा के लिए आने वाले समय में इन मोर्चों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि पार्टी राष्ट्रीय संगठन के साथसाथ राज्यों में भी अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच सक्रियता बढ़ाने की तैयारी कर रही है।