माइग्रेन को आमतौर पर सिरदर्द की एक गंभीर समस्या के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके प्रभाव केवल सिरदर्द तक सीमित नहीं हो सकते. हाल के वर्षों में वैज्ञानिक माइग्रेन और शरीर की अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के बीच संबंधों को समझने की कोशिश कर रहे हैं. Springer Nature के जर्नल The Journal of Headache and Pain में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, बार-बार माइग्रेन की समस्या और हार्ट डिजीज के जोखिम के बीच संबंध हो सकता है. हालांकि यह स्टडी माइग्रेन को सीधे हार्ट डिजीज का कारण नहीं बताती, बल्कि दोनों के बीच एक संबंध की ओर इशारा करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि माइग्रेन को केवल सिरदर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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एक ऐसी स्थिति है, जिसमें तेज सिरदर्द के साथ मतली, उल्टी, रोशनी या आवाज के प्रति सेंसिटिविटी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. यह समस्या व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज को प्रभावित कर सकती है. कई लोगों को समय-समय पर माइग्रेन के दौरे पड़ते हैं, जबकि कुछ लोगों में यह समस्या बार-बार देखी जाती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस स्टडी में क्या पाया गया, माइग्रेन और दिल की सेहत के बीच क्या संबंध हो सकता है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
स्टडी में माइग्रेन और दिल की सेहत को लेकर क्या पाया गया?
स्टडी में रिसर्चर्स ने माइग्रेन और हार्ट डिजीज के बीच संबंध का एनालिसिस किया. अध्ययन में पाया गया कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD), कोरोनरी हार्ट डिजीज और इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम अधिक देखा गया. रिसर्चर्स के मुताबिक, माइग्रेन केवल सिरदर्द की समस्या नहीं हो सकती, बल्कि यह हार्ट और ब्लड वेसल्स की सेहत से भी जुड़ी हो सकती है.
स्टडी में यह भी पाया गया कि 45 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में यह संबंध अधिक मजबूत दिखाई दिया. इसके अलावा, जिन लोगों में माइग्रेन के साथ धूम्रपान, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य पारंपरिक हार्ट जोखिम कारक मौजूद थे, उनमें हार्ट डिजीजका खतरा और अधिक देखा गया. रिसर्चर्स ने सुझाव दिया कि बार-बार माइग्रेन की समस्या वाले लोगों को अपनी दिल की सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए. हालांकि यह अध्ययन केवल दोनों के बीच संबंध दिखाता है, यह साबित नहीं करता कि माइग्रेन सीधे हार्ट डिजीज का कारण बनता है.
माइग्रेन होने पर कौन से संकेत गंभीर हो सकते हैं?
अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो जाए, पहले की तुलना में अलग महसूस हो, बार-बार होने लगे या इसके साथ बोलने में परेशानी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
इसके अलावा अगर माइग्रेन के दौरे रोजमर्रा की एक्टिविटी को प्रभावित करने लगें या दवाओं के बावजूद बार-बार हो रहे हों, तो भी डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. समय पर जांच से किसी गंभीर समस्या की पहचान की जा सकती है.
बार-बार माइग्रेन होने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बार-बार माइग्रेन होने पर पर्याप्त नींद लेना, तनाव को कंट्रोल रखना और नियमित दिनचर्या अपनाना फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा उन चीजों की पहचान करने की कोशिश करें जो माइग्रेन को ट्रिगर करती हैं, जैसे कुछ खाने की चीजें, तेज रोशनी या नींद की कमी.
पर्याप्त पानी पिएं, संतुलित डाइट लें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन करें. अगर माइग्रेन की समस्या लगातार बनी रहती है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेकर उचित जांच और उपचार करवाना जरूरी है.












