रेजिना में एक बिजनेस समिट के दौरान, कनाडाई और भारतीय अधिकारियों ने प्रस्तावित एफटीए पर चल रही बातचीत को लेकर उम्मीद जताई है. यह उम्मीद दोनों देशों के बीच 2023 में व्यापार वार्ता रुकने के बाद फिर से शुरू हुए जुड़ाव के बीच जताई गई है. सस्केचेवान के प्रीमियर स्कॉट मो, भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस कूटर और कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने शुक्रवार को सस्केचेवान प्रांत की राजधानी रेजिना में आयोजित ‘पश्चिमी कनाडा-भारत लीडर्स समिट’ में हिस्सा लिया. इस समिट में उन्होंने बाइलेटरल रिलेशंस और प्रस्तावित ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) पर चल रही बातचीत पर चर्चा की, और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से भी बात की.

साल के अंत में हो सकता है एफटीए
कनाडाई ब्रॉडकास्टर CBC न्यूज के अनुसार, कूटर ने कहा कि इस समझौते पर बातचीत जारी है और उन्होंने विश्वास जताया कि इस साल के अंत तक कोई समझौता हो सकता है. उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौता जरूर होगा. मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है. CBC ने यह भी बताया कि पटनायक ने भी कहा कि बातचीत चल रही है. CBC के अनुसार, मो ने सस्केचेवान और भारत के बीच संबंधों को प्रांत के लिए महत्वपूर्ण बताया और चल रही व्यापार वार्ताओं को आशावादी होने का एक कारण बताया. ये टिप्पणियां भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देश इस साल के अंत से पहले मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही, दोनों पक्षों के प्रधानमंत्रियों ने अधिकारियों को यह ज़िम्मेदारी सौंपी है कि वे इस समझौते को पूरा करें और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 17 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाएं.
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2023 में क्यों रुक गई थी वार्ता?
भारत और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता 2023 में तब रुक गई थी, जब ब्रिटिश कोलंबिया में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों के शामिल होने के कनाडाई आरोपों के बाद दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी. भारत ने इन आरोपों को “बेतुका” और “राजनीति से प्रेरित” बताकर खारिज कर दिया था. हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक जुड़ाव फिर से बढ़ा है. इस सप्ताह की शुरुआत में कनाडा की अपनी यात्रा के दौरान, गोयल ने कहा कि कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की हालिया भारत यात्रा ने दोनों देशों के एक-दूसरे को देखने के नजरिए को “पूरी तरह से बदल दिया है” और संबंधों में व्यापक सुधार के लिए एक मंच तैयार किया है. CBC ने बताया कि मो ने भारत के साथ जुड़ाव को फिर से शुरू करने में मदद करने का श्रेय कार्नी को दिया. इसमें इस साल की शुरुआत में मुंबई और नई दिल्ली की उनकी यात्रा भी शामिल है, जिसमें मो ने भी हिस्सा लिया था.
एग्री प्रोडक्ट्स पर होगी बात
इस समिट में हुई चर्चा के दौरान कृषि उत्पादों के व्यापार पर भी बात हुई. CBC News और Global News के अनुसार, Moe ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य के किसी भी व्यापार समझौते में दलहन फसलों को शामिल किया जाएगा, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर उन्हें शामिल नहीं किया जाता है, तो भी यह समझौता टूटने की वजह नहीं बनेगा. Global News ने बताया कि Moe ने कहा कि सस्केचेवान, दलहन आयात पर भारत द्वारा लगाए गए मौजूदा शुल्कों के बावजूद काम चला सकता है, भले ही भविष्य के किसी समझौते के तहत इन शुल्कों को हटाया न जाए. पिछले साल, भारत ने आयातित पीली मटर पर 30 प्रतिशत और मसूर पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिससे इन फसलों के कनाडाई निर्यात पर असर पड़ा था.












