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फिटनेस के चक्कर में न बढ़ाएं खतरा, हार्ट पेशेंट्स इन एक्सरसाइज से रहें दूर

फिटनेस के चक्कर में न बढ़ाएं खतरा, हार्ट पेशेंट्स इन एक्सरसाइज से रहें दूर

गलत तरीके से की गई एक्सरसाइज से हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है. जिससे दिल पर ज्यादा दबाव पड़ता है. यही वजह है कि हार्ट पेशेंट्स के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कौन-सी एक्सरसाइज उनके लिए फायदेमंद है और किन एक्टिविटी से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. सही जानकारी और सावधानी के साथ किया गया वर्कआउट दिल की सेहत को बेहतर बना सकता है, जबकि गलत एक्सरसाइज नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में इस आर्टिकल में जानते हैं उन एक्सरसाइज के बारे में, जिन्हें हार्ट के मरीजों को करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

फिटनेस के चक्कर में न बढ़ाएं खतरा, हार्ट पेशेंट्स इन एक्सरसाइज से रहें दूर
फिटनेस के चक्कर में न बढ़ाएं खतरा, हार्ट पेशेंट्स इन एक्सरसाइज से रहें दूर

एक्सपर्ट का कहना है कि हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों को एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए, लेकिन अपनी शारीरिक क्षमता और डॉक्टर की सलाह के अनुसार. हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट, भारी वजन उठाना या अचानक बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करना कुछ मरीजों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है.

बहुत भारी वजन उठाना

हार्ट मरीजों को बहुत हैवी वेट उठाने वाली एक्सरसाइज से बचना चाहिए. जैसे बहुत भारी डंबल, डेडलिफ्ट, हैवी स्क्वैट्स और बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा सकती हैं और दिल पर दबाव डाल सकती हैं.

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HIIT करने से भी बचें

HIIT में कम समय में बहुत तेज गति से एक्सरसाइज की जाती है. जो हेल्दी लोगों के लिए तो फायदेमंद हो सकती है. लेकिन हार्ट के मरीजों के लिए सेफ नहीं मानी जाती है. इससे हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इसलिए पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

हाई-इम्पैक्ट एक्सरसाइज

हार्ट पेशेंट्स को हाई-इम्पैक्ट एक्सरसाइज जैसे दौड़ना, बार-बार कूदना या ऐसी फिजिकल एक्विटिटी से बचना चाहिए जिसमें अचानक मूवमेंट करने पड़ते हैं. इस तरह की एक्सरसाइज ज्वाइंट पर ज्यादा दबाव डालती है और दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. साथ ही ये हार्ट और ब्लड वेसेल्स पर भी ज्यादा दवाब डाल सकती है.

वार्मअप के बिना न करें एक्सरसाइज

हार्ट की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए बिना वार्मअप और कूलडाउन के सीधे एक्सरसाइज शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है. वार्मअप करने से शरीर और दिल धीरे-धीरे एक्सरसाइज के लिए तैयार होते हैं और हार्ट रेट अचानक नहीं बढ़ता. वहीं, कूलडाउन एक्सरसाइज के बाद दिल की धड़कन और शरीर को सामान्य स्थिति में लौटाने में मदद करता है.

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