प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, इसलिए इस समय सही पोषण का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना जाता है. प्रेगनेंसी में मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए विटामिंस और मिनरल्स अहम भूमिका निभाते हैं. अगर शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाए, तो इसका असर बच्चे के विकास और मां की सेहत पर पड़ सकता है. इस दौरान शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती हैं.

कई बार महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देती हैं या सही मात्रा का ध्यान नहीं रखतीं, जिससे शरीर पर गलत असर भी पड़ सकता है. कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा लेना भी नुकसानदायक माना जाता है. इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान खानपान और सप्लीमेंट्स दोनों पर संतुलित ध्यान देना जरूरी होता है. सही जानकारी और नियमित जांच से मां और बच्चे दोनों की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
प्रेगनेंसी में विटामिंस की सही डोज क्यों जरूरी है?
आरएमएल हॉस्पिटल में महिला रोग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सलोनी चड्ढा बताती हैं कि प्रेगनेंसी में विटामिंस की सही मात्रा मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है. शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने पर कमजोरी, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेने से भी शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है.
डॉक्टर महिला की सेहत, वजन और जरूरत के अनुसार विटामिंस की मात्रा तय करते हैं. सही डोज लेने से बच्चे के विकास में मदद मिलती है और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कई परेशानियों का खतरा कम हो सकता है. इसलिए बिना सलाह के कोई भी दवा या सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता.
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प्रेगनेंसी में किन विटामिंस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है?
प्रेगनेंसी के दौरान फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम और विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों की जरूरत ज्यादा होती है. फोलिक एसिड बच्चे के विकास के लिए जरूरी माना जाता है, जबकि आयरन शरीर में खून की कमी से बचाने में मदद करता है.
इसके अलावा, कैल्शियम और विटामिन डी हड्डियों को मजबूत रखने में सहायक होते हैं. डॉक्टर जरूरत के अनुसार अन्य विटामिंस और मिनरल्स की सलाह भी दे सकते हैं.
विटामिंस लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
प्रेगनेंसी में किसी भी विटामिन या सप्लीमेंट को डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए. सही समय और सही मात्रा का ध्यान रखना जरूरी होता है. इसके अलावा, केवल सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित डाइट लेना भी जरूरी है.
नियमित जांच और डॉक्टर से सलाह लेते रहना मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है.





