उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित पुष्टाहार घोटाला मामले में एक बड़ा और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने इस घोटाले से जुड़ी दो प्रमुख कंपनियों— जेबीएस फूड्स (JBS Foods) और खंडेलवाल सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Khandelwal Soya Industries Limited) को अपनी जांच में बड़ी राहत देते हुए क्लीनचिट दे दी है। लगभग आठ साल की लंबी विवेचना के बाद इन दोनों कंपनियों को आपराधिक आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।
वर्ष 2018 में दर्ज की गई थी एफआईआर
इस मामले की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जब पुष्टाहार आपूर्ति में बड़ी अनियमितता, जीएसटी (GST) व व्यापार कर में गड़बड़ी और अनुबंध के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोपों के तहत दोनों कंपनियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। उस समय इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था और भ्रष्टाचार व टैक्स चोरी के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
साक्ष्य न मिलने पर ईओडब्ल्यू ने सौंपी अंतिम रिपोर्ट
ईओडब्ल्यू (EOW) ने लगभग 8 वर्षों तक इस मामले की गहन विवेचना की। इसके बाद, 20 मार्च 2026 को जांच एजेंसी ने गृह विभाग को अपनी अंतिम रिपोर्ट (Final Report) सौंप दी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाले कोई भी ठोस अभिलेखीय (दस्तावेजी) या मौखिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। ईओडब्ल्यू की इस अंतिम रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अब गृह विभाग ने भी इस पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है।
आपराधिक आरोप साबित नहीं, ₹88 लाख पहले ही जमा
जांच रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ही कंपनियों पर कोई भी आपराधिक आरोप साबित नहीं हो सका है। हालांकि, जांच के दौरान उत्पाद शुल्क (Excise) दावे से जुड़ी लगभग ₹88 लाख की एक वसूली का मामला सामने आया था, जिसे पहले ही संबंधित कर विभाग (Tax Department) में जमा कराया जा चुका था। जिस मामले में कभी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के बड़े आरोप लगे थे, उसमें ईओडब्ल्यू और गृह विभाग से अंतिम रिपोर्ट मंजूर होने के बाद दोनों कंपनियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।











