उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में EPIC नंबर पर दूसरे वोटर्स का विवरण मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस आरोप को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और नामों में सुधार की मांग को लेकर अभियान चला रहे हैं और चुनाव अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप रहे हैं. जबकि कांग्रेस ने भी SIR प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर आज बुधवार को अपना मोर्चा खोल दिया. पार्टी ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में हजारों वोटर्स के विवरण में बदलाव किए जाने के बड़े आरोप लगाए.

हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने पीलीभीत की वोटर लिस्ट में सामने आई विसंगतियों पर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को वोटर लिस्ट के काम से तत्काल हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. साथ ही, प्रदेश के सभी जिला चुनाव अधिकारियों को अपनेअपने जिलों की सभी विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट की गहन जांच कर 2 दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनेअपने चुनावी समीकरण सेट करने में जुटे हैं. ऐसे में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और विवरण बदलने से जुड़े आरोप अब चुनावी राजनीति का अहम मुद्दा बनते दिखाई दे रहे हैं.
पीलीभीत में क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस ने आज बुधवार को यूपी कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों के सनसनीखेज आंकड़े पेश किए. इसमें कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, पार्टी की नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना, पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और सांसद इमरान मसूद शामिल हुए.
कांग्रेस का दावा है कि 10 अप्रैल 2026 को SIR की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 वोटर्स के EPIC नंबर और सीरियल नंबर समान होते हुए भी उनके नाम बदल दिए गए. पार्टी ने 884 ऐसे वोटर्स के नाम हटाए जाने का भी आरोप लगाया, जिनके मुताबिक वे अब भी संबंधित क्षेत्र में रहते हैं. इसके अलावा कांग्रेस ने 2,600 ऐसे वोटर्स को लिस्ट में जोड़े जाने का दावा किया, जो कथित तौर पर मौके पर नहीं रहते हैं.
पार्टी के मुताबिक, इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 16,554 वोटर्स से जुड़ी विसंगतियां सामने आई हैं. पार्टी उसका कहना है कि यदि EPIC नंबर वही रहे, जबकि उस पर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज हो जाए, तो वोटिंग के दिन वास्तविक मतदाता को परेशानी हो सकती है.
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद वोटर्स के विवरण में बदलाव कैसे हुआ, किस स्तर पर हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी है. पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की. कांग्रेस ने यह भी कहा कि वह इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी.
हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं. इन आंकड़ों को अंतिम रूप से प्रमाणित गड़बड़ी मानने से पहले चुनाव अधिकारियों की जांच और विस्तृत रिपोर्ट सामने आना जरूरी है.
अब पूरे उत्तर प्रदेश में होगी जांचः CEO
कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पीलीभीत की वोटर लिस्ट में EPIC नंबर से दूसरे वोटर्स का विवरण सामने आने की शिकायत पर मुख्य चुनाव अधिकारी ने जिला चुनाव अधिकारी से मामले की जांच कराई. जिला चुनाव अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में कुछ वोटर्स के EPIC नंबर ऑनलाइन सर्च करने पर दूसरे वोटर का विवरण प्रदर्शित होने की बात सामने आई.
इसके बाद मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने पीलीभीत सदर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और VRC ऑपरेटर को वोटर लिस्ट के काम से तुरंत हटाने के निर्देश दिए. साथ ही संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए. यही नहीं सहायक चुनाव रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी पर भी स्पष्ट रिपोर्ट मांगी.
रिणवा ने पीलीभीत जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट की गहन जांच कर 2 दिन में रिपोर्ट देने को कहा. साथ ही प्रदेश के सभी जिला चुनाव अधिकारियों को अपनेअपने जिलों की सभी विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट में इस तरह की त्रुटियों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया. हालांकि इस तरह मामला अब केवल पीलीभीत सदर तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश के सभी जिलों की वोटर लिस्ट में समान तरह की विसंगतियों की जांच होगी.
अखिलेश पहले से उठा रहे वोटर लिस्ट का मुद्दा
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. सपा ने कम से कम 100 विधानसभा सीटों पर गड़बड़ियों की शिकायत की है. सपा ने वोटर लिस्ट में नामों की पुनरावृत्ति, एक ही व्यक्ति के नाम पर कई EPIC नंबर और वोटर्स के विवरण में विसंगतियों के उदाहरण सामने रखे हैं. पार्टी का आरोप है कि ऐसी खामियां चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती हैं.
अखिलेश ने आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र में एक व्यक्ति का नाम कथित तौर पर 10 बार दर्ज होने का मुद्दा भी उठाया था. इस मामले में 19 साल के विकास यादव का नाम अलगअलग मतदान केंद्रों की सूचियों में दर्ज होने की बात सामने आई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विकास के पिता ने बताया कि उनके बेटे ने पहली बार मतदाता बनने के लिए फॉर्म6 भरा था. मामला सामने आने के बाद जिला चुनाव कार्यालय ने जांच के लिए कमेटी गठित की. इसलिए इस प्रकरण में भी जांच के निष्कर्ष सामने आना अहम है.
सपा की ओर से कई अन्य दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी कथित दोहरी प्रविष्टियों और एक ही व्यक्ति के नाम पर कई EPIC नंबर होने के उदाहरण दिए गए हैं. अखिलेश इन मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं. सपा का कहना है कि वोटर लिस्ट की कमियों को दूर करने और वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए.
फॉर्म7 और नाम काटने को लेकर भी विवाद
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सियासी विवाद जारी है. फॉर्म7 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में किसी नाम को हटाने या नाम जोड़ने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है. सपा और कांग्रेस की शिकायतों के बीच सवाल उठ रहा है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल नियमानुसार हुआ या कहीं वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए इसका दुरुपयोग किया गया.
आजमगढ़ में एक व्यक्ति के नाम की कई प्रविष्टियों और अन्य जगहों पर कथित दोहरी प्रविष्टियों को लेकर सपा ने सवाल उठाए हैं. वहीं, वोटर लिस्ट में नाम हटाने या बदलने के हर मामले को गड़बड़ी मान लेना भी उचित नहीं होगा. ऐसे मामलों में यह जांच जरूरी है कि प्रविष्टि दोहराई गई है, विवरण में तकनीकी त्रुटि है या किसी नियम के तहत वैध संशोधन किया गया है.
2027 के चुनाव से पहले क्यों अहम है विवाद?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं. ऐसे में वोटर लिस्ट का मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्वास और चुनावी निष्पक्षता से भी जुड़ गया है. इस पूरे विवाद के 3 बड़े पहलू हैं.
पहला, वास्तविक वोटर का नाम सुरक्षित रहे. किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और वह मतदान से वंचित न होने पाए. दूसरा, दोहरी और गलत प्रविष्टियों की पहचान होनी जरूरी है. एक ही व्यक्ति के नाम पर कई प्रविष्टियां या EPIC नंबर होने की शिकायतों की जांच हो और रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाए. तीसरा, जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो. राजनीतिक दलों के आरोपों के साथ चुनाव रिकॉर्ड की भी जांच हो, जिम्मेदारी तय की जाए और निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं.