Farrukhabad News: फर्रुखाबाद के कायमगंज स्थित गंगा दरवाजा मोहल्ले के हर गली और हर घर में सिर्फ एक ही नाम की चर्चा है ‘आर्यन’. वह बेटा, जिसने गरीबी से लड़कर पढ़ाई की, पॉलीटेक्निक के बाद बीटेक किया, मां की उम्मीदों को सहारा देने के लिए नोएडा की राह पकड़ी और नौकरी करते हुए परिवार के बेहतर भविष्य के सपने देखे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वही बेटा एक दिन लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा और उसकी पार्थिव शरीर घर लौटेगा.

फोन आया… लेकिन सच छिपा लिया गया
आर्यन के परिजनों का कहना है कि उन्हें सबसे पहले एक फोन आया, जिसमें सिर्फ इतना बताया गया कि आर्यन की तबीयत खराब है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. परिवार आननफानन में फर्रुखाबाद से नोएडा के लिए रवाना हो गया. उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिस बेटे को देखने जा रहे हैं, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा.
परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने पर उन्हें पता चला कि आर्यन की मौत हो चुकी है. इतना ही नहीं, शुरुआती दौर में उन्हें अस्पताल में शव तक नहीं दिखाया गया. बाद में पुलिस से संपर्क करने पर अधिकारियों ने सहयोग किया और उन्हें घटनास्थल के CCTV फुटेज भी दिखाए.
CCTV में कैद हुई दर्दनाक सच्चाई
आर्यन के चाचा ने बताया कि जब उन्होंने CCTV फुटेज देखी तो पूरा घटनाक्रम सामने आ गया. फुटेज में दिखा कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां एक पोल में करंट दौड़ रहा था. उसी के पास नाला भी था. आर्यन उसकी चपेट में आ गया. उसे बचाने के लिए एक अन्य व्यक्ति भी दौड़ा, लेकिन उसे भी करंट का झटका लगा और वह पीछे हट गया. कोई भी आर्यन को बचा नहीं सका.
परिजनों का सवाल है कि अगर सार्वजनिक स्थान पर बिजली का पोल करंट से प्रभावित था तो उसकी मरम्मत क्यों नहीं की गई? आखिर इतनी बड़ी और आधुनिक कही जाने वाली नोएडा जैसी सिटी में ऐसी खतरनाक लापरवाही कैसे हो सकती है?
संघर्षों से भरी थी आर्यन की जिंदगी
आर्यन की कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि संघर्ष और जिम्मेदारियों की कहानी भी है. फर्रुखाबाद के कायमगंज तहसील के गंगा दरवाजा मोहल्ले का रहने वाला आर्यन बेहद साधारण परिवार से था. उसने पॉलीटेक्निक के बाद बीटेक की पढ़ाई पूरी की और करीब ढाई वर्ष पहले नौकरी की तलाश में नोएडा चला गया.
बताया जाता है कि वह नोएडा की एक सोलर पैनल फैक्ट्री में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था. परिवार के मुताबिक, वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और लगातार बेहतर अवसरों की तलाश में मेहनत कर रहा था.
पिता पहले ही चले गए, अब मां का आखिरी सहारा भी छिन गया
आर्यन के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बेहद कमजोर थी. पांच वर्ष पहले उसके पिता संजय कुमार प्रजापति, जो कंपाउंडर का काम करते थे, कैंसर से पीड़ित होने के बाद दुनिया छोड़ गए थे. पिता के निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी मां रेनू देवी और आर्यन के कंधों पर आ गई.
घर में न जमीन थी और न ही पैतृक मिट्टी के बर्तन बनाने का काम बचा था, जिससे परिवार का गुजारा हो सके. ऐसे हालात में मां ने कठिन परिस्थितियों के बीच बेटे की पढ़ाई पूरी कराई. आर्यन भी नौकरी कर मां का सहारा बना और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहा था.
एक हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया
गुरुवार देर शाम आर्यन का शव फर्रुखाबाद पहुंचा. बेटे का शव देखते ही मां बेसुध हो गई. शुक्रवार सुबह पूरे गांव और मोहल्ले की मौजूदगी में आर्यन का अंतिम संस्कार कर दिया गया. हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही सवाल था कि अगर समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त होतीं तो शायद आर्यन आज जिंदा होता.
लापरवाही पर उठ रहे सवाल
आर्यन की मौत ने एक बार फिर शहरी व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजनों का कहना है कि नोएडा जैसे विकसित शहर में यदि खुले नाले, करंट वाले पोल और खराब सुरक्षा व्यवस्था लोगों की जान ले रही है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
एक मां ने पहले पति को खोया और अब इकलौते बेटे को भी. आर्यन की मौत सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की चिंता भी है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में अपने घरों से दूर बड़े शहरों का रुख करते हैं. अगर बुनियादी सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं होगी तो ऐसे सपने कब तक यूं ही लापरवाही की भेंट चढ़ते रहेंगे?