मुंबई। उत्तराखंड के पहाड़ों में पनपी मोहब्बत, अपनों से बिछड़ने का दर्द और उम्रभर किसी की राह देखने की कहानी अब बड़े पर्दे पर दर्शकों का दिल छूने आ रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’ ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में 18 पुरस्कार हासिल कर अपनी पहचान बनाई है। अब यह फिल्म 30 अक्टूबर 2026 को हिंदी और मलयालम में भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

उम्र ढल गई, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ!
‘पायर’ की कहानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के एक दूरदराज पहाड़ी गांव में रहने वाले बुजुर्ग दंपती आमा और बुबू के इर्दगिर्द घूमती है। दोनों की जिंदगी एकदूसरे के साथ, पुरानी यादों और अपने बच्चों की वापसी की उम्मीद के सहारे आगे बढ़ती है।
रोजमर्रा की जिंदगी में अकेलापन बढ़ता जाता है, गांव की रौनक कम होती जाती है और बच्चों के दूर चले जाने से घर सूना पड़ जाता है। इसके बावजूद आमाबुबू का रिश्ता समय के साथ कमजोर नहीं पड़ता। फिल्म इसी सवाल को भावनात्मक अंदाज में सामने रखती है कि जब उम्र के आखिरी पड़ाव पर अपनों का साथ सबसे ज्यादा जरूरी हो, तब उनसे दूरी का दर्द कैसा होता है।
असली जिंदगी के लोगों ने निभाए मुख्य किरदार
फिल्म की खासियत यह है कि इसके मुख्य कलाकार पदम सिंह कापड़ी और हीरा देवी ने इससे पहले कैमरे के सामने अभिनय नहीं किया था। दोनों उत्तराखंड के निवासी हैं। पदम सिंह कापड़ी पूर्व सैनिक हैं, जबकि हीरा देवी गृहिणी और पूर्व नृत्य कलाकार रही हैं।
निर्देशक विनोद कापड़ी ने कहानी की वास्तविकता को पर्दे पर उतारने के लिए ऐसे कलाकारों को चुना, जिनके जीवन के अनुभव फिल्म के किरदारों से मेल खाते हैं। उनकी सहज अदाकारी फिल्म को एक अलग भावनात्मक गहराई देती है।
18 पुरस्कारों से अंतरराष्ट्रीय पहचान
‘पायर’ का वर्ल्ड प्रीमियर एस्टोनिया के टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां इसे दर्शकों की पसंद का सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद फिल्म ने कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
निर्माताओं के अनुसार, फिल्म को अब तक 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें 15 सर्वश्रेष्ठ फिल्म के पुरस्कार शामिल हैं। निर्देशन के साथसाथ फिल्म के संगीत, सिनेमैटोग्राफी और साउंड को भी सराहना मिली है।
गुलजार के बोल और माइकल डैना का संगीत
फिल्म के गीत मशहूर गीतकार गुलजार ने लिखे हैं, जबकि संगीत माइकल डैना और सार सिंघल ने तैयार किया है। पहाड़ों की प्राकृतिक खूबसूरती और बुजुर्ग दंपती की भावनाओं को जोड़ती यह फिल्म उन रिश्तों की कहानी कहती है, जिनकी गहराई शब्दों से ज्यादा खामोशी में महसूस होती है।
30 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हासिल करने के बाद अब ‘पायर’ भारतीय दर्शकों तक पहुंचने जा रही है। फिल्म का वितरण सिनेपोलिस कर रहा है। इसकी कहानी खास तौर पर उन लोगों को प्रभावित कर सकती है, जिन्होंने परिवार से दूरी, पलायन और बुजुर्ग मातापिता के अकेलेपन को करीब से देखा है।
‘पायर’ की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यह बड़ेबड़े संवादों से नहीं, बल्कि इंतजार करते दो दिलों की खामोशी से मोहब्बत की कहानी कहती है।