एपल की पहचान उसके लोगो से होती है. जो कटे हुए सेब के रूप में दिखता है, लेकिन दिलचस्प बात है कि जो लोगो आज एपल की पहचान है, वो हमेशा से नहीं था. एपल का पहला लोगो असल में एक लोगो नहीं, एक पूरी तस्वीर था. साल 1976 में जब स्टीव जॉब्स, स्टीव वोज्नियाक और रोनाल्ड वेन ने मिलकर एपल कंपनी की नींव रखी, उसी दौरान कंपनी को अपने पहले लोगो की जरूरत पड़ी. लोगो की ज़िम्मेदारी उठाई तीसरे कोफाउंडर रोनाल्ड वेन ने. आज इसकी चर्चा इसलिए क्योंकि दिग्गज कंपनी एपल का सरप्राइज एंड शाइन इवेंट 9 सितंबर को रात 10:30 बजे शुरू होगा. पहली बार आईफोन 18 प्रो, आईफोन 18 प्रो मैक्स और कंपनी के पहले फोल्डेबल आईफोन की ऑफिशियल तस्वीर सामने आएगी. अब लोगो की कहानी पर वापस लौटते हैं.

तीसरे कोफाउंडर रोनाल्ड वेन ने लोगों का जो डिजाइन बनाया, उसमें महान वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन को एक पेड़ के नीचे बैठकर किताब पढ़ते हुए दिखाया गया था. ठीक उसी पल में, जब एक सेब उनके सिर पर गिरने ही वाला होता है.
आखिर न्यूटन को ही क्यों चुना गया?
पहले लोगो में न्यूटन और सेब की तस्वीर के साथ इसके चारों ओर एक रिबन था, जिस पर लिखा था Apple Computer Co. और साथ ही अंग्रेज़ी कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की एक पंक्ति भी उकेरी गई थी, जो न्यूटन की महान सोच की तारीफ में लिखी गई थी. पूरा डिजाइन ब्लैक एंड वाइट था और उसे हाथ से बनाया गया था. देखने में किसी पुरानी किताब के कवर या 19वीं सदी के प्रिंट जैसा लगता था.
एपल का पहला लोगो.
लोगो के लिए न्यूटन को ही क्यों चुना, एक इंटरव्यू में रोनाल्ड वेन ने इसकी वजह बताई थी. उन्होंने बताया था कि उनका मकसद था साइंस और खोज की भावना को लोगो में उतारना. न्यूटन उस दौर के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में गिने जाते थे, जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण के नियम से लेकर मैकेनिक्स तक पर गहरा काम किया था. दूसरी तरफ स्टीव जॉब्स कंपनी के नाम के लिए ‘Apple’ शब्द पर पूरी तरह अड़े हुए थे. वेन ने इन दोनों चीजो को जोड़ते हुए न्यूटन के मशहूर सेब वाले किस्से को अपने डिज़ाइन का आधार बना दिया, यानी लोगो एक तरह से विज्ञान, ज्ञान और खोज की कहानी कहता था. लेकिन यह डिजाइन बहुत जल्दी पुराना और बोझिल साबित हुआ.
एपल के कोफाउंडर स्टीव जॉब्स, स्टीव वोज्नियाक और रोनाल्ड वेन.
एक साल के अंदर क्यों बदला लोगो?
छोटे आकार में छापने पर इसकी बारीकियां गायब हो जाती थीं, और यह उस आधुनिक, आसान छवि से मेल नहीं खाता था जो स्टीव जॉब्स कंपनी के लिए चाहते थे. यही वजह रही कि यह लोगो सिर्फ एक साल के आसपास ही इस्तेमाल हो पाया.
1977 की शुरुआत में जॉब्स ने विज्ञापन एजेंसी रेगिस मैकेना के आर्ट डायरेक्टर रॉब जानॉफ को नया लोगो बनाने का काम सौंपा. जानॉफ को सिर्फ एक हिदायत दी गई थी इसे क्यूट मत बनाना. उन्होंने कुछ ही हफ्तों में जो डिजाइन तैयार किया, वही आज दुनिया भर में पहचाना जाने वाला बहुरंगी, कटा हुआ सेब है. खास बात यह कि जानॉफ ने अपने करियर में पहली और आखिरी बार किसी क्लाइंट को सिर्फ एक ही डिजाइन दिखाया, और जॉब्स ने उसे बिना किसी बदलाव के तुरंत मंजूर कर लिया.
रॉब जानॉफ.
सेब में कट क्यों लगाया गया?
एपल लोगों में सेब के कटे हुए हिस्से को लेकर सालों से कई कहानियां चलती रहीं, कोई इसे ईव के सेब खाने से जोड़ता, तो कोई कंप्यूटर वैज्ञानिक एलन ट्यूरिंग की दुखद मौत से, जिन्होंने कथित तौर पर साइनाइड में डूबा सेब खाकर जान दी थी, लेकिन खुद रॉब जानॉफ ने एक इंटरव्यू में इन सारी कहानियों को सिरे से खारिज कर दिया था.
एपल का वर्तमान लोगो.
उनका कहना था कि इसकी असली वजह बेहद सीधी थी स्केल. बिना किसी कट के सेब छोटे आकार में चेरी या टमाटर जैसी दिखता, इसलिए उन्होंने जानबूझकर एक तरफ से कट लगाया, ताकि हर आकार में यह साफ पहचाना जा सके कि यह सेब ही है. दिलचस्प बात यह रही कि लोगो बनाने के बाद उनके क्रिएटिव डायरेक्टर ने नोटिस किया कि अंग्रेज़ी में ‘bite’ सुनने में कंप्यूटर की भाषा के शब्द “byte” जैसा लगता है. यह महज एक सुखद संयोग था न कि जानबूझकर किया गया वर्डप्ले. हालांकि बाद में एपल ने इसका फायदा उठाते हुए Byte into an Apple जैसे प्रचार अभियान भी चलाए.
2017 के बाद से एपल के लोगो का यही डिजाइन आज भी जारी है.
रॉब जानॉफ का बनाया यह डिजाइन 1998 तक बहुरंगी पट्टियों के साथ इस्तेमाल होता रहा, इसके बाद इसे मोनोक्रोम रूप दे दिया गया, लेकिन कटे हुए सेब का बुनियादी आकार आज तक वही है जो 1977 में तय हुआ था. यही वजह है कि आज ऐपल का लोगो दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले ब्रांड आइडेंटिटी में गिना जाता है. जबकि इसकी शुरुआत एक जटिल, सेबरहित, न्यूटन वाले स्केच से हुई थी, जिसे शायद ही आज कोई पहचान पाएगा.