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‘नशीला पदार्थ पिलाकर मेरा अपहरण किया था…’ झूठी निकली महिला की किडनैपिंग की थ्योरी, इटावा पुलिस ने किया खुलासा

‘नशीला पदार्थ पिलाकर मेरा अपहरण किया था…’ झूठी निकली महिला की किडनैपिंग की थ्योरी, इटावा पुलिस ने किया खुलासा

Etawah fake Kidnapping Case: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्यरत एक संविदाकर्मी महिला के अपहरण और नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. जांच में महिला शिकायत पूरी तरह फर्जी निकली है. पुलिस ने बताया कि रुपये के लेनदेन और पुराने विवाद के चलते महिला ने अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर खुद के अपहरण की साजिश रची और विरोधियों को झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया था.

Khabar Monkey

‘नशीला पदार्थ पिलाकर मेरा अपहरण किया था…’ झूठी निकली महिला की किडनैपिंग की थ्योरी, इटावा पुलिस ने किया खुलासा
‘नशीला पदार्थ पिलाकर मेरा अपहरण किया था…’ झूठी निकली महिला की किडनैपिंग की थ्योरी, इटावा पुलिस ने किया खुलासा

पुलिस के अनुसार, नगला सेव निवासी सरिता पत्नी राजेश कुमार ने 27 मई को थाना लवेदी में मुकदमा दर्ज कराया था. उसने आरोप लगाया था कि 26 मई की शाम सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी से ड्यूटी कर घर लौटते समय कुछ लोगों ने उसका अपहरण कर लिया था. महिला ने बताया कि उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया और बाद में लवेदी क्षेत्र के एक सुनसान स्थान पर छोड़ दिया गया. सूचना के बाद पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और मामले की जांच शुरू की.

100 CCTV फुटेज खंगाले

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इटावा बृजेश कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर एसपी क्राइम संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में एसओजी, सर्विलांस और थाना लवेदी पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई. टीम ने ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत जिलेभर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. साथ ही मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य तकनीकी तथ्यों की भी जांच की गई. जांच के दौरान करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया गया.

घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे आरोपी

जांच में सामने आया कि जिन लोगों को महिला ने अपहरण का आरोपी बताया था, वे घटना के समय कथित घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे. पुलिस को महिला द्वारा बताए गए घटनाक्रम की भी पुष्टि नहीं मिली. तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों ने अपहरण की कहानी को गलत साबित कर दिया. इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से पड़ताल की तो पूरा घटनाक्रम संदिग्ध पाया गया. जांच में पता चला कि महिला और जिन लोगों को उसने नामजद किया था, उनके बीच पहले से रुपये के लेनदेन और मुकदमेबाजी को लेकर विवाद चल रहा था.

महिला ने दर्ज कराई थी झूठी FIR

पुलिस के अनुसार इसी विवाद के कारण विरोधियों को कानूनी कार्रवाई में फंसाने के उद्देश्य से झूठी कहानी तैयार की गई थी. जांच में चौबिया थाना क्षेत्र के गौरा दयालपुर निवासी अमरपाल यादव की भूमिका भी सामने आई, जिसने कथित साजिश में महिला का सहयोग किया था. 31 मई को एसओजी, सर्विलांस और थाना लवेदी पुलिस की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर ददौरा शामला मंदिर के पास से अमरपाल यादव को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस को दी थी गलत जानकारी

पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बाद में सरिता को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के अनुसार दोनों ने मिलकर झूठे साक्ष्य तैयार किए और पुलिस को भ्रामक सूचना देकर निर्दोष लोगों को फंसाने का प्रयास किया. पुलिस ने बताया कि जांच में अपहरण की घटना झूठी पाए जाने के बाद मूल मुकदमे से अपहरण संबंधी धाराओं को हटा दिया गया है. इसके स्थान पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 231, 61(2) और 319(2) जोड़ी गई हैं.

दोनों आरोपितों के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है. एसपी क्राइम संतोष कुमार सिंह ने बताया कि करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, सीडीआर विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर फर्जी अपहरण की घटना का सफल खुलासा किया गया है. जांच में स्पष्ट हुआ कि रुपये के लेनदेन के विवाद में बेगुनाह लोगों को फंसाने के लिए महिला ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर खुद के अपहरण की साजिश रची थी.

khabarmonkey@gmail.com

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