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तेल कंपनियों पर सरकार का बड़ा चाबुक! पेट्रोल-डीजल के एक्सपोर्ट पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स, जानिए नया रेट​

इंटरनेशनल मार्केट में में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में उतारचढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय तेल कंपनियों को बड़ा झटका दिया है. सरकार ने 3 अगस्त 2026 से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है. अब डीजल के एक्सपोर्ट पर टैक्स बढ़ाकर […]

इंटरनेशनल मार्केट में में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में उतारचढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय तेल कंपनियों को बड़ा झटका दिया है. सरकार ने 3 अगस्त 2026 से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है. अब डीजल के एक्सपोर्ट पर टैक्स बढ़ाकर रिकॉर्ड 25.5 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर 3.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है.

ग्लोबल मार्केट में जब तेल कंपनियां घरेलू बाजार की बजाय विदेशों में फ्यूल बेचकर अप्रत्याशित मुनाफा कमाने लगती हैं, तब सरकार यह टैक्स लगाती है. आखिर सरकार ने अचानक एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला क्यों लिया? इससे रिलायंस और नयारा जैसी दिग्गज रिफाइनिंग कंपनियों पर क्या फर्क पड़ेगा और क्या इसका असर आम आदमी की जेब या घरेलू पेट्रोलडीजल के दामों पर होगा? आइए इस पूरे गणित को आसान भाषा में समझते हैं.

विंडफॉल टैक्स में इजाफा

  1. सरकार ने सोमवार से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल के एक्सपोर्ट पर ‘विंडफॉल गेन्स टैक्स’ बढ़ा दिया है.
  2. डीजल के एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी की दर 15.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 25.5 रुपए प्रति लीटर हो गई है.
  3. वहीं दूसरी ओर एयर टर्बाइन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी पहले के 14.5 रुपए प्रति लीटर के मुकाबले 22 रुपए प्रति लीटर होगी.
  4. पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 16 जुलाई को लागू 2.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है. वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि ड्यूटी में यह बढ़ोतरी 3 अगस्त से लागू होगी.

क्यों लगाया गया विंडफॉल टैक्स?

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, सरकार ने 27 मार्च को डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी लगाई थी और हर पखवाड़े इसकी दर में बदलाव किया है. 16 मई से पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर भी यह लेवी लगाई गई थी. मंत्रालय ने यह भी कहा कि घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वेस्ट एशिया में युद्ध के बीच ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए यह ‘विंडफ़ॉल टैक्स’ लगाया गया था. इसका मकसद एक्सपोर्ट करने वालों को कीमतों के अंतर का अनुचित फ़ायदा उठाने से रोकना भी था, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई थीं. इस ‘विंडफ़ॉल टैक्स’ का मकसद वेस्ट एशिया संकट के बीच एक्सपोर्ट को हतोत्साहित करके पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना था.

तेल कंपनियों और आम जनता पर क्या असर होगा?

पहले तेल कंपनियों की बात करें तो इस टैक्स से निजी रिफाइनरीज को झटका लगना तय है. Reliance Industries Limited और Nayara Energy जैसी कंपनियों की जामनगर और वाडिनार रिफाइनरीज से बड़े पैमाने पर यूरोप व अन्य देशों को फ्यूल एक्सपोर्ट होता है. एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से उनका मार्जिन थोड़ा कम होगा. वहीं दूसरी ओर सरकारी तेल कंपनियों पर इसका असर कम देखने को मिल सकता है. उसका कारण है कि IOCL, BPCL और HPCL जैसी सरकारी कंपनियां अपना अधिकांश उत्पादन घरेलू बाजार में ही बेचती हैं. अच्छी खबर ये है कि इस टैक्स का घरेलू पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यह टैक्स केवल देश से बाहर भेजे जाने वाले ईंधन पर लगाया जाता है. इसलिए भारतीय पंपों पर मिलने वाले पेट्रोलडीजल के दाम स्थिर रहेंगे.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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