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तमिलनाडु में 5.57 करोड़, तो दिल्ली में 5 साल में 90 लाख लोगों का कटा चालान, 5 पॉइंट्स में समझिए पूरा डेटा​

दिल्ली में ट्रैफिक नियमों को लेकर सख्ती लगातार बढ़ रही है. जनवरी से जून 2026 के बीच दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 48.42 लाख चालान जारी किए, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 1 लाख ज्यादा हैं. इनमें 17.21 लाख चालान रेड लाइट व स्पीड वॉयलेशन डिटेक्शन कैमरों के जरिए काटे गए. ट्रैफिक […]

दिल्ली में ट्रैफिक नियमों को लेकर सख्ती लगातार बढ़ रही है. जनवरी से जून 2026 के बीच दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 48.42 लाख चालान जारी किए, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 1 लाख ज्यादा हैं. इनमें 17.21 लाख चालान रेड लाइट व स्पीड वॉयलेशन डिटेक्शन कैमरों के जरिए काटे गए. ट्रैफिक जाम कम करने के लिए पुलिस ने 30 प्रमुख कंजेशन हॉटस्पॉट पर सुधारात्मक काम किए हैं, जबकि 8 सिग्नलफ्री कॉरिडोर भी विकसित किए गए हैं. इसके अलावा खतरनाक ड्राइविंग के मामलों में 2,187 एफआईआर दर्ज की गईं. अधिकारियों का कहना है कि तकनीक आधारित निगरानी, इंजीनियरिंग सुधार और सख्त प्रवर्तन के जरिए राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है.

दिल्ली के ताजा आंकड़े यह दिखाते हैं कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई लगातार तेज हो रही है. लेकिन अगर पूरे देश के पांच वर्षों के ईचालान डेटा को देखें तो तस्वीर और भी दिलचस्प है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में इस दौरान में 18.24 करोड़ से ज्यादा ईचालान जारी किए गए और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को 1.26 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला. आइए जानते हैं कि किस राज्य में सबसे ज्यादा चालान कटे, किसे सबसे ज्यादा राजस्व मिला और दिल्ली इस सूची में कहां खड़ी है.

1. पांच सालों में किस राज्य में सबसे ज्यादा चालान कटे?

पांच वर्ष 2019 से लेकर 2023 तक के आधिकारिक आकड़ों की बात करें तो ईचालान आंकड़ों में तमिलनाडु सबसे ऊपर रहा. यहां करीब 5.57 करोड़ ईचालान जारी किए गए. दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश रहा, जहां करीब 4.40 करोड़ चालान काटे गए. इसके बाद केरल 1.88 करोड़, हरियाणा में 1.03 करोड़ और दिल्ली में 90.22 लाख चालान कटे. इससे साफ है कि बड़े राज्यों के साथसाथ दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश में भी ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई है.

2. किस केंद्र शासित प्रदेश में सबसे ज्यादा चालान कटे?

अगर केवल केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो दिल्ली सबसे आगे रही. पांच वर्षों में यहां 90,22,711 ईचालान जारी किए गए. इसके बाद चंडीगढ़ में 22.90 लाख, पुडुचेरी में 2.90 लाख, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में करीब 58 हजार तथा लद्दाख में 651 ईचालान जारी हुए. यानी केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली का आंकड़ा बाकी सभी से काफी ज्यादा है.

3. किस राज्य से सबसे ज्यादा राजस्व मिला?

चालानों की संख्या में तमिलनाडु पहले स्थान पर जरूर रहा, लेकिन रेवेन्यू के मामले में सबसे आगे रहा. यूपी को पांच वर्षों में चालान के जरिए 24,951 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू मिला. इसके बाद हरियाणा को 14,651 करोड़ रुपये, बिहार को 14,003 करोड़ रुपये और राजस्थान 13,934 करोड़ रुपये रहे. वहीं तमिलनाडु को करीब 7,556 करोड़ रुपये और दिल्ली को 5,714 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हुआ.

4. देशभर में कुल कितने चालान और कितना राजस्व?

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, 1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2023 के बीच देशभर में 18.24 करोड़ ईचालान जारी किए गए. इन चालानों से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1 लाख करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू मिला. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये डेटा सारे राज्यों का नहीं है. इसमें तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, लक्षद्वीप और अंडमाननिकोबार के आंकड़े शामिल नहीं हैं, क्योंकि वहां उस समय तक ईचालान प्रणाली पूरी तरह लागू नहीं थी.

5. दिल्ली सरकार और ट्रैफिक पुलिस के हालिया कदम क्या हैं?

दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए केवल चालान काटने पर ही जोर नहीं दिया जा रहा, बल्कि सड़क इंजीनियरिंग और तकनीकी सुधार भी किए जा रहे हैं. इस साल 30 बड़े कंजेशन हॉटस्पॉट पर सुधार किए गए हैं. वहीं 8 सिग्नलफ्री कॉरिडोर विकसित कर अनावश्यक ट्रैफिक सिग्नलों को हटाया गया, यूटर्न बनाए गए और चौराहों का पुनर्गठन किया गया. रेड लाइट व स्पीड वॉयलेशन डिटेक्शन सिस्टम का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे लाखों चालान स्वत: कैमरों के जरिए जारी हुए. ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य सिर्फ जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा बढ़ाना और जाम कम करना है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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