विदेशी निवेशकों की भारत के शेयर बाजार से बेरुखी लगातार बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. खास बात तो ये है कि अक्टूबर के महीने में विदेशी निवेशकों ने 44 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली कर ली है. अगर साल 2026 के आंकड़े को देखें तो ये बिकवाली 3 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है. एनएसडीएल साल 2002 से इन आंकड़ों को कलेक्ट कर रहा है. इन 24 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निकाल लिए हैं. वहीं साल 2020 के बाद ये तीसरा ऐसा साल है जब विदेशी निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा शेयर बाजार से निकाले हैं. साल 2022, 2025 ऐसे साल थे तक विदेशी निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली की थी. वहीं किसी एक महीने में जून के बाद से ये सबसे बड़ी निकासी देखने को मिली है. अक्टूबर का ये आंकड़ा अभी बढ़ सकता है. महीना पूरा होने में अभी भी काफी वक्त है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस तरह के आंकड़े देखने को मिले हैं.

विदेशी निवेशकों अक्टूबर में बड़ी बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला लगातार जारी है. अक्टूबर में अबतक विदेशी निवेशकों ने 44,166 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं. इसके साथ ही वर्ष 2026 में अबतक उनकी कुल निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉण्ड पर बढ़ते प्रतिफल के कारण विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार से कमजोर हुआ है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भी भारतीय शेयर बाजार से 35,861 करोड़ रुपए निकाले थे. हालांकि, जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपए और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपए का निवेश किया था.
3 लाख करोड़ की ऐतिहासिक बिकवाली
इस साल अबतक हुई निकासी पिछले पूरे वर्ष के मुकाबले काफी अधिक है. वर्ष 2025 के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल 1.66 लाख करोड़ रुपए निकाले थे, जबकि चालू वर्ष में यह आंकड़ा बढ़कर 3.04 लाख करोड़ रुपए हो गया है. खास बात तो ये है कि आज किसी भी साल में विदेशी निवेशकों ने 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं निकाले हैं. साल 2002 के बाद से ऐसे तीन बार ही मौके आए हैं, जब विदेशी निवेशकों ने किसी एक साल में 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पैसे निकाले हैं. साल 2022 में 1,21,439 करोड़ रुपए निकाले थे. ये वो साल साल था जब रूस और यूक्रेन वॉर शुरू हो गया था. जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी. महंगाई में इजाफा होने की वजह से ब्याज दरों में इजाफा हुआ था और विदेशी निवेशकों ने बिकवाली शुरू की थी. साल 2025 में 1,66,286 करोड़ रुपए की मुनाफावसूली हुई. ये अब तक का रिकॉर्ड था. मुमकिन है कि साल 2026 में ये मुनाफावसूली पिछले साल के मुकाबले में डबल ना हो जाए.
ये है बिकवाली का सबसे बड़ा कारण
इंवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के कोफाउंडर एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी वेदांत गुप्ते के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली को भारत की निवेश संभावनाओं पर अविश्वास के रूप में देखने के बजाय वैश्विक स्तर पर पूंजी के पुनर्वितरण के तौर पर समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति संबंधी जोखिमों के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉण्ड पर अधिक प्रतिफल निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहा हैं. वहीं, उत्तर एशियाई बाजारों में कृत्रिम मेधा से जुड़ी तेजी भी विदेशी पूंजी को अपनी ओर खींच रही है.
शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि इस वर्ष भारतीय बाजार के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन की प्रमुख वजह विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली रही है. वर्ष 2026 में अबतक निफ्टी में 13.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. उनके अनुसार, विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार से पूंजी निकालना मौजूदा परिस्थितियों में तर्कसंगत है, क्योंकि 10वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉण्ड पर प्रतिफल 5.2 प्रतिशत से ऊपर बताया गया है. ऐसे में निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों में आकर्षक रिटर्न मिल रहा है. विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय ऋण या बॉण्ड बाजार में भी बिकवाली की है. उन्होंने पूर्ण पहुंच मार्ग के तहत ₹1,921 करोड़ और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग के तहत 233 करोड़ रुपए निकाले हैं. हालांकि, सामान्य मार्ग के जरिये उन्होंने 4,729 करोड़ रुपए का निवेश किया है.